भारत बना चुनौती Toyota करेगी Daihatsu की सवारी

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Toyota Motor Company ने कहा है कि वह उभरते हुये बाजारों में सेल्स बढ़ाने के लिये Daihatsu को पूरी मिल्कियत वाली कम्पनी बनायेगी। अफोर्डेबल कॉम्पेक्ट कार बनाने वाली जापानी कम्पनी Daihatsu में अभी Toyota Motor की करीब 51 फीसदी शेयरहोल्डिंग है। पिछले सप्ताह जापान के अखबार निक्केई में खबर छपी थी कि Toyota Motor Company और Suzuki Motor Corp के बीच टाईअप को लेकर बातचीत चल रही है। हालांकि दोनों ही कम्पनियों ने इस खबर को खारिज कर दिया था।

इन दोनों खबरों में एक समानता है। वो यह कि Toyota Motor Company ग्लोबल मार्केट में अपनी लीडरशिप को बचाये रखने के लिये लो कॉस्ट अफोर्डेबल मॉडलों पर दांव बढ़ाना चाहती है।

Toyota Vs.Volkswagen: ग्लोबल मार्केट में Toyota लगातार 4 साल से सबसे बड़ी कम्पनी है लेकिन Volkswagen से इसे तगड़ी चुनौती मिल रही है। यदि Emission Scandal सामने नहीं आता तो 2015 में Toyota Motor Company को पीछे छोड़ Volkswagen पहले पायदान पर कब्जा जमा चुकी होती। पिछले वर्ष के शुरूआती छह महिनों में Volkswagen Group की सेल्स Toyota  के मुकाबले ज्यादा रही थी। 

भारत लास्ट फ्रंटियर: Toyota को भारत आये करीब 20 साल होने को हैं लेकिन मार्केट शेयर 5 परसेंट के करीब ही है जबकि Hyundai इन्हीं करीब बीस साल में 18-20 फीसदी के मार्केट शेयर तक पहुंच चुकी है और वहीं होन्डा प्रॉडक्ट पोर्टफोलियो, सेल्स वॉल्यूम और मार्केट शेयर के लिहाज से टोयोटा से बहुत आगे है।

दाइहेत्सु या सुजुकी: Daihatsu जापान के मिनी कार मार्केट में जहां Suzuki का मुकाबला कर रही है वहीं इस ब्रांड के दम पर Toyota भारत सहित आसियान के बड़े देशों जैसे थाईलैंड और इंडोनेशिया में भी अपनी पकड़ बेहतर कर सकती है।

Toyota और Daihatsu की ओर से जो साझा बयान आया है उसमें भी स्मॉल कार सैगमेंट पर फोकस की बात जाहिर होती है। बयान में कहा गया है कि इस पहल का मकसद स्मॉल कार सैगमेंट के लिये साझा रणनीति तैयार कर अच्छे मॉडल तैयार करना है।

चूंकि Daihatsu की Suzuki की तरह कम लागत वाले कॉम्पेक्ट मॉडल डवलप करने में महारथ है ऐसे में यह Toyota की स्ट्रेटेजी में बड़ी मददगार साबित हो सकती है।

स्मॉल कार बिग चैलेंज: Toyota को स्मॉल कार सैगमेंट में अपनी बहुत कमजोर पकड़ का अहसास है इसीलिये कम्पनी ने भारत के बाजार में अपना वॉल्यूम बढ़ाने के लिये ईटिओस रेंज के तहत एंट्री सेडान Etios और कॉम्पेक्ट हैचबैक Liva को लॉन्च किया था। लेकिन प्रॉडक्ट पैकेजिंग, क्वॉलिटी और प्राइसिंग के मुकाबले में ये दोनों मॉडल Maruti, Hyundai और Honda के आगे जम नहीं पाये।

Toyota & Suzuki Tie-Up: जहां तक बात है Suzuki के साथ टाईअप की तो यदि यह हो जाता तो इसे भी दोनों कम्पनियों के लिये विन-विन समझौता कह सकते थे। Suzuki ग्लोबल मार्केट मेंं करीब 28 लाख गाडिय़ां बेचती है और इसमें ज्यादातर योगदान भारत और जापान की सेल्स का है। जिस तरह Toyota अफोर्डेबल मिनी कार सैगमेंट में पांव जमाने के लिये जूझ रही है उसी तरह Suzuki स्मॉल कार कम्पनी के रूप में अपनी पहचान को बदलना चाहती है। सीमित पोर्टफोलियो के चलते सुजुकी को 3 साल से दुनिया के सबसे बड़े मार्केट अमेरिका में अपना बिजनस बंद करना पड़ा है। इसके अलावा Suzuki का फ्यूचर टेक्नोलॉजी के मामले में भी हाथ तंग है। Suzuki जहां साल-दर-साल ग्लोबल मार्केट में एक करोड़ गाडिय़ां बेच रही है साथ ही इसके पास Hydrogen Fuel Cell Mirai और Plug-in-Hybrid Prius सहित फ्यूचर टेक्नोलॉजी वाले मॉडलों का पूरा पोर्टफोलियो है। Toyota ने ड्राइवरलैस कार टेक्नोलॉजी पर भी बड़ा निवेश किया है। ऐसे में यदि Toyota से बात बन जाती तो Suzuki को जहां नई टेक्नोलॉजी मिल जाती वहीं Toyota की पहुंच Suzuki की लो-कॉस्ट प्रॉडक्ट डवलपमेंट महारथ तक हो जाती।

Suzuki & Volkswagen Tie-Up: भारत जैसे बाजार में तगड़े सेल्स और वेंडर नेटवर्क होने के चलते ही 2009 में Volkswagen ने भी Suzuki में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी। माना जा रहा है कि इसके पीछे Volkswagen की कोशिश भारत के बाजार में पांव जमाने और हो सका तो Suzuki का अधिग्रहण करने की थी। दूसरी ओर Suzuki की नजर Volkswagen की डीजल इंजन टेक्नोलॉजी पर थी। लेकिन बाद में मैनेजमेंट कंट्रोल और टेक्नोलॉजी साझा करने को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। बात इतनी बिगड़ी कि इंटरनेशनल कोर्ट तक पहुंच गई। कुछ महिने पहले आये फैसले में कोर्ट ने Volkswagen को Suzuki में अपने 19.9 फीसदी शेयर बेचने का आदेश दिया है।

Daihatsu in India : कुछ महिने पहले Daihatsu की ओर से यह बयान आया था कि वह भारत को लम्बे समय तक नजरअंदाज नहीं कर सकती। हालांकि Daihatsu ने यह नहीं कहा था कि वह खुद अपने दम पर भारत आयेगी या Toyota की सहयोगी बनकर।

माना जा सकता है कि अब चूंकि बात साफ हो चुकी है कि जो भी फैसला लेना है Toyota लेगी ऐसे में दो संभावनायें हैं। या तो Daihatsu सिर्फ Toyota के लिये प्रॉडक्ट डवलप करे और Toyota उन्हें भारत व दूसरे मार्केट्स में अपने यानि Toyota ब्रांड से बेचे। दूसरी संभावना यह है कि Nissan Datsun की तरह Toyota भी भारत में मल्टी ब्रांड स्ट्रेटेजी के साथ आगे बढ़े।

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