Road Accident Claim: मृतक महिला के बेरोजगार पति को 1 करोड़ का हर्ज़ाना देने का आदेश

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who will bear road accident claim: registered owner or real user second partyRoad Accident Claim : मृतक महिला के बेरोजगार पति को 1 करोड़ का हर्ज़ाना देने का आदेश…मुम्बई मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने नौकरीपेशा एक महिला की Road Accident Claim का सैटलमेंट करते हुये उसके बेरोजगार पति को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दने का आदेश दिया है। काल्र्सबर्ग में सेल्स एक्जेक्टिव के रूप में काम कर रही महिला को वर्ष 2008 में ट्रक ने कुचल दिया था और उसकी मौत हो गई थी।

Road Accident Claim मामले में वित्तीय निर्भरता के आधार पर मुआवजे का फैसला किया जाता है। आमतौर पर इस तरह के क्लेम पति की मौत पर पत्नी व परिवार की जरूरत को ध्यान में रखकर तय किये जाते हैं लेकिन यह मामला एक मिसाल बन गया है।

ट्रिब्यूनल ने इस मामले में स्पाउज़ यानि पति या पत्नी की वित्तीय निर्भरता तय करने के लिये सैक्स यानि लिंग के आधार पर कोई भेद नहीं किया। महिला का पति हादसे के समय बेरोजगार और अपनी पत्नी पर निर्भर था। ट्रिब्यूनल ने कहा कि विवेक साटम जो कि अब 37 साल के हैं मुआवजे के लिये हकदार हैं।

बीमा कम्पनी न्यू इंडिया एश्योरेंस और ट्रक मालिक बाबूराम अग्रवाल ने शिकायत को झूठा बताते हुये विवेक को किसी भी प्रकार का मुआवजा देने से इनकार कर दिया और ट्रिब्यूनल से इसे खारिज करने की अपील की। लेकिन ट्रिब्यूनल ने पुलिस के कागजातों के आधार पर यह माना कि महिला की मौत Road Accident में ही हुई थी और ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि ट्रक को ड्राइवर तेज और लापरवाही से चला रहा था।

ट्रिब्यूनल ने हर्जाने की रकम का फैसला करते हुये कहा कि उसने पीडि़त महिला की उम्र, आमदनी और उस पर निर्भरता आदि पर गौर किया। चूंकि महिला हादसे के समय 45 हजार रुपये महिना कमा रही थी और कम्पनी में वह 35-40 लाख रुपये के पैकेज तक पहुंच सकती थी।

अदालत ने महिला की कमाई पर पति की निर्भरता पर फैसला करते हुये कहा कि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित किया जाये कि पत्नी की मौत के समय वह खुद कमा रहा है। ऐसे में इस तथ्य को स्वीकार करने के सिवा कोई विकल्प नहीं है कि वह अपनी पत्नी की कमाई पर निर्भर था।

हर्जाने की रकम का फैसला करते हुये ट्रिब्यूनल ने यह ध्यान रखा कि नौकरी के बाकी बचे सालों में मृतक महिला कितना कमा सकती थी। इस तरह 71.60 लाख रुपये का मुआवजा तय किया गया और उस पर 7 वर्ष का 7.5 परसेंट से ब्याज देने का भी फैसला सुनाया।

पिछले वर्ष मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने पूरी तरह से अपाहिज़ हो चुके एक व्यक्ति को 2.5 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। 1999 में रात को पुणे-मुम्बई हाईवे पर ड्राइवर की गलती से हुये हादसे में 40 साल में बलभीम संकपाल को गर्दन से नीचे के पूरे हिस्से में लकवा हो गया था जिसकी वजह से वे चारों हाथ-पांव से अपाहिज हो गये।

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