Volkswagen ग्लोबल नम्बर वन: सेल्स घटने से टोयोटा पिछड़ी

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Volkswagen  beat toyota to claim podium in H1 2016

चार साल से पहले पायदान पर कब्जा जमाये रखने वाली जापानी कम्पनी टोयोटा को चालू वर्ष के पहले 6 महिनों में बड़ा झटका लगा है। सबसे बड़ी ऑटोमेकर की दौड़ में टोयोटा को पीछे छोड़ Volkswagen ने पहले पायदान पर कब्जा जमा लिया है। सालाना आंकड़ों के आधार पर टोयोटा के इस वर्ष पहले स्थान से बेदखल होन का खतरा है लेकिन इसके पीछे बड़ी वजह कम्पनी के जापान स्थित कुछ प्लांट्स में उत्पादन हाल के महिनों में हुये हादसों के कारण बंद हो जाना है।

चालू वर्ष के पहले छह महिनों में टोयोटा ने कुल 49.90 लाख गाडिय़ां बेचीं। जबकि Volkswagen ने 51.20 लाख। यानि Volkswagen को टोयोटा पर 1.30 लाख यूनिट्स की लीड़ लेने में कामयाबी मिली है। वैसे पिछले साल के पहले छह महिनों में भी फोक्सवैगन ने टोयोटा को पीछे छोड़ दिया था लेकिन सितम्बर में अचानक एमिशन स्कैंडल सामने आया और पहले पायदान की दौड़ में Volkswagen के पीछे छूट जाने से एक बार फिर टोयोटा अव्वल रही थी।

जापान स्थित कुछ प्लांट्स में उत्पादन प्रभावित होने के साथ ही उत्तर अमेरिका में टोयोटा की सेल्स घटी है और 49.90 लाख यूनिट्स का यह आंकड़ा पिछले वर्ष के पहले छह महिने में हुई सेल्स के मुकाबले भी कम है। अमेरिकी मार्केट में Prius Hybrid की बिक्री 25 फीसदी के करीब घटी है। इसके अलावा दूसरे मॉडलों को भी नुकसान पहुंचा है।

तीसरे पायदान पर अमेरिकी कम्पनी जनरल मोटर्स बनी हुई है। 2016 के पहले छह महिनों में जनरल मोटर्स ने ग्लोबल मार्केट्स में कुल मिलाकर 47.60 लाख गाडिय़ां बेचीं।

टोयोटा ने पहले कहा था कि येन के मजबूत होने से उसे ग्लोबल मार्केट्स में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा चीन व दूसरे उभरते देशों में भी कम्पनी को वॉल्यूम का नुकसान हो रहा है।

वर्ष 2008 में जनरल मोटर्स की करीब दस साल तक चली बादशाहत को खत्म करते हुये टोयोटा ने दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमेकर बनने में कामयाबी हासिल की थी लेकिन 2011 में सुनामी के कारण जापान में प्लांट्स को बड़ा नुकसान होने के कारण टोयोटा को बेदखलकर जनरल मोटर्स ने फिर पहले पायदान पर कब्जा कर लिया था।

लेकिन 2012 में टोयोटा ने वापसी कर जनरल मोटर्स को पीछे छोड़ फिर पहले स्थान पर कब्जा कर लिया था।

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