2030: भारत में बिकेंगी सिर्फ Electric Car , बंद हो जाएँगी पेट्रोल-डीजल कार

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green car battery car zero emission car car chargingजीएसटी में हाइब्रिड कार को 43 परसेंट के स्लैब में रखा गया है। जबकि Electric Car (इलेक्ट्रिक कार) पर सैस को हटाकर स्टेन्डर्ड 12 परसेंट जीएसटी लगेगा। ये एक ऐसा फैसला है जिससे सरकार की पॉल्यूशन, Electric Car टेक्नोलॉजी को लेकर लॉन्ग टर्म पॉलिसी का अंदाजा हो जाता है। भारत सरकार 2032 तक भारत में पैसेंजर वेहीकल सैगमेंट के फुल इलेक्ट्रिफिकेशन का टार्गेट लेकर चल रही है।

अभी भारत में होन्डा अकॉर्ड और टोयोटा कैमरी हाइब्रिड हैं जबकि Mahindra E2O, महिन्द्रा E-Verito और ई-सुप्रो इलेक्ट्रिक हैं। इनमें अलावा मारुति सुजुकी Ciaz और अर्टीगा जबकि महिन्द्रा एंड महिन्द्रा स्कॉर्पियो में माइक्रोहाइब्रिड सिस्टम भी दे रही है। माइक्रोहाइब्रिड सिस्टम वाली गाडिय़ों को 2 साल से फेम स्कीम की सब्सिडी मिल रही थी लेकिन हाल ही इन्हें सब्सिडी की लिस्ट से हटा दिया गया है।

भारत सरकार की Electric Car पॉलिसी दिसम्बर तक तैयार हो जायेगी जिसमें हल्के और कमर्शियल जैसे कार व बस आदि को शामिल किया जायेगा। 

हाईवेज़ एंड सरफेस ट्रान्सपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडक़री ने पिछले दिनों नागपुर में Electric Car कैब सर्विस की शुरूआत की है जिसके लिये चार्जिंग नेटवर्क भी तैयार किया गया है। यह ई-कैब सर्विस सरकार की इलेक्ट्रिक वेहीकल पॉलिसी के लिये एक पायलट का काम करेगी।

भारत में साल 2016 में कुल 22 हजार इलेक्ट्रिक वेहीकल्स बिके थे जिनमें से 20 हजार स्कूटर और 2 हजार कार आदि 4-व्हीलर थे। 2015 में कुल 16 हजार इलेक्ट्रिक वेहीकल बिक पाये थे। भारत सरकार ने नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान 2020 और फेम के तहत 2020 तक 60 लाख इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वेहीकल सडक़ पर उतारने का टार्गेट रखा था। फेम स्कीम में स्कूटर पर 29 हजार रुपये तक और कार पर 1.38 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल रही है।

कैसे बनेगा इंडिया ऑल इलेक्ट्रिक: नीति आयोग और अमेरिका के कोलेराडो के रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार को 2018 के आखिर तक बैटरी प्लांट शुरू कर देना चाहिये।

अप्रेल में सुुजुकी, तोशीबा और डेन्सो ने भारत में 18.4 करोड़ डॉलर के इन्वेस्टमेंट से Electric Car के लिये लीथियम आयन बैटरी प्लांट लगाने की योजना की घोषणा की। इस प्लांट में 2018 में प्रॉडक्शन शुरू हो जायेगा। Electric Car की लागत में 50 परसेंट हिस्सा लीथियम आयन बैटरी का होता है लेकिन इसकी लागत हर साल 14 परसेंट की दर से घट रही है। 

भारत सरकार Electric Car प्लान को कुछ उसी तरह मिशन मोड में लागू करना चाहती है जिस तरह उसने LED बल्ब बांटने की योजना हाथ में ली और भारत के एक-एक गांव को बिजली से जोडऩे पर काम चल रहा है। उजाला स्कीम के तहत 2 साल में सरकार भारत में बने 22 करोड़ LED बल्ब बांट चुकी है। पिछले दिनों इंगलैंड में पावर मिनिस्टर पियूष गोयल ने उजाला स्कीम लॉन्च की है जिसके जरिये भारत में बने दस करोड़ एलईडी बल्ब बांटे जायेंगे। सरकार का मकसद भारत को ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग पावरहाउस के रूप में विकसित करना है और Electric Car स्कीम भी इसी स्ट्रेटेजी का हिस्सा है।

Electric Car के लिये भी सरकार इसी तरह के पॉलिसी पुश की तैयारी कर रही है। तैयारी यह है कि इलेक्ट्रिक गाडिय़ों की कमजोर सेल्स के रास्ते मेंं महंगी बैटरी का जो रोड़ा है उसे दूर कर दिया जाये। यदि ऐसा हो जाता है तो इलेक्ट्रिक कार परम्परागत पेट्रोल-डीजल कार के मुकाबले सस्ती हो जायेगी। योजना यह है कि कम्पनियां गाड़ी बिना बैटरी के बेचेंगी और बैटरी लीजिंग व बैटरी स्वैपिंग (बैटरी की अदला-बदली) का तगड़ा ईकोसिस्टम तैयार किया जायेगा। बैटरी लीजिंग (किराये) और चार्जिंग के बदले कम्पनी हर महिने एक तय रकम कस्टमर से लेंगी। 

सरकार का मानना है कि Electric Car में चूंकि सिर्फ बिजली की मोटर और बैटरी होती है ऐसे में इनका मेंटीनेन्स भी बहुत कम होता है। जबकि पेट्रोल-डीजल इंजन वाली गाड़ी में हजारों मूविंग यानि चलने वाले पार्ट्स होते हैं जिनके कारण इनका समय-समय पर मेंटीनेन्स कराना पड़ता है। इस लिहाज से भी Electric Car की ओनरशिप कॉस्ट कम होती है।

