Scrappage Policy: गाड़ी खरीदने पर ऐसे मिल सकती है 20 परसेंट तक की छूट

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अभी पिछले दिनों प्रधानमंत्री कार्यालय ने ईएलवी (ELV) यानी एंड ऑफ लाइफ वेहीकल को अपनी मंजूरी दी है। एंड ऑफ लाइफ वेहीकल यानी वो मियाद जिससे पुरानी गाडिय़ां सडक़ पर नहीं चल पायेंगी। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि माना आपने 1 अप्रेल 2000 को कोई गाड़ी खरीदी तो वो 31 मार्च 2020 के बाद सडक़ पर चल नहीं पायेगी। आपको यह गाड़ी स्क्रेप करानी होगी क्योंकि भारत सरकार Scrappage Policy पर काम कर रही है।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने फिलहाल कमर्शियल वेहीकल्स यानी ट्रक, बस और टेक्सी कैब आदि को ही एंड ऑफ लाइफ वेहीकल पॉलिसी के दायरे में रखा है यानी प्राइवेट कार, टू-व्हीलर आदि पर यह फिलहाल लागू नहीं होगी। ईएलवी की यह पॉलिसी 1 अप्रेल 2020 से लागू होनी है।

गाड़ी की लाइफ तय कर देने के पीछे सरकार का मकसद ऑटो इंडस्ट्री की 10 साल से चली आ रही Scrappage Policy की मांग है। स्क्रेपेज पॉलिसी यानी एंड ऑफ लाइफ तक पहुंच चुकी गाड़ी को स्क्रेप कर दिया जाये और उसके बदले नई गाड़ी खरीदने पर सरकार और ऑटो कम्पनियां टेक्स और कैश डिस्काउंट देंगी।

अब सवाल ये है कि एंड ऑफ लाइफ वेहीकल पॉलिसी की जरूरत क्या है?

तो इसके दो पक्ष हैं। पहला यह कि देश में खासकर बड़े शहरों में प्रदूषण की चिंता बढ़ रही है और विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी गाडिय़ां इसके लिये जिम्मेदार हैं। ऐसे में यदि इन्हें फेज़आउट यानी सडक़ से हटा दिया जाये और इनकी जगह नये बेहतर एमिशन नॉम्र्स वाली गाडिय़ां सडक़ पर उतरें तो काफी मदद मिल सकती है। साथ ही नई टेक् नोलॉजी वाली गाडिय़ों का मायलेज भी बेहतर होगा जिससे देश के ऑयल इम्पोर्ट बिल में भी कमी आयेगी।

दूसरा, Scrappage Policy को ऑटो इंडस्ट्री के लिये स्टिमुलस यानी प्रोत्साहन पैकेज के रूप में इस्तेमाल कया जाता है। पुरानी गाडिय़ां स्क्रेप होने से नई गाडिय़ों की डिमांड निकलती है जिससे सेल्स में फायदा होता है।

अमेरिका और यूरोप में कुछ साल पहले कैश फोर क्लंकर यानी Scrappage Policy लागू की जा चुकी है। हाल ही चीन के सबसे बड़े शहर शंघाई की सडक़ों से पुरानी गाडिय़ों को हटाने के लिये इसी तरह की स्कीम लाई गई थी। हालांकि अमेरिका, यूरोप और चीन में Scrappage Policy के दायरे में प्राइवेट कारें थीं लेकिन भारत में फिलहाल कमर्शियल वेहीकल्स पर ही इसे लागू किया जायेगा।

भारत में स्क्रेपेज स्कीम अनिवार्य नहीं बल्कि ऐच्छिक यानी वॉलंटरी होगी और इसे वॉलंटरी वेहीकल फ्लीट मॉडर्नाजेशन प्रोग्राम (VVMP Voluntary Vehicle Fleet Modernization Program) के तहत लाया जायेगा।

सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडक़री ने 15 फरवरी को एक बयान में कहा था कि Scrappage Policy करीब-करीब तैयार हो चुकी है। 

हालांकि तब गडक़री ने कहा था कि इसके तहत 15 साल या उससे ज्यादा पुरानी गाडिय़ों को ही शामिल किया जायेगा। लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने जिस ईएलीवी पॉलिसी को मंजूरी दी है उसके अनुसार 1 अप्रेल 2000 या उससे पहले बनी गाडिय़ां (कमर्शियल वेहीकल्स) ही शामिल होंगी।

एक ताजा बयान में सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडक़री ने कहा कि Scrappage Policy एक महिने के अंदर केबिनेट की मंजूरी के लिये पेश की जायेगी और इसके लागू होने से सरकार को 10 हजार करोड़ रुपये की टेक्स के रूप में आय होगी।

केबिनेट की मंजूरी के बाद इस पॉलिसी को जीएसटी काउंसिल के सामने पेश किया जायेगा। जो यह तय करेगी कि Scrappage Policy के तहत स्क्रेप होने वाले कमर्शियल वाहनों को बदले नई गाड़ी खरीदने पर टेक्स में कितनी छूट दी जाये। अभी केंद्र सरकार वाहनों पर जीएसटी (पहले एक्साइज) वसूलती है वहीं राज्य सरकारें रोड टेक्स और रजिस्ट्रेशन फीस लेती हैं।

गडक़री के अनुसार अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि स्क्रेपेज स्कीम के तहत एक्सचेंज होने वाली गाडिय़ों पर कुल कितना फायदा होगा लेकिन यह गाड़ी की कीमत का 15 से 20 परसेंट हो सकता है।

माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जीएसटी काउंसिल को Scrappage Policy के तहत बिकने वाली गाडिय़ों पर जीएसटी की दर को 28 से घटाकर 18 प्रतिशत करने की सिफारिश करेगी।

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