Road Accident Claim कौन भुगतेगा: रजिस्टर्ड मालिक या रिअल यूजर

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who will bear road accident claim: registered owner or real user second party

मोदी सरकार ने दो साल में बाबा आदम के जमाने के 1159 कानूनों को खत्म किया है। पहले के 64 सालों में सरकारें 1300 से ज्यादा कानूनों को डिलीट कर चुकी हैं। फिर भी  लीगल जस्टिस सिस्टम में कानूनी पहेलियों की कमी नहीं है और Road Accident Claim की ऐसी ही एक पहेली इन दिनों सुलझने के लिये हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल के रास्ते सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।
इस पहेली को इस तरह समझ सकते हैं। माना आपके पास कोई गाड़ी और इसे आपने किसी सज्जन को बेच दिया। गाड़ी तो संभला दी लेकिन कागजों में आपके ही नाम पर है। अब यदि इस गाड़ी से एक्सीडेंट होता है तो सवाल यह है कि Road Accident Claim के लिये जिम्मेदार आप होंगे या वो जिन्होंने गाड़ी खरीदी और एक्सीडेंट किया।
यह कोई नबादा मामला नहीं है और देश में करोड़ों बाइक-स्कूटर-कार-ट्रक-बस आदि ऐसे होंगे जो बिक चुके हैं लेकिन कागजों में फर्स्ट पार्टी के नाम है। बिना इंश्योरेंस चलने वाली गाडिय़ां भी करोड़ों हैं।
यहां एक पेंच है यदि सैकंड पार्टी ने गाड़ी को अपने नाम ट्रान्सफर नहीं कराया है यानि गाड़ी कागजों में आपके ही नाम पर है और इंश्योरेंस भी नहीं कराया है। ऐसे में यदि गाड़ी का एक्सीडेंट होता है तो मुआवजा (Road Accident Claim) देने के लिये जिम्मेदार कौन होगा।
आम तौर पर कह सकते हैं वो जो गाड़ी को चला रहा है। लेकिन पहेली इतनी आसान है नहीं जितनी नजर आती है।
ऐसा ही एक मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के पास पहुंचा। जिसमें बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ी का Road Accident Claim निकलने पर फस्र्ट और सैकंड पार्टी झगड़ते हुये कोर्ट पहुंच गईं। नवीन कुमार की गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ और 5.23 लाख रुपये का क्लेम निकला। तो हाईकोर्ट ने गाड़ी का रियल यूज़र होने के नाते नवीन कुमार को क्लेम देने का आदेश दिया। लेकिन नवीन कुमार ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील की है। नवीन कुमार के एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा के अनुसार कार नवीन कुमार के नाम पर रजिस्टर्ड ही नहीं है ऐेसे मेंं मुआवजा ( Road Accident Claim ) देने के लिये उन्हें बाध्य नहीं किया जा सकता।
मल्होत्रा के अनुसार मोटर वेहीकल एक्ट के अनुसार सिर्फ कानून सिर्फ रजिस्टर्ड ओनर यानि पंजीकृत मालिक यानि गाड़ी जिसके नाम पर रजिस्टर्ड है उसी को मान्यता देता है ना कि रिअल यूजर को। रिअल यूजर जरूरी नहीं कि गाड़ी का रजिस्टर्ड ओनर भी हो। ऐसे में Road Accident Claim देने के लिये सिर्फ रजिस्टर्ड ओनर ही जिम्मेदार है।
रजिस्टर्ड ओनर और रिअल यूजर के बीच के इसी अंतर को अहमियत देते हुये मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने इस मामले में साफ कहा था कि Road Accident Claim देने की जिम्मेदारी रजिस्टर्ड ओनर यानि उस व्यक्ति की है जिसके नाम पर एक्सीडेंट के समय गाड़ी रजिस्टर्ड थी। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि सिर्फ रजिस्टर्ड ओनर को ही मुआवजा देने के लिये जबावदेह ठहराया जा सकता है।
इस मामले में पेंच को देखते हुये सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को स्टे कर आगे सुनवाई करने का फैसला किया है। Image Credit: DeathandReality

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