अब बिना PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट नहीं हो पायेगा गाड़ी का इंश्योरेंस

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 vehicle pollutionदेश में गाडिय़ों से होने वाले पॉल्यूशन को कम करने के लिये सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह ऐसे कदम उठाये जिससे बिना PUC यानि पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट के गाड़ी का इंश्योरेंस नहीं दिया जाये।

जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई ईपीसी यानि एन्वायर्नमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी ने अपने अधिवक्ता के जरिये यह बात रखी कि गाडिय़ों के कारण पॉल्यूशन बड़ी समस्या बना हुआ है।

ईपीसी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में फर्जी PUC सर्टिफिकेट मिल जाते हैं जो देश में पॉल्यूशन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

हालांकि सडक़ परिवहन मंत्रालय ने ईपीसीए के PUC के बिना इंश्योरेंस नहीं देने के सुझाव का दो आधारों पर विरोध किया। पहला यह कि मौजूदा गाडिय़ों का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस बहुत कम होता है ऐसे में PUC के बिना इंश्योरेंस नहीं देने का कोई खास फायदा नहीं हो पायेगा। दूसरा यह कि PUC आमतौर पर 3 से 12 महिने के लिये होते हैं जबकि इंश्योरेंस साल भर के लिये होता है। 

लेकिन सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सडक़ परिवहन मंत्रालय की इस दलील को खारिज करते हुये केंद्र सरकार के इस मत को खारिज कर PUC और इंश्योरेंस को लिंक करने का निर्देश दिया।

यदि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को पूरे देश में लागू किया जाता है तो करोड़ों गाडिय़ां इसके दायरे में आयेंगी। भारत की सडक़ों पर बड़ी-छोटी मिलाकर करीब 45 करोड़ गाडिय़ां हैं। जिनमें से पांच बड़े शहरों दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, बैंगलुरू और चेन्नई में ही 2.6 करोड़ गाडिय़ां चलती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पॉल्यूशन लेवल जांच करने वाली मशीन की ट्यूनिंग और उसे बनाने वाली कम्पनी के सर्टिफिकेशन और रजिस्ट्रेशन भी ठीक तरीके से करने के निर्देश दिये हैं।

ईपीसीए ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि अभी जो पॉल्यूशन जांच केंद्र चल रहे हैं उनमें किसी भी क्वॉलिटी मानक की पालना नहीं की जा रही है। आमतौर पर ये पेट्रोल पम्प पर होते हैं और शहरों में वैन से भी चलते हैं।

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