Update: 2Wheelers not giving positive Feelers

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पिछले साल दिवाली वाले अक्टूबर के महिने में बाइक्स की सेल 8.73 फीसदी घटी थी। इसके बाद से पूरे 12 महिने गुजर गये लेकिन यह सैगमेेंट निगेटिव ज़ोन से बाहर नहीं निकल पाया। देश के टू-व्हीलर सैगमेंट में बाइक्स का हिस्सा करीब 75 फीसदी है यानि सैगमेंट की ग्रोथ बाइक्स पर निर्भर है। हालांकि कुछ महिने पहले तक बाइक्स के घाटे की भरपाई स्कूटर हो रही थी लेकिन अब स्कूटर की ग्रोथ रेट भी बहुत तेजी से घट रही है। अप्रेल-सितम्बर के छह महिनों में मास सैगमेंट के 9 टू-व्हीलर ब्रांड्स में सिर्फ हीरो और महिन्द्रा ही ऐसे हैं जिनकी सेल्स घटी है लेकिन बाकी 7 कम्पनियों में से रॉयल एनफील्ड को छोड़ दें तो किसी की भी परफॉर्मेन्स में भरोसा नजर नहीं आता।

2wइंडस्ट्री: कारोबारी साल 2015-16 की अप्रेल-सितम्बर की छमाही में 8118668 (81.18 लाख) टू-व्हीलर बिके जिनमें स्कूटर, बाइक और मॉपेड शामिल हैं। जबकि पिछले कारोबारी साल के शुरूआती छह महिनों में 8148250 (81.48 लाख) टू-व्हीलर बिके थे। कुल सेल्स में सिर्फ 30 हजार यूनिट्स यानि 0.36 फीसदी का नुकसान हुआ है। लेकिन जब इस फिगर का स्कूटर और बाइक में ब्रेकअप करते हैैं तो असली कहानी सामने आती है।
शुरूआती छह महिनों बाइक्स की सेल्स 4.06 फीसदी घटकर 5591328 (55.91 लाख) के मुकाबले 5364391 (53.64 लाख) यूनिट्स रह गई। यानि 2.27 लाख यूनिट्स का नुकसान हुआ है।
बाइक सैगमेंट में 2.27 लाख यूनिट्स का नुकसान तब हुआ है जब जनवरी से अब तक हीरो, होन्डा, यामहा और बजाज के दर्जनभर नये मॉडल बाजार में आ चुके हैं।
Two Wheeler Companies H1 of 2016यदि स्कूटर की बात करें तो अप्रेल-सितम्बर के दौरान कुल 2401303 (24.01 लाख) यूनिट्स की सेल हुई जो पिछले साल अप्रेल-सितम्बर की छमाही में हुई 2184540 (21.84 लाख) यूनिट्स की सेल्स के मुकाबले 9.92 फीसदी ज्यादा है। लेकिन 31 मार्च को समाप्त हुये पिछले कारोबारी साल में स्कूटर मॉडलों की सेल्स में 25.06 फीसदी की ग्रोथ हुई थी। लेकिन इसके बाद के छह महिनों में स्कूटर सैगमेंट की ग्रोथ रेट घटकर 9.92 फीसदी रह गई। मई में तो यह घटकर सिर्फ 2.61 फीसदी रह गई थी और फेस्टिव सीजन के लिये स्टॉक बनाने के बावजूद सितम्बर में स्कूटर की बिक्री में सिर्फ 6.54 फीसदी की बढ़ोतरी हो पाई।
स्कूटर सैगमेंट में यामहा फैसिनो के अलावा रिफ्रेश को छोडक़र अप्रेल से सितम्बर के बीच कोई नया मॉडल नहीं आया। हालांकि हीरो मोटोकोर्प ने कुछ दिनों पहले माइस्त्रो एज़ और डुइट को लॉन्च किया है।
कारण : टू-व्हीलर सैगमेंट में कमजोरी का यह दौर पिछले वर्ष मानसून की कम बारिश और लेटलतीफी के कारण शुरू हुआ था। मनरेगा जैसी योजना में सरकारी फंडिंग घटने और इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के शुरू नहीं हो पाने के कारण नये जॉब्स पैदा नहीं हो पाये। इसके साथ ही खेती का उत्पादन घटा है और बेमौसम बारिश और ओलों से भी नुकसान हुआ है। साथ ही लागत भी बढ़ी है। इन सबके मिले जुले असर के कारण रूरल इकोनॉमी पर दबाव लगातार बढऩे का नुकसान सबसे पहले बाइक सैगमेंट में नजर आया। लेकिन हाल के सालों में स्कूटर सैगमेंट के ग्रोथ इंजन के रूप में उभरे छोटे शहरों, जिनकी इकोनॉमी खेती पर निर्भर है की इकोनॉमी भी कमजोर पड़ रही है जिसका असर स्कूटर सैगमेंट में भी नजर आ रहा है।
आगे के हालात: मौजूदा फसल को मानसून की कमी के कारण नुकसान हुआ है। साथ ही कम बारिश के चलते पंजाब जैसे कुछ राज्यों में कीटों के हमले से भी फसल की बर्बादी हुई है। ऐसे में यदि हालात सुधरने की कोई उम्मीद बचती है तो वो अभी बोई जा रही फसल के उत्पादन पर निर्भर है और इसके लिये अप्रेल तक इंतजार करना पड़ेगा। यानि पूरे छह महिने तक टू-व्हीलर मार्केट में सुधार की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही।
कम्पनी परफॉर्मेन्स: देश के टू-व्हीलर मार्केट में करीब 40 फीसदी योगदान देने वाली हीरो मोटोकोर्प ने अप्रेल से सितम्बर की छमाही में 3115854 स्कूटर-बाइक बेची हैं जो पिछले कारोबारी साल की पहली छमाही की सेल्स के मुकाबले 5.92 फीसदी कम है। वहीं 12.92 फीसदी का सबसे ज्यादा नुकसान महिन्द्रा टू-व्हीलर को उठाना पड़ा है हालांकि कम्पनी का बेस बहुत छोटा है। लेकिन होन्डा, टीवीएस और बजाज बड़ी मुश्किल अपनी सेल्स को घटने से बचा पाये हैं और इनके आंकड़ों में नहीं के बराबर सुधार है। होन्डा को बाइक सैगमेंट में 18 फीसदी का भारी नुकसान हुआ है हालांकि एक्टिवा के चलते स्कूटर मॉडलो थोड़ी भरपाई करने में कामयाब रही है। मास सैगमेंट में रॉयल एनफील्ड अकेली कम्पनी है जिसकी सेल्स में 50 फीसदी का भारी उछाल है। यामहा को नये स्कूटर फैसिनो को मिल रहे अच्छे रेस्पॉन्स का फायदा मिल रहा है और इसके चलते शुरूआती छमाही में कम्पनी की सेल्स 6.93 फीसदी बढ़ी है।

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