Prius Trademark मामले में टोयोटा को मिली बड़ी जीत

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Prius7 साल तक अदालत में चले Prius Trademark के उल्लंघन के मामले में टोयोटा को जीत मिली है। प्रायस टोयोटा का दुनियाभर में बेस्ट सेलर हाइब्रिड मॉडल है और करीब 6 साल से भारत में मौजूद है। पिछले ऑटो एक्स्पो में टोयोटा किर्लोस्कर ने प्रायस के नई पीढ़ी के अवतार को भारत में लॉन्च किया था।

टोयोटा जिदोशा काबुशिकी कैशा और दीपक मंगल व अन्य के बीच Prius Trademark विवाद की शुरूआत वर्ष 2009 में हुई थी जब टोयोटा ने विरोधी पक्ष पर Prius Trademark के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया था।
टोयोटा का आरोप है कि प्रायस ऑटो इंडस्ट्रीज और प्रायस ऑटो एक्सैसरीज़ कम्पनियां टोयोटा, इनोवा और क्वॉॅलिस ब्रांड नाम से स्पेयर पार्ट्स भी बनाती हैं।

यह मामला इतना अहम इसलिये हो गया क्योंकि विरोधी पक्ष ने Prius Trademark को रजिस्टर करा रखा था। जबकि टोयोटा का प्रायस ब्रांड भारत में रजिस्टर्ड नहीं था।

भले ही टोयोटा ने Prius Trademark को भारत में रजिस्टर नहीं करा रखा था फिर भी टोयोटा का मानना था कि विरोधी कम्पनी उसके प्रॉडक्ट की साख का अनुचित तरीके से फायदा उठाकर अपना बिजनस बढ़ा रही है। टोयोटा ने आरोप लगाया कि प्रायस उसकी पहली हाइब्रिड कार है।

चूंकि कॉमन विज़डम के लिहाज से Prius Trademark विरोधी पक्ष के नाम रजिस्टर होने के कारण टोयोटा का पक्ष बहुत कमजोर था लेकिन इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सात साल तक लम्बी बहस चली और ट्रेडमार्क कानूनों को गहराई से समझा गया।

जस्टिस मनमोहन सिंह ने आखिरी फैसला सुनाते हुये कहा कि टोयोटा दुनिया की बड़ी ऑटो कम्पनी है और इसी के चलते टोयोटा, इनोवा व क्वॉलिस आदि की ब्रांड साख है। कम्पनी ने इन ब्रांड्स को भारत में रजिस्टर भी करा रखा है। यदि विरोधी पक्ष इन ब्रांड्स का अपने प्रॉडक्ट्स के पैकेट पर इस्तेमाल करता है तो इससे कंज्यूमर को लगता है कि यह प्रॉडक्ट टोयोटा का है। ऐसे में विरोधी पक्ष टोयोटा ट्रेडमार्क का उल्लंघन कर रहा है।

लेकिन Prius Trademark मामले में विरोधी पक्ष का तर्क था कि ना तो प्रायस रजिस्टर्ड है और ना ही इसकी कोई ब्रांड साख है। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुये कहा कि दुनिया की पहली हाइब्रिड कार के रूप में प्रायस की भारत में भी मजबूत पहचान है और इसे नकारा नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ना केवल टोयोटा ने अपना पक्ष रखने के लिये मीडिया में टोयोटा प्रायस की छपी हुई रिपोर्ट्स का भी हवाला दिया। ऐेसे में कोर्ट का मानना था कि Prius Trademark भारत में बहुत जाना पहचाना है ऐसे में मजबूत कानूनी संरक्षण दिया जाना चाहिये।

कोर्ट ने यह भी कहा कि विरोधी पक्ष तर्क के आधार पर यह नहीं समझा पाया कि उसने अपने ऑटो पार्ट्स बिजनस के लिये प्रायस ट्रेडमार्क क्यों चुना। चूंकि विरोधी कम्पनी अपने पक्ष को अदालत को समझा पाने में नाकामयाब रही ऐसे में कोर्ट ने कहा कि साफ है मकसद टोयोटा प्रायस की साख का फायदा उठाने का था। अदालत के अनुसार टोयोटा ने Prius Trademark का सबसे पहले 1995 में इस्तेमाल किया जबकि विरोधी पक्ष ने 2002 में। हालांकि टोयोटा ने प्रायस को भारत में 2010 में लॉन्च किया था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने विरोधी पक्ष को दो महिने में Prius Trademark का इस्तेमाल बंद करने का आदेश दिया। कोर्ट में दाखिल बिजनस स्टेटमेंट के अनुसार कम्पनी Prius Trademark का इस्तेमाल कर 20 करोड़ रुपये का बिजनस कर रही थी। इसे देखते हुये कोर्ट ने दस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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