अब Road Safety के लिये कार में जरूरी होंगे Rear View Camera

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Rear View Parking Sensor Rear view parking camera

रिवर्स हो रही गाडिय़ों से छोटे बच्चों और पैदल चलने वालों को बढ़ रहे खतरे को देखते हुये भारत सरकार Road Safety के लिये सभी पैसेंजर वेहीकल्स में Rear View Sensor या Rear View Camera को जल्दी ही जरूरी फीचर बनाने जा रही है।
सडक़ परिवहन और हाईवे मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी अभय दामले के अनुसार हालांकि ज्यादातर कारों में रिअर व्यू मिरर होते हैं जिनसे कार के पीछे मौजूद गाड़ी को देखा जा सकता है लेकिन यदि कोई बच्चा या छोटी चीज हो तो इस मिरर में नजर नहीं आती। यानि कार के पीछे एक अच्छा-खासा ब्लाइंड स्पॉट होता है।
इंटरनेशनल रोड फैडरेशन द्वारा आयोजित वर्ल्ड रोड्स मीट के मौके पर बोलते हुये दामले ने कहा कि Road Safety के लिये नई गाडिय़ों में Rear View Sensor को जरूरी फीचर बनाने का फैसला जल्दी ही हो जायेगा। देश में हर साल कोई 50 हजार रोड एक्सीडेंट ओवरस्पीडिंग के कारण होते हैं और करीब डेढ़ लाख लोगों की मौत होती है ऐसे में सडक़ परिवहन मंत्रालय सीट बेल्ट बजट की तरह Speed Warning को भी जरूरी फीचर बनाने पर विचार कर रही है।
दामले के अनुसार 80 की स्पीड पर बीप साउंड वॉर्निंग आने लगेगी और 90 की स्पीड के बाद यह लगातार तेज वॉल्यूम में आने लगेगी।
सबसे ज्यादा रोड एक्सीडेंट्स टू-व्हीलर के कारण होने को देखते हुये सरकार ने अप्रेल 2019 से टू-व्हीलर में एबीएस (एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम) या सीबीएस (कॉम्बी ब्रेकिंग सिस्टम) को जरूरी कर दिया है।
Rear View Sensor और Speed Warning के अलावा भारत सरकार जल्दी ही एअरबैग को भी जरूरी फीचर बना देगी।
देश में Road Safety के बहुत ख़राब हालातों को देखते हुये अक्टूबर 2018 से देश में ऑटोमेटेड इन्सपेक्शन और फिटनस सर्टिफिकेशन का काम शुरू हो जायेगा उसके बाद अनफिट गाडिय़ों को पहचानना और सडक़ से हटाना आसान हो जायेगा। सरकार की योजना अक्टूबर 2018 तक ड्राइविंग लायसेंस टेस्ट भी ऑटोमेटेड करने की है।
रोड एक्सीडेंट के समय मदद करने वालों को पुलिस नहीं कर सकेगी परेशान: नया मोटर वेहीकल (अमेंडमेंट) बिल अगले सैशन में संसद में पेश कर दिया जायेगा। दामले के अनुसार इसमें रोड एक्सीडेंट के समय मदद करने वाले गुड सैमेरितन्स (Good Samaritans) को कानूनी संरक्षण देने के प्रावधान किये गये हैं। इसके अनुसार गुड सैमेरितन्स के एफीडेविट यानि हलफनामे की कानूनी अहमियत होगी। यदि जरूरी हो तो बयान एक ही बार में लिया जायेगा और बार-बार नहीं बुलाया जा सकेगा। प्रावधान किया गया है कि आगे जरूरत पडऩे पर ज्यूडिशियल या लॉ ऑफिसर खुद गुड सैमेरितन के घर जाकर उसका बयान दर्ज करेंगे।

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