Tata Motors ने क्राइसिस में भी तख्तापलट कर दिया!

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अंडरडॉग या कहें तो देसी दिग्गज Tata Motor ने कोरोना क्राइसिस में भी बाउंसर बॉल पर चौका लगा चौंका दिया है। 2020 की इंडस्ट्री सेल्स रिपोर्ट (टेबल देखें) वैसे तो किसी ट्रेजिडी स्टोरी से कम नहीं है क्योंकि टाटा, एमजी और किआ मोटर्स को छोड़ दें तो कोई भी कम्पनी अपने सेल्स वॉल्यूम को बचा नहीं पाई यानी सेल्स गिरी। किआ और एमजी तो नई कम्पनियां हैं इसलिए लो बेस पर ग्रोथ दिख रही है। लेकिन Tata Motor ने सेल्स वॉल्यूम बढ़ाने में कामयाब रहने के साथ ही मार्केट शेयर और रैंकिंग दोनों मोर्चों पर कोरोना क्राइसिस को अपॉर्चुनिटी में बदल सक्सैस स्टोरी लिखी है।

कैलेंडर वर्ष 2020 में देश की सबसे बड़े ऑटोमोबाइल पोर्टफोलियो वाली कम्पनी Tata Motor ने 170169 गाड़ियां बेचीं जो कैलेंडर वर्ष 2019 में हुई पैसेंजर वेहीकल की सेल्स के मुकाबले 11 पर्सेंट अधिक है।

2019 में Tata Motor करीब 4.7 परसेंट मार्केट शेयर के साथ देश की चौथी सबसे बड़ी पैसेंजर वेहीकल कम्पनी थी। टाटा मोटर्स ने 2019 में 152943 गाड़ियां बेची थी जो कि 2018 में हुई सेल्स के मुकाबले 20.7 परसेंट कम रही थी।

लेकिन 2020 में कोरोना क्राइसिस के कारण एक महिने से भी ज्यादा डीलरशिप बंद रहने के बावजूद टाटा मोटर्स ना केवल अपने सेल्स वॉल्यूम को बढ़ाने में कामयाब रही बल्कि यह महिन्द्रा एंड महिन्द्रा को बेदखल कर मारुति सुजुकी और ह्यूंदे के बाद तीसरे पायदान पर काबिज हो गई।

Tata Motor के पैसेंजर वेहीकल बिजनस यूनिट के प्रेसिडेंट शैलेश चंद्रा के अनुसार कम्पनी का फिर से तीसरे पायदान पर पहुंचना कोई ऐसे ही नहीं हो गया है बल्कि कम्पनी आठ साल में सबसे ज्यादा बिक्री पिछले कुछ महिनों में की है। जिससे हमें मार्केट शेयर 3 प्रतिशत का फायदा हुआ है।

2020 की क्लोजिंग 170179 यूनिट्स के साथ करने का सीधा अर्थ है कि Tata Motor ने हर महिने 14 हजार गाड़ियां बेची।

टियागो, नेक्सॉन और एल्ट्रोज़ जैसे मॉडलों के दम पर टाटा मोटर्स कॉम्पेक्ट मिनी, कॉम्पेक्ट हैचबैक और एसयूवी वाले वॉल्यूम सैगमेंट्स में कम्पीटिशन के बावजूद न केवल मजबूती से खड़ी है बल्कि अपने कस्टमर बेस का विस्तार भी कर रही है।

कम्पनी को उम्मीद है कि उसकी महिने की सेल्स औसत 22 हजार यूनिट्स रहेगी और मारुति व ह्यूंदे के बाद तीसरे पायदान पर जम चुकी है।

आपको याद होगा Tata Motor के पूर्व एडी कार्ल स्लाइम ने वर्ष 2013 में 2020 तक कम्पनी को मारुति सुजुकी के बाद दूसरी सबसे बड़ी कम्पनी बनाने का टार्गेट रखा था। 2012 में कम्पनी ने 2.90 लाख गाड़ियां बेची थीं और लगातार कई महिने तक ह्यूंदे को पीछे छोड़ दूसरी सबसे बड़ी कम्पनी बनी रही थी।