Emission Scandal: 2 लाख करोड़ की चपत लगी Volkswagen को

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Defeat Device Cheating Software

Emission Scandal का भूत दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमेकर Volkswagen ग्रुप का पीछा नहीं छोड़ रहा है। अमेरिका में डीजल इंजनों को सुधारने पर कम्पनी को 3 अरब डॉलर और खर्च करने पड़ेंगे इस तरह सितम्बर 2015 में यह स्कैंडल सामने आने के बाद से कम्पनी पर कुल बोझ 30 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

डीजल इंजन के एमिशन को कमतर बताने के लिये चीटिंग सॉफ्टवेयर Defeat Device का इस्तेमाल करने से कम्पनी की साख को गहरा नुकसान हुआ है और अब इसकी भरपाई करने के लिये Volkswagen ग्रुप अपने आपको मास मार्केट इलेक्ट्रिक कार मैन्यूफैक्चरर के रूप में स्थापित करने पर पूरा जोर लगा रही है।

अभी दो दिन पहले ही जर्मनी के म्यूनिख में फोक्सवैगन ग्रुप की कम्पनी Porsche के आरएंडडी चीफ वोल्फगैंग हैत्ज़ को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला सामने आने के बाद हैत्ज़ ने कम्पनी से इस्तीफा दे दिया था। जर्मन पुलिस फोक्सवैगन Emission Scandal और चीटिंग सॉफ्टवेयर के मामले में उनकी भूमिका की जांच करना चाहती है।

3 अरब डॉलर के ताजा मामले से पहले अपने 80 साल के इतिहास में सबसे बड़े संकट से गुजर रही Volkswagen  एमिशन स्कैंडल से प्रभावित गाडिय़ों की रिपेयर, जुर्माने और कस्टमर को मुआवजा देने के लिये 26.7 अरब डॉलर का बजट अलग रख चुकी है।

पिछले साल फोक्सवैगन ने अमेरिकी अधिकारियों को कहा था कि वह Emission Scandal के दायरे में आ रहीं 2 ली.  डीजल इंजन वाली 4.75 लाख गाडिय़ों की रिपेयर या उन्हें बाईबैक करने पर 15.3 अरब डॉलर खर्च करेगी।

Volkswagen के प्रवक्ता के अनुसार यूरोप में कम्पनी को 85 लाख प्रभावित गाडिय़ों में सिर्फ सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करना पड़ेगा जबकि 37 लाख गाडिय़ां में एक मामूली कम्पोनेंट लगाने से ही वे एमिशन नॉर्म्स पर खरी उतर सकती हैं। ऐसे में यूरोप में Emission Scandal की चपेट में आ रही गाडिय़ों का मेंटीनेन्स कहीं आसान है।

Volkswagen पर यूरोप में प्रभावित कस्टमर को भी अमेरिका की तर्ज पर मुआवजा देने का दबाव बढ़ रहा है यहां तक कि अभी 24 सितम्बर को हुये जर्मन चुनावों में राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को हवा दी और अमेरिकी की ही तरह Volkswagen एमिशन स्कैंडल की गहराई से जांच करने की जरूरत की बात कही।

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