Royal Enfield: वॉल्यूम गेम कहीं बन न जाये ब्रांडिंग ब्लंडर

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यूट्यूब पर अचानक एक वीडियो हाथ लगा..ये बुलट मेरी जां मंजिलों का निशान । नब्बे के दशक में ब्लैक एंड व्हाइट टीवी के ज़माने में संडे को शाम पांच बजे फिल्म शुरू होने से पहले यह विज्ञापन खूब चलता था और बच्चे-बच्चे की जुबान पर चढ़ा हुआ था। Royal Enfield बुलट के इस टीवी केम्पेन को देखकर यादें ताजा हो गईं। वैसे यह जिंगल आयशर मोटर्स के आज के हालातों पर सटीक साबित हो रहा है। बुलट वाली Royal Enfield आयशर मोटर्स की *जान* बनी हुई है। कारण भी है पांच साल में Royal Enfield की सेल्स पांच गुना हो गई।

ब्रांड और ?: 1893 में ब्रिटेन में शुरू हुई Royal Enfield ने दूसरे वल्र्ड वॉर में बड़ा नाम कमाया था। ब्रिटेन में भले ही कम्पनी अपनी जड़े नहीं बचा पाई हो लेकिन भारत में आर्मी व पुलिस की खरीद और जय-वीरू की शोले ब्रांडिंग के दम पर बुलट कम से कम पिछले 10 साल में बिल्कुल गोली की तरह दौड़ी है।    
क्रूज़र सैगमेंट की मस्त लीज़र बाइक Royal Enfield का इंजन थम्प 122 साल से चाहने वालों के दिल को धडक़ाता रहा है। बहुत सीमित वॉल्यूम नीश सैगमेेंट में होने से भी इसकी ब्रांडिंग को प्रीमियम आइकॉनिक पहचान मिली है।
Royal Enfield_Page_1अभी Royal Enfield के दो प्लांट्स की कुल प्रॉडक्शन कैपेसिटी 4.5 लाख यूनिट्स है। कम्पनी तीसरा प्लांट लगाने की योजना बना रही है। 2018 में इस प्लांट के शुरू होने से हर साल 9 लाख Royal Enfield बाइक्स बन पायेंगी। आयशर मोटर्स के वॉल्यूम गेम में शामिल होने से कहीं ऐसा नहीं हो कि नीश आइकॉनिक ब्रांड बुलट की ब्रांड थम्पिंग कहीं घुट जाये।
कुछ महिने पहले आई ब्रांड फायनान्स की देश के टॉप-100 ब्रांड की रिपोर्ट में Royal Enfield को भी शामिल किया गया है। टॉप-100 ब्रांड की लिस्ट में Royal Enfield 272 मिलियन डॉलर की ब्रांड वैल्यू के साथ शामिल होने में कामयाब रही है और देश के 84वें सबसे बड़े ब्रांड के रूप में उभरी है।
Royal Enfield Vs. Harley Davidson : क्रूज़र लीज़र सैगमेंट में ये दोनों दुनिया के दो सबसे बड़े ब्रांड हैं। पिछले साल सेल्स के मामले में Royal Enfield ने Harley Davidson को भी पीछे छोड़ दिया था। Royal Enfield की जहां 3.02 लाख बाइक्स बिकीं वहीं हार्ले डेविडसन 2.68 लाख के साथ बहुत पीछे छूट गई। ये खबर देशभर के मीडिया में सुर्खियों के साथ छपी थी लेकिन दोनों ब्रांड्स का मुकाबला करना शायद ठीक नहीं है। Royal Enfield की करीब-करीब 98 फीसदी सेल्स भारत में ही होती है और एक्सपोर्ट मार्केट्स में मौजूदगी के बावजूद साल में बमुश्किल पांच-छह हजार यूनिट्स ही बिक पाती हैं। दूसरी ओर हार्ले डेविडसन की 85 फीसदी सेल्स अमेरिका में होती है। जबकि जापान व कनाड़ा का हिस्सा 4-4.5 फीसदी है। कस्टमर बेस कॉन्सेंट्रेशन के मामले में दोनों कम्पनियां करीब-करीब एक जैसी हैं। लेकिन प्राइस पोजिशनिंग के लिहाज से बहुत बड़ा अंतर है। भारत में हार्ले डेविडसन के सबसे सस्ते मॉडल स्ट्रीट 750 की कीमत 4.70 लाख रुपये है। जबकि Royal Enfield का एंट्री लेवल मॉडल बुलट 350 ट्विनस्पार्क 1.07 लाख रुपये का है।
Royal Enfield भले ही क्रूज़र सैगमेंट की बाइक हो लेकिन पिछले पांच साल से रॉकेट की तरह उड़ रही है। वहीं हार्ले डेविडसन वास्तव में एक ही रफ्तार से क्रूज़ कर रही है। 2012 में हार्ले डेविडसन की 2.47 लाख बाइक्स बिकी थीं जो 2014 में 2.68 लाख तक पहुंच पाई यानि औसत 5-10 फीसदी ग्रोथ। दूसरी ओर Royal Enfield 2012 में 1.13 लाख से 2014 में 3.02 लाख तक पहुंच गई यानि 50 से 60 फीसदी का बम्पर जम्प।
ग्रोथ स्ट्रेटेजी: कम्पनी ने हाल ही पेरिस और मेड्रिड में एक्सक्लूसिव स्टोर खोले हैं। जंग खा रहे ब्रांड को चमकाने वाले सिद्धार्थ लाल इसे ग्लोबल ब्रांड बनाने के लिये हिंदुस्तान छोड़ Royal Enfield के असली घर लंदन जा बसे हैं। कम्पनी ने हाल ही डिजायन और टेक्नोलॉजी स्टूडियो हैरिस परफॉर्मेन्स को खरीदा है। यानि Royal Enfield प्रॉडक्शन कैपेसिटी से लेकर मार्केट बिल्डिंग और टेक्नोलॉजी तक सभी मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है। कोशिश है कि 250 से 750 सीसी के सैगमेंट में Royal Enfield वल्र्ड लीडर बन जाये।
लेकिन: वॉल्यूम के गेम में शामिल हो Royal Enfield अपना आइकॉनिक स्टेटस डाइल्यूट करने की ओर बढ़ रही है और इसके संकेत एनेलिस्ट भी दे रहे हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पांच लाख यूनिट्स के वॉल्यूम पर पहुंचने के बाद रॉयल एनफील्ड की रफ्तार में कमी आयेगी। जनवरी से अक्टूबर के बीच कम्पनी की सेल्स में 51 फीसदी की ग्रोथ हुई है। लेकिन अगले वर्ष यह घटकर 20 फीसदी पर आ जायेगी। अभी कम्पनी की प्रॉक्डक्शन कैपेसिटी 4.5 लाख यूनिट्स की है जो अगले वर्ष 6.20 लाख और 2018 में 9 लाख हो जायेगी। हाल के सालों में तेज ग्रोथ होने से Royal Enfield की पहुंच बढ़ी है और इसके लिये कम्पनी ने डीलर नेटवर्क का भी विस्तार किया है। चूंंकि कम्पनी की ग्रोथ में अब कमी आने के आंकलन है ऐसे में कहीं कैपेसिटी यूटिलाइजेशन चुनौती न बन जाये। फिर ब्रांड पोजिशनिंग की शाइन तो लगातार घुल ही रही है।Image Courtesy:throttlequest.com

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