चीन की Tyre कम्पनियों ने क्यों किया भारत से किनारा?

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China TyreTyre इंडस्ट्री की शिकायत पर भारत सरकार ने 28 मार्च को मेड इन चायना और दूसरे देशों से सस्ते टायरों की डम्पिंग पर चर्चा करने के लिये बैठक बुलाई है। खबर है कि ATMA यानि ऑटोमोटिव टायर मैन्यूफैक्चरर्स एसोसियेशन की शिकायत पर डायरेक्टर जनरल एंटी डम्पिंग एंड एलाइड ड्यूटीज़ यानि डीजीएडी द्वारा कराई गई जांच में चीन की कम्पनियों के खिलाफ कम कीमत पर भारत में डम्पिंग करने की शिकायत सही पाई गई है। यानि भारत सरकार सस्ते इम्पोर्टेड टायरों से घरेलू टायर इंडस्ट्री को पहुंच रहे नुकसान को देखते हुये Anti Dumping Duty लगा सकती है।

लेकिन हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच महिने में चीन से टायरों का इम्पोर्ट बहुत तेजी से गिरा है और चीन की Tyre कम्पनियां फिलहाल भारत के बजाय ज्यादा मुनाफे वाले अमेरिका मार्केट पर फोकस बढ़ा रही हैं।

anti dumpingTyre इंडस्ट्री कोई तीन साल से देश में सस्ते इम्पोर्टेड टायरों की डम्पिंग बढऩे और खासकर ट्रक-बस रेडियल Tyre के रिप्लेसमेंट मार्केट में हो रहे नुकसान को लेकर सरकार से कदम उठाने की मांग करती रही है।

लेकिन भारत सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स चीन से हो रही डम्पिंग में भारी कमी के बाद हरकत में आई है और एंटी डम्पिंग ड्यूटी लगाने का फैसला करने के लिये 28 मार्च को मीटिंग बुलाई गई है।

देश की टायर इंडस्ट्री का आरोप है कि टीबीआर यानि ट्रक-बस रेडियल टायर के रिप्लेसमेंट मार्केट में इम्पोर्टेड खासकर मेड इन चायना टायरों ने तगड़ी सेंध लगाई है। ये Tyre जिस प्राइस पर भारत में डम्प किये जा रहे हैं उससे ज्यादा तो मेड इन इंडिया टायरों की रॉ मैटीरियल कॉस्ट ही है।

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इंडस्ट्री के जानकार कहते हैं कि Demonetization की सबसे तगड़ी चोट मेड इन चायना टायरों पर पड़ी है।

लेकिन फिलिप कैपिटल की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि डीमोनीटाइजेशन का दौर खत्म होने के बावजूद मेड इन चायना टायरों के इम्पोर्ट में तेज गिरावट आई है और इसका कारण भारत के बाजार के हालात नहीं बल्कि अमेरिका में मिल रहे मुनाफे के मौके हैंं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की टायर कम्पनियों ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा एंटी डम्पिंग ड्यूटी लगाने के प्रपोजल को टाल देने के बाद भारत से हटाकर अमेरिकी बाजार पर फोकस बढ़ा दिया है।

इसके अलावा चीन की Tyre कम्पनियों ने भारत के इम्पोर्टरों के लिये टीबीआर की प्राइस भी बढ़ा दी है जो 10-15 प्रतिशत के बीच है। पहले सबसे कम कीमत के टीबीआर की जोड़ी 24 हजार रुपये की थी उसे अब चीन की कम्पनियां भारत के इम्पोर्टरों को 26 हजार रुपये में दे रही हैं। इससे मेड इन इंडिया और मेड इन चायना ट्रक-बस रेडियल Tyre (टीबीआर) के बीच प्राइस गैप बहुत कम रह गया है।

ज्यादा प्रॉफिट वाले अमेरिकी मार्केट पर फोकस बढ़ाने के लिये चीन की कम्पनियों ने भारत के इम्पोर्टरों से ऑर्डर लेना बहुत कम कर दिया है।

फिलिप कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में चीन से 455 कंटेनर Tyre इम्पोर्ट हुये थे लेकिन फरवरी में सिर्फ 155 कंटेनर ही भारत आये। चूंकि फिलहाल चीन की Tyre कम्पनियों का फोकस अमेरिका पर है ऐसे में बहुत जल्दी इसमें बदलाव या बढ़ोतरी की उम्मीद कम है। 

साथ ही डीमोनीटाइजेशन के दौर में भारत सरकार ने कर चोरी को पकडऩे के लिये Tyre इम्पोर्टरों पर बड़े पैमाने पर छापे मारे थे इससे भी इम्पोर्टर फिलहाल नये कन्साइनमेंट का ऑर्डर देने से बच रहे हैं।

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