स्पोर्ट्स कार Avanti वाले Dilip Chhabria की गाड़ी ऐसे सड़क से उतरी

0
164

ऑटो डिजायनिंग और कस्टमाइज़ेशन इंडस्ट्री के ब्लू आइड ब्वॉय और भारत की पहली स्पोर्ट्स कार Avanti के डिज़ायनर Dilip Chhabria ऐसे गिरेंगे किसी ने सोचा न था। …और वो भी वाहन पोर्टल के चलते।

वाहन पोर्टल देश में बिकने वाली गाड़ियों का ऑनलाइन डेटाबेस है। डीसी डिज़ायन्स के फ़ाउंडर Dilip Chhabria को पुलिस ने एक ही Avanti कार को अलग-अलग राज्यों में बेचने और फ़ाइनेंस कम्पनियों व कस्टमर के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ़्तार किया है।

अब सवाल यह है कि वाहन पोर्टल ने कैसे एक हीरो दिलीप छाबड़िया को फॉलन हीरोज़ की ज़मात में खड़ा कर दिया।

हुआ यह कि तमिलनाड़ु के एक Avanti ओनर ट्रेफिक नियम का उल्लंघन करने के आरोप में पुलिस रोकती है। जैसे ही चालान काटने के लिए ट्रेफिक पुलिसमैन गाड़ी का इंजन और चैसिस नंबर अपनी हैंडहेल्ड डिवाइस में फ़ीड करते हैं तो चकरा जाते हैं।

क्योंकि तमिलनाड़ु नंबर से चल रही गाड़ी हरियाणा में भी रजिस्टर दिखाई दे रही थी।

बस, यही दिलीप छाबड़िया के लिए वॉटरशेड मॉमेंट साबित हुआ।

पुलिस के अनुसार जांच में यह बात सामने आई कि कम्पनी दिलीप छाबड़िया डिज़ायन्स प्रा. लि. की बनाई करीब 90 Avanti गाड़ियों का धोखाधड़ी से फ़ाइनेन्स के लिए इस्तेमाल किया। जांच में सामने आया कि कम्पनी ने एक-एक गाड़ी पर औसत 42 लाख रुपए के कई-कई लोन लिए। मैन्यूफेक्चरर होने के बावजूद कम्पनी कस्टमर बनकर अपनी ही गाड़ी पर लोन लेती और…लोन चुकाये बिना कस्टमर को बेच देती। पुलिस के अनुसार कम्पनी ने ज्यादातर गाड़ियों पर कई-कई बार फाईनेंस लिया और बिना बताए कस्टमर को बेचा। जांच में सामने आया कि कम्पनी ने शातिराना तरीके से ज्यादातर गाड़ियों को अलग-अलग राज्यों के आरटीओ में दो-तीन बार रजिस्टर करा रखा था।

दिलीप छाबड़िया की पहचान ज्यादातर फिल्मी सितारों और सेलेब्रिटी के लिए डीसी ब्राण्ड से वैनिटी वैन और कस्टम कार डिजायन करने के लिये है।

1993 में बनी कम्पनी दिलीप छाबड़िया डिज़ायन्स प्रा. लि. ने 2012 में ऑटो एक्स्पो में डिस्प्ले करने के बाद 2016 में Avanti का कमर्शियल लॉन्च किया था।

…रिपोर्ट्स के अनुसार कम्पनी देश और दुनिया में करीब 120 डीसी अवंति बेच चुकी है।

पुलिस के अनुसार कम्पनी एक ही इंजन और चैसिस नम्बर को अलग-अलग राज्यों के आरटीओ में रजिस्टर कराकर लोन उठाती और किश्त चुकाने के बजाय गाड़ी बेच देती।

दरअसल कम्पनी वेहीकल रजिस्ट्रेशन डेटाबेस वाहन पोर्टल में किसी लूपहोल का फायदा उठा फाईनेंस कम्पनियों और कस्टमर को चूना लगा रही थी। आदर्श रूप से वाहन पोर्टल पर एक इंजन और चैसिस नम्बर को एक आरटीओ पर ही और केवल एक बार ही रजिस्टर किया जा सकता है।

पुलिस के अनुसार कुछ गाड़िया विदेशी कस्टमरों को भारत से भी कम कीमत में बेची गई हैं जिनकी जांच के लिए मामला कस्टम्स विभाग को भेजा जा रहा है।