Magnite से Nissan का होगा फीनिक्स जैसा राइज़

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फीनिक्स! नाम तो सुना होगा आपने?

इस पौराणिक या कहें तो काल्पनिक पक्षी के बारे में कहा जाता है कि अपनी ही राख से यह फिर उठ खड़ा होता है। कोई 15 साल की अथक कोशिशों के बावजूद भारत में अपनी साख को बचाने के लिए संघर्ष कर रही ग्लोबल दिग्गज निसान को जैसे Compact SUV Magnite के रूप में एक जैकपॉट हाथ लग गया है। कम्पीटिटिव पैकेजिंग और प्राइस अंडरकटिंग की कामयाब स्ट्रेटेजी के दम पर Nissan Magnite बहुत अच्छा ट्रेक्शन हासिल कर रही है और दिसम्बर में लॉन्च होने के बावजूद पहले महिने में ही 30 हजार यूनिट्स के बुकिंग लेवल को पार कर यह ना केवल ईयर एंड साइकोलॉजी को डिसरप्ट करने के संकेत दे रही है बल्कि निसान के लिए रोड टू रिकवरी का ग्राउंडवर्क भी करती दिख रही है।

Compact SUV Magnite को डबल बॉनान्ज़ा बताया जा रहा है और वो इसलिए कि इसकी कामयाबी से निसान के वॉल्यूम और ब्राण्ड दोनों मोर्चों पर फायदा होता दिख रहा है।

निसान अभी भारत में निसान और डेटसन ब्रांड की साल में बमुश्किल 10-12 हजार यूनिट्स ही बेच पा रही है। कम्पनी के पोर्टफोलियो में निसान ब्रांड की एसयूवी किक्स है वहीं डेटसन की गो, गो+ और रेडी-गो मौजूद है। कोरोना वाले साल 2020 में तो कम्पनी 7 हजार के करीब गाड़िया ही बेच पाई।

सब-कॉम्पेक्ट हैचबैक और अर्बन एसयूवी के हाई वॉल्यूम सैगमेंट में मौजूदगी और पोर्टफोलियो में दो ब्राण्ड होने पर भी निसान 1 पर्सेंट मार्केट शेयर तक सीमित है। डेटसन ब्राण्ड के लॉन्च के जरिए निसान का भारत में 2015 में 5 परसेंट मार्केट शेयर तक पहुंचने का टार्गेट था। लेकिन कई बार आगे बढ़ाते हुए कम्पनी अब 2022 में 5 परसेंट मार्केट शेयर तक पहुंचना चाहती है।

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Magnite की अपने सैंगमेंट में कामयाबी इसलिए और भी बड़ी हो जाती है क्योंकि फोर्ड ईकोस्पोर्ट, टाटा नेक्सॉन, मारुति विटारा ब्रेज़ा, ह्यूंदे वेन्यू, किआ सॉनेट, रेनो ट्राईबर, टोयोटा अर्बन क्रूज़र और होंडा डब्ल्यूआरवी आदि मॉडलों की मौजूदगी के चलते निसान की इस कॉम्पेक्ट एसयूवी के लिए पोजिशनिंग का एल्बो रूम और ग्रोथ का हेडरूम सीमित ही नज़र आ रहा है।

सेल्टॉस के जरिए भारत जैसे फाइनल फ्रंटियर कहलाये जाने वाले ऑटो मार्केट में पहली ही कोशिश में कामयाब रही ह्यूंदे की सहयोगी कोरियाई कम्पनी किआ मोटर्स ने सितम्बर में ही Magnite के ही सैगमेंट में सॉनेट को लॉन्च किया था जो पहले दो महिने में ही 50 हजार यूनिट्स के बुकिंग लेवल तक पहुंच गई थी।

रेनो, निसान और मित्सुबिशी का ग्लोबल ग्रांड अलायंस साल-दर-साल करीब एक करोड़ गाड़ियां बेचता है।

32 हजार यूनिट्स के बुकिंग लेवल को पार करने को देखते हुये Nissan ने कहा है कि वह अपने चेन्नई प्लांट में तीसरी शिफ्ट में प्रॉडक्शन शुरू कर रही है।  

इंडस्ट्री रिपोर्ट्स में कहा गया है कि Nissan Magnite के जरिये ह्यूंदे वेन्यू, किआ सॉनेट के कस्टमर बेस में सेंध लगाने में कामयाब रही है और इसका बड़ा कारण Magnite की 4.99 लाख रूपये की एंट्री प्राइस बताया जा रहा है। 5 लाख रुपये के कम की इंट्रोडक्टरी प्राइस पर Nissan Magnite वास्तव में मारुति स्विफ्ट और बलेनो जैसे कॉम्पेक्ट हैचबैक तक को अंडरकट कर रही थी।

कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि Nissan Magnite की वास्तविक बुकिंग 32 हजार यूनिट्स के आंकड़े से बहुत ज्यादा हो सकती है और हो सकता है 2021 में गाड़ी बुक कराने वालों को डिलिवरी के लिए 2022 तक का इंतजार करना पड़ सकता है।

पिछले 15 साल में निसान ने माइक्रा और सनी जैसे ग्लोबल बेस्ट सेलर से लेकर डेटसन गो, गो+ और रेडी-गो जैसे अफोर्डेबल फंक्शनल मॉडल तक पर इंवेस्ट कर लिया लेकिन दुनिया की इस दिग्गज कम्पनी की फिसलन अब लगता है Magnite से थम जायेगी। साथ ही हो सकता है निसान की यह प्राइस स्ट्रेटेजी मारुति जैसी हाई वॉल्यूम कार कम्पनी के लिये बेंचमार्क चैलेंज खड़ा कर दे।