Volkswagen के बाद अब Nissan Emission Scandal की चपेट में

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Nissan Emission Scandal

Nissan Emission Scandal का आरोप लगाते हुये एक लॉ फर्म ने दावा किया है कि जापानी कम्पनी ने अपनी लाखों गाडिय़ों में एमिशन टेस्टिंग को चकमा देने के लिये Cheating Software का इस्तेमाल किया। अब लॉ फर्म हारकस पार्कर ने कम्पनी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की बात कही है और दावा है कि 1 करीब 1 लाख पेट्रोल कशकाई एसयूवी में इन चीटिंग सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के उसके पास दस्तावेज है और इनसे एमिशन लिमिट 15 गुना तक बढ़ जाती है।
Nissan Qashqai ब्रिटेन की बेस्ट सेलिंग पेट्रोल कार है।
लॉ फर्म ने यह भी आरोप लगाया कि Renault और Nissan की 13 लाख से ज्यादा डीज़ल गाडियों में भी एमिशन टेस्टिंग को चकमा देने वाले इस चीटिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किये जाने की आशंका है।
बड़ी बात यह है कि Emission Scandal (एमिशन स्कैंडल) की पूरी चर्चा पिछले पांच सालों में डीजल इंजन तक ही सीमित रही है और यह पहली बार है जब इसकी चपेट में पेट्रोल इंजन भी आ रहे हैं।
Volkswagen Emission Scandal सितम्बर 2015 में अचानक ही तब सामने आ गया जब एक लैब ने अपनी एक रिपोर्ट में अमेरिका में फोक्सवैगन के डीजल मॉडलों में चीटिंग सॉफ्टवेयर की मौजूदगी की बात कही थी। इस रिपोर्ट के चलते फोक्सवैगन को दुनियाभर से 1.10 करोड़ डीजल गाडिय़ों को रीकॉल करना पड़ गया था और अकेले अमेरिका में ही कम्पनी को इस मामले से पीछा छुड़ाने के लिये 30 बि. डॉलर से ज्यादा खर्च करने पड़े हैं।
डीजल एमिशन स्कैंडल में रेनो, फिएट और मर्सीडीज़ सहित यूरोप की दर्जनों कार कम्पनियां जांच का सामना कर रही हैं।
चीटिंग सॉफ्टवेयर दरअसल बहुत स्मार्ट होता है जो टेस्टिंग के दौरान अपने आप एक्टिव हो जाता है जिससे एमिशन लेवल कमतर दिखता है लेकिन जैसे ही गाड़ी आम सडक़ पर चलती है यह स्विचऑफ हो जाता है और गाड़ी तय लेवल से कई गुना ज्यादा धुआं छोडऩे लगती है।
हालांकि हारकस पार्कर के इस दावे को निसान ने सिरे से खारिज करते हुये कहा कि निसान ने अपने किसी भी वेहीकल में डिफीट डिवाइस  (Defeat Device) का इस्तेमाल नहीं किया है और निसान की गाडिय़ां एमिशन मानकों का पूरा पालन करती हैं।