Renault Lodgy: Velvet Ranbir

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Renault Ranbir और Velvet Lodgy इन शब्दों को जम्बल अप यानि उलट-पलट दिया जाये तो बनेगा Renault Lodgy और Ranbir (Kapoor) Velvet (Bombay Velvet)। आप चाहें तो Renault Velvet और Ranbir Lodgy भी कह सकते हैं। दोनों नाकामयाबी की ताजा मिसाल हैं और दोनों ने हाल ही हाथ मिलाये हैं। Renault India ने रणबीर कपूर को अपना ब्रांड एम्बेसेडर बनाया है। रणबीर और रेनो की जो हालिया परफॉर्मेन्स रही है उससे वैसे भी यह नैचरल च्वॉइस ही है। कह सकते हैं दोनों को ही रीवाइटल की जरूरत है। बिकाऊ, ब्रांड और भरोसे के मामले में इस जुगलबंदी से कई सवाल खड़े होते हैं।

Ranbir Renaultब्रांड, एम्बेसेडर और बिकाऊ:  Bombay Velvet की रिलीज़ से पहले ही यंग इंडियन के हार्ट थ्रोब रणबीर ने एक बयान दिया था “There’s a sense of insecurity that’s starting to trend inside of me. I’m feeling a sense of friction where I really don’t know what’s happening with my career. I know what’s happening with my work but I don’t know what’s going to happen with my career,” 21 मई को एनडीटीवी पर पब्लिश हुआ। यानि रणबीर में अपने कॅरियर को लेकर असुरक्षा की भावना घर कर रही है।
बिकाऊ स्टारकास्ट, महंगा बजट और दिल खोलकर पब्लिसिटी के बावजूद बॉम्बे वेलवेट का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन सिर्फ 23 करोड़ रुपये का रहा।

जुलाई में Renault Lodgy को सिर्फ 522 ग्राहक मिले। जबकि 9 अप्रेल को लॉन्च के मौके पर रेनो इंडिया के एमडी और सीईओ सुमित साहनी ने कहा था “Renault Lodgy is a breakthrough product that will redefine the benchmark of performance and convenience of the MPV segment. It comes with features and services that are people centric, addressing real customer needs and will cater to a diverse set of customers.We have priced it extremely competitively, and we are confident that Lodgy will create a new segment in the Indian automotive industry, as we have successfully done with Duster in the recent past.” 

लॉन्च के सिर्फ 3 महिने बाद Renault Lodgy the Logical के लिये कम्पनी को 9.99 फीसदी की डिस्काउंटेड फायनेन्स स्कीम लानी पड़ी और जुलाई में ही Renault Lodgy का स्टेपवे वैरियेंट बाजार में आया। इन दो कोशिशों के बावजूद एमपीवी सैगमेंट के लिये “ब्रेकथ्रू मॉडल” Renault Lodgy कम्पनी की उम्मीदों को ब्रेक डाउन होने से नहीं बचा पा रही है। बात सिर्फ Renault Lodgy और Bombay Velvet की ही नहीं है। रेनो भारत में अब तक One Model Wonder ही है। Renault Duster को छोड़ दें तो Pulse से लेकर Scala और Fluence से लेकर Koleos तक कम्पनी और डीलर दोनों के लिये बोझ हैं। और डस्टर भी जुलाई में सिर्फ 1005 ही बिक पाईं। फरवरी से जुलाई के बीच रेनो की सिर्फ 1243 Pulse बिकी हैं वहीं 630 Scala। Fluence 63 ग्राहकों तक पहुंची और Koleos 11। अप्रेल में आई Lodgy की चार महिनों की सेल्स 6209 यूनिट्स रही लेकिन जुलाई में सिर्फ 522 यूनिट्स ही बिकीं। Duster कम्पनी का अकेला कामयाब मॉडल है और इन छह महिनों में 13244 डस्टर बिकी हैं।
रणबीर के आठ साल के कॅरियर में भी रेनो की तरह कामयाबी की कुछ ही बूंदें हैं। 2007 से अब तक रणबीर की सिर्फ रॉकस्टार, बर्फी और ये जवानी है दीवानी ही हिट रही हैं। इंडिसिने की रिपोर्ट के अनुसार रणबीर कपूर की सक्सैस रेट 58.3 और हिट रेश्यो सिर्फ 41.6 है। यानि सक्सैस रेट के लिहाज से रेनो और रणबीर दोनों जोड़ीदार ही हैं।

