मिस्टर डिपेंडेबल Maruti Suzuki ने Corona क्राइसिस को ऐसे अपॉर्चुनिटी में बदला

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मिस्टर डिपेंडेबल Maruti Suzuki ने Corona Crisis को ऐसे अपॉर्चुनिटी में बदला । सुना होगा आपने Friend in Need Is Friend Indeed …। इसे आप भले ही कहावत बताकर किनारे लगा दें लेकिन यह ह्यूमन रिलेशन्स का महाकाव्य है जिसके जरिये मार्केटिंग माइंड्स कंज्यूमर साइकोलॉजी के उलझे समीकरणों को सुलझाने-समझने की कोशिश करते हैं। जिसे आप फ्रेंड इन नीड कहते हैं उसे मार्केटिंग वाले कस्टमर लॉयल्टी और ब्रांड ट्रस्ट कहते हैं। और…जब वक्त वाकई मुश्किल (जैसे कोरोना काल) होता है तो धाकड़ ब्रांड्स के लिये भी कस्टमर को जोड़े रखना बड़ा चैलेंज बन जाता है। बस यही ब्रांड ट्रस्ट अपना खेल दिखाता है। यदि अन-लॉकडाउन के दो महिने की Maruti Suzuki की सेल्स देखें तो ब्रांड ट्रस्ट का यह कॉन्सेप्ट बहुत आसानी से समझ आ जाता है।

Maruti Suzuki ने जून 2020 में 51274 पैसेंजर वेहीकल्स बेचे, जो जून 2019 में हुई 111014 यूनिट्स की सेल्स के मुकाबले 53.8 परसेंट कम थे।

स्प्रिंगबोर्ड: औैर ब्रांड ट्रस्ट किस तरह से …कम इनटू प्ले…इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है मारुति सुज़ुकी का सेल्स वॉल्यूम अगले ही महिने यानी जुलाई में जैसे स्प्रिंगबोर्ड पर सवार हो गया। देश में बिकने वाली 100 में से 50 गाडिय़ों पर Maruti का लोगो लगा होता है। जुलाई में कम्पनी की पैसेंजर वेहीकल सेल्स 1 लाख यूनिट्स के लेवल पर पहुंच गई जबकि जुलाई 2019 में कम्पनी ने 98210 गाडिय़ां ही बेची थीं। यानी अनलॉकडाउन के दो ही महिनों में Maruti Suzuki सेल्स डेफिसिट को खत्म कर ग्रोथ के रास्ते पर आगे बढ़ गई।

देश में 3 हजार से ज्यादा कस्टमर टचपॉइंट चलाने वाली Maruti की रिपोर्ट कहती है कि जून में उसने 90 हजार से ज्यादा गाडिय़ों की कस्टमर को डिलिवरी दी। और इंडस्ट्री के जानकार बताते हैं कि जुलाई में कम्पनी की रिटेल सेल्स यानी कस्टमर डिलिवरी सवा लाख यूनिट्स के आस-पास रहने का अंदाजा है।

यानी डिस्पैच (डीलर को बेची गई गाडिय़ां) हो या रिटेल सेल्स (कस्टमर डिलिवरी) दोनों ही मामलों में Maruti Suzuki बहुत तेजी से नॉर्मल होने की ओर बढ़ रही है जबकि कई कम्पनियां अभी अपने प्रॉडक्शन प्लान पर ही काम कर रही हैं।

अब सवाल यह है कि मारुति में आखिर ऐसी क्या खास बात है कि जब मुश्किल मार्केट में दूसरे पैसेंजर वेहीकल ब्रांड्स कस्टमर के लिये तरसने लगते हैं तब मारुति इसी कस्टमर के दम पर लीड ले लेती है।

कंज्यूमर साइकोलॉजी के जानकार कहते हैं कि जब मार्केट चैलेंजिंग होता है, इकोनॉमी पर दबाव होता है या राजनीतिक अस्थिरता होती है तो कस्टमर एक्सपेरिमेंट करने के बजाय सेफप्ले पर दांव लगाता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कि क्रिकेट के बड़े मैच में धुआंधार बॉलिंग हो रही हो और खिलाड़ी एक-के-बाद-एक आउट हो रहे हों तो कप्तान लो रिस्क वाले अपने सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी पर दांव लगाता है।

…बिल्कुल मिस्टर डिपेंडेबल (Mister Dependable MS Dhoni) की तलाश कार कस्टमर को मारुति तक ले आती है और जोड़े रखती है। और चैलेंजिंग दौर में कस्टमर का दूसरे ब्रांड्स से मारुति की ओर माइग्रेशन और भी तेज हो जाता है। यही कारण है कि ऐसे दौर में मारुति मार्केट शेयर के लिहाज से लीड बढ़ा लेती है। यहां तक कि 2019-20 के फॉलिंग मार्केट में भी कम्पनी अपना शेयर बरकरार रखने में कामयाब रही।

Financial YearMarket Share%
2014-15 45.00
2015-16 46.80
2016-17 47.3
2017-18 49.90
2018-19 51.26
2019-20 51.03
Data: Industry Sources

मारुति ब्रांड की सबसे बड़ी यूएसपी इसका वैल्यू फोर मनी और टाइमटेस्टेड होना है जिससे कस्टमर को खरीदने से लेकर चलाने तक के लिये पीस ऑफ माइंड का भरोसा मिलता है और इससे उसे मारुति के हक में फैसला करने में आसानी हो जाती है।

वैल्यू फोर मनी और टाइम टेस्टेड ब्रांड करेक्टर्स के साथ थर्ड जनरेशन मारुती कस्टमर्स की ज़रूरत के लिहाज़ से इवॉल्व होने के लिए मारुती ने एस्पिरेशन का जो तड़का लगाया था वह Nexa के रूप में बहुत कामयाब रहा और सिर्फ 5 साल में ही 11 लाख गाड़ियां बिक चुकी हैं।

मारुति ने हाल ही कहा कि वो अपने गुजरात प्लांट में शिफ्ट शुरू कर रही है क्योंकि मारुति सुज़ुकी की गाडिय़ों की डिमाड प्री-कोविड लेवल के 90 परसेंट तक पहुंच रही है।

कम्पनी के इस दावे से भी मिस्टर डिपेंडेबल का जो कॉन्सेप्ट कंज्यूमर साइकोलॉजी में रचा-बसा है वो सही साबित हो रहा है।