Toyota और Maruti मिलायेंगी भारत में हाथ?

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toyota-suzukiटोकियो में चल रहे मोटर शो से खबर निकली है कि टोयोटा ने अपने सहयोगी ब्रांड देहात्सु को भारत में लॉन्च करने का प्लान छोड़ दिया है। 2015 में टोयोटा ने देहात्सु का मैनेजमेंट कंट्रोल अपने हाथ में लिया था और इसका मकसद भारत जैसे दुनिया के पांचवे सबसे बड़े कार मार्केट में सेल्स वॉल्यूम को बढ़ाना था। देहात्सु की पहचान सुजुकी की ही तरह वैल्यू फोर मनी और ईज़ी टू मेन्टेन गाडिय़ां बनाने वाली कम्पनी की है।

अक्टूबर 2016 में टोयोटा मोटर कोर्प ने जापान की ही सुजुकी के साथ एक स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की थी। चूंकि सुजुकी की सेल्स में 55 परसेंट योगदान मारुति का है ऐसे में भारत को नजरअंदाज कर टोयोटा और सुजुकी की पार्टनरशिप की कोई अहमियत नहीं है। यानी सुजुकी के जरिये टोयोटा की नजर भारत के मास कार मार्केट पर ही थी।

लेकिन टोकियो मोटर शो में टोयोटा के एशिया, मिडल ईस्ट और नॉर्द अफ्रीका रीजन के सीईओ हिरोयुकी फुकुई ने साफ कहा देहात्सु अपना पूरा ध्यान मलेशिया, इंडोनेशिया और जापान के मार्केट पर लगाना चाहती है। जहां तक भारत की बात है कि यह काम सुजुकी कर सकती है। सुजुकी के साथ कम्पनी की बातचीत चल ही रही है।

यानी तय है कि टोयोटा ने देहात्सु के इंडिया प्लान को ठंडे बस्ते में डाल दिया है और कम्पनी सुजुकी या कहें तो मारुति के जरिये भारत के कार मार्केट में अपना दखल बढ़ाना चाहती है।

हालांकि टोयोटा और सुजुकी के बीच भारत के बाजार की अहमियत को लेकर सहमति कोई नई बात नहीं है। मार्च 2017 में टोयोटा के चेअरमैन आकियो तोयोदा और सुजुकी ओसामु सुजुकी ने एक साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत की थी।

दुनिया की दूसरी बड़ी ऑटोमेकर टोयोटा भारत में अपने बिजनस को लेकर बहुत बेचैन है। कम्पनी के पोर्टफोलियो में इनोवा और फॉच्र्यूनर जैसे दो बेस्ट सेलर मॉडल होने के बावजूद 20 साल में टोयोटा बमुश्किल 5 परसेंट मार्केट शेयर तक पहुंच पाई है। अपने सेल्स वॉल्यूम को बढ़ाने के लिये ही टोयोटा ने ईटिओस और लीवा को लॉन्च किया था लेकिन ये दोनों ही मॉडल ब्रांड और सेल्स वॉल्यूम के लिहाज से कामयाब नहीं हो पाये हैं।

कॉस्ट एफीशियेंसी और वैल्यू पैकेजिंग में अपने तंग हाथ को देखते हुये ही टोयोटा ने पहले देहात्सु पर और फिर सुजुकी पर दांव लगाया है।

फुकुई कहते हैं कि …सुजुकी इज़ मास्टर ऑफ स्मॉल कार्स एंड वी आर स्टूडेंट…।

माना जा रहा है कि टोयोटा अगले ऑटो एक्स्पो में वायोस सेडान को डिस्प्ले करेगी। होन्डा सिटी के मुकाबले में आने वाला यह मॉडल 2018 के फेस्टिव सीजन में लॉन्च होने की उम्मीद है। इसके अलावा कम्पनी 2020 में यारिस के हैचबैक अवतार को भी लॉन्च करने के प्लान पर काम कर रही है।

अब सवाल ये है कि भारत के आधे से ज्यादा कार मार्केट पर कब्जा रखने वाली मारुति सुजुकी को टोयोटा से हाथ मिलाने की क्या जरूरत है। तो जबाव ये है कि फ्यूचर टेक्नोलॉजी जैसे इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन फ्यूल सैल के साथ ही ड्राइवरलैस कार आदि की टेक्नोलॉजी के मामले में सजुकी का हाथ बहुत तंग है। फिर इन टेक्नोलॉजी की आरएंडडी लागत इतनी अधिक है कि सुजुकी जैसी छोटी सी कम्पनी के लिये यह बहुत महंगा सौदा है। सजुकी एक साल में दुनियाभर में करीब 28 लाख कार बेचती है जिनमें से आधी से ज्यादा भारत में बिकती हैं।

लेकिन टोयोटा ने पिछले दो दशकों में इस तरह की फ्यूचर टेक्नोलॉजी में बड़ा निवेश किया है और टोयोटा की ही प्रायस दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली प्लग-इन-हाइब्रिड कार है। कम्पनी ने मिराई के रूप में हाइड्रोजन फ्यूल सैल टेक्नोलॉजी वाली कार को भी लॉन्च किया है।

मारुति कहें तो सुजुकी को लगता है कि टोयोटा के साथ हाथ मिलाने से उसे इन महंगी टेक्नोलॉजी में निवेश नहीं करना पड़ेगा और उसकी जरूरत पूरी हो जायेगी।

ऐसे में टोयोटा और सुजुकी की पार्टनरशिप को विन-विन माना जा रहा है और भारत इस पार्टनरशिप के लिये हब सेंटर होगा।

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