ब्रांड एम्बेसेडर और ब्रांड: निसान माइक्रा…फ्लॉप, वर्जिन मोबाइल्स…बंद, ओरियो बिस्किट…स्ट्रगलिंग,  ब्लैकबरी…स्ट्रगलिंग, हीरो माइस्त्रो स्कूटर…हिट।
बॉक्स ऑफिस को छोडक़र ब्रांड एम्बेसेडर के रूप में रणबीर को देखा जाये तो यहां भी उनके हिस्से में कामयाबी इतनी ज्यादा नहीं हैं। निसान ने अपने ग्लोबल हैचबैक माइक्रा के लिये रणबीर को ही ब्रांड एम्बेसेडर बनाया था लेकिन यह मॉडल ना केवल बुरी तरह नाकामयाब रहा बल्कि इससे ब्रांड के रूप में भारत में निसान पर भी बट्टा लगा था। अमेरिकन अप्रेजल की रिपोर्ट के अनुसार भारत में शाहरुख खान के अलावा सिर्फ रणबीर कपूर ही ऐसे सेलेब्रिटी हैं जिनकी ब्रांड वैल्यू 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा (129.4 मिलियन डॉलर) है। लेकिन शाहरुख खान का 25 साल का कॅरियर ब्लॉकबस्टर से भरा पड़ा है वहीं रणबीर कपूर के खाते में इक्का-दुक्का ही कामयाबी आई है। 

दूसरी ओर रेनो के पोर्टफोलियो में पल्स फ्लॉप है। स्काला फ्लॉप है। फ्लूएंस और कोलिओस डिज़ास्टर हैं। डस्टर को लगातार मोटे डिस्काउंट का रीवाइटल दिया जा रहा है और लॉज़ी भी पल्स और स्काला की ओर बढ़ रही है।
यानि रणबीर और रेनो दोनों ही जितने बड़े ब्रांड हैं उतनी अच्छी उनकी परफॉर्मेन्स रिपोर्ट नहीं है।
रेनो के मामले में ब्रांड एन्डोर्समेंट कॉन्फ्लिक्ट भी हुये हैं। पल्स के लिये कम्पनी ने जब अनिल कपूर को लेकर केम्पेन शुरू किया था उसी दौरान अनिल कपूर का कलर्स चैनल पर टीवी शो चल रहा था जिसकी लीड स्पॉन्सर टाटा सफारी स्टॉर्मे थी और इसका शो प्रॉपर्टी के रूप में भी खूब इस्तेमाल हुआ था। हालांकि इसके पीछे तर्क यह दिया जा सकता है कि पल्स और टाटा सफारी स्टॉर्मे अलग-अलग सैगमेंट की गाडिय़ां हैं। लेकिन यही तर्क निसान माइक्रा और रेनो पल्स के मामले में नहीं दिया जा सकता। ये दोनों गाडिय़ां एक ही सैगमेंट और एक ही प्राइस पोजिशनिंग की है। इनका टार्गेट कस्टमर भी एक ही और आपस में रीबैज अवतार हैं। ऐसे में कस्टमर के मन में कन्फ्यूजन तो होता ही है।
ब्रांड एम्बेसेडर और भरोसा: टाइगर वुड्स की कहानी फर्श से अर्श की मिसाल है। गोल्फ महारथी और करोड़ों डॉलर के ब्रांड एंडोर्समेंट्स। यानि नाम भी दाम भी और साख भी। अचानक वाइफ को धोखा देने का मामला सामने आया और स्कैंडल बन गया। चैम्पियन के भरोसा तोडऩे की दुनियाभर में खबर बनी तो ब्रांड्स ने नाता तोड़ा और माना जाता है कि वुड्स के हाथ से 2 करोड़ पाउंड के कॉन्ट्रेक्ट फिसल गये।
रिलेशनशिप्स के मामले में रणबीर कपूर का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं है और कई बार उन पर रिलेशनशिप्स में चीटिंग करते पकड़े जाने के आरोप लग चुके हैं। वैसे तो यह निजी मामला होता है लेकिन ब्रांड के लिये भरोसा सबसे अहम होता है तभी तो टाइगर वुड्स से कॉन्ट्रेक्ट खत्म किये गये थे।
रेनो का कस्टमर बेस भारत के परिवार हैं वहीं रणबीर कपूर की पहचान फ्री बर्ड यानि नो फैमिली मैन के रूप में हैं। वे अकेले रहते हैं परिवार से अलग हैं और पिता ऋषि कपूर से तो उनके खराब रिश्तों पर खूब मीडिया रिपोर्टिंग होती रही है।
रणबीर की भले 100 मिलियन डॉलर ब्रांड वैल्यू हो लेकिन क्रेडिबिलिटी यानि भरोसे के मामले में वे बहुत पिछड़े हुये हैं।
यानि देखें तो बिकाऊ, ब्रांड और भरोसा तीनों मामलों में रणबीर कपूर और रेनो का जो समीकरण है उसमें बहुत ज्यादा झोल हैं।
ब्रांड एम्बेसेडर यानि ऐसा बेदाग कामयाब चेहरा जो ब्रांड को चमकाये, उसमें भरोसा जगाये और फिर सेल्स में फायदा हो। लेकिन रणबीर और रेनो दोनों की इस जुगलबंदी से म्यूजिक तो बन सकता है लेकिन मेलॉडी की उम्मीद कम है।

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