अक्टूबर 2015 में अमेरिका यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेस्ला के हेडक्वार्टर का दौरा किया था। 2016 में हाईवेज़ एंड सरफेस ट्रान्सपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडक़री ने टेस्ला के सैन फ्रांसिस्को प्लांट की विजिट की और टेस्ला मोटर्स के सीईओ एलन मस्क को टेस्ला कार के लिये भारत को एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने का ऑफर दिया था। नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में Electric Car को बढ़ावा देने के लिये इन्सेंटिव स्कीम लाने और पेट्रोल-डीजल की प्राइवेट गाडिय़ों के चलन को कम करने के लिये कदम उठाने की सिफारिश की है। इसके लिये नीति आयोग ने पेट्रोल-डीजल वाली गाडिय़ों की राशनिंग करने और इलेक्ट्रिक गाडिय़ों का प्राथमिकता के आधार पर रजिस्ट्रेशन करने का भी सुझाव दिया है।

नीति आयोग ने इंडिया लीप्स अहेड: ट्रान्सफॉर्मेटिव मोबिलिटी सॉल्यूशन्स फोर ऑल नाम की रिपोर्ट में बैटरी, कॉमन कम्पोनेंट, प्लेटफॉर्म आदि के लिये कम्पनियों का एक कंसोर्शियम बनाने की भी सिफारिश की है जिससे इनकी लागत को कम किया जा सकेगा।

Electric Car के लिये इंडियन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार के कहने पर इसरो ने रॉेकेट और सैटैलाइट में इस्तेमाल होने वाली लीथियम आयन बैटरी में इलेक्ट्रिक कारों की जरूरत के हिसाब से बदलाव किये हैं।
वर्ल्ड मार्केट: इन दिनों दुनियाभर के देशों में खासतौर पर डीजल वाली गाडिय़ों के खिलाफ माहौल बन रहा है और इनकी डिमांड तेजी से गिर रही है। फोक्सवैगन डीजल एमिशन स्कैंडल सामने आने के बाद खासतौर पर यूरोप की फिएट, रेनो और पजियट सहित आधा दर्जन कम्पनियां भी एमिशन टेस्टिंग से छेड़छाड़ के लिये चीटिंग सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के आरोप में जांच का सामना कर रही हैं।

दुनियाभर में कड़े हो रहे एमिशन और कैफे मानक (कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफीशियेंसी) को देखते हुये कार कम्पनियों में अचानक इलेक्ट्रिक कार लाने की होड़ मच गई है।

यदि Electric Car के वर्ल्ड मार्केट पर नजर डालें तो नॉर्वे में बिकने वाली 100 में से 35 गाडिय़ां इलेक्ट्रिक होती हैं वहीं नीदरलैड्स में 100 में से 9 Electric Car बिकती हैं। लेकिन ये दोनों बहुत छोटे कार मार्केट्स हैं।

दुनिया के सबसे बड़े कार मार्केट चीन में हर साल 2 करोड़ 80 लाख कार बिकती हैं। चीन में पिछले साल 1.73 लाख Electric Car और अन्य बड़े वाहन बिके थे इस तरह चीन दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक कार मार्केट है। चीन में इलेक्ट्रिक कार सैक्टर में सैंकड़ों स्टार्टअप कम्पनियां काम कर रही हैं। लेकिन चीन सरकार सब्सिडी को धीरे-धीरे कम कर रही है और फर्जी बिक्री दिखाकर सब्सिडी की धोखाधड़ी करने वाली कम्पनियों के खिलाफ भी कार्यवाही कर रही है। ऐसे में चीन में इलेक्ट्रिक कार सेल्स में गिरावट आ सकती है।

2016 में टेस्ला ने 76230  इलेक्ट्रिक गाडिय़ां बेचीं थीं और 2020 में 5 लाख गाडिय़ां बेचने का टार्गेट लेकर चल रही है। कम्पनी ने हाल ही अपने सबसे कम प्राइस वाले Tesla Model3 का उत्पादन शुरू किया है। 35 हजार डॉलर की इस कार के लिये कम्पनी को 4 लाख बुकिंग मिली हैं।

सरकार ने इस योजना को लेकर कंपनियों से बात की है। कंपनियों ने हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर बड़ा निवेश किया है। ऐसे में यदि इस प्लान को आगे बढ़ाया जाता है हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर किया गया निवेश डूब जायेगा। फिर इलेक्ट्रिक कार की इस स्कीम को सरकार पूरे देश में लागू करना चाहती है जिसके लिए बैटरी लीजिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन बनाने पर बहुत बड़ा निवेश करना पड़ेगा। इसलिए कंपनियां फिलहाल इसमें ज्यादा रूचि नहीं दिखा रही हैं। हालांकि मोदी सरकार के स्कीम्स को मिशन मोड में लागू करने के ट्रैक रिकॉर्ड से लगता है थोड़ा भरोसा भी है। फिर अभी इन्सेन्टिव्स पर भी बात होनी है। ऐसे में कंपनियां इलेक्ट्रिक कार की इस स्कीम के फाइनल पालिसी डॉक्यूमेंट का दिसंबर में आने का इंतज़ार करना चाहती हैं।

चर्चा है कि भेल और पावर ग्रिड कारपोरेशन इस स्कीम से जुड़ने के लिए अपनी सहमति दे चुकी हैं। BHEL जहाँ Electric Car और दूसरी गाड़ियां डवलप करना चाहती है वहीं पावर ग्रिड कारपोरेशन बैटरी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की इच्छुक है। Photo Credit:images.hgmsites.net

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