Lodgy से भी नहीं मिली Renault को राहत

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कम्पनी को Lodgy से वॉल्यूम टर्न अराउंड की उम्मीद थी लेकिन Innova और Ertiga के मुकाबले में पेश की गई Lodgy का वॉल्यूम बिल्ट अप होने से पहले से लगातार कमजोर पड़ रहा है। अब चूंकि मारुति, हुंडई, महिन्द्रा और टाटा के क्रॉसओवर मॉडल लॉन्च के लिये तैयार हैं ऐसे में Renault की आगे की राह बहुत मुश्किल होने वाली है।

कई साल की कोशिश और कई नाकामयाबियों के बाद 2012 में Duster के जरिये Renault भारत के कार बाजार में आखिरकार कामयाब रही। लेकिन इन तीन सालों में Renault भी Ford की तरह वन मॉडल कम्पनी ही साबित हो पाई है। Pulse, Scala, Fluence और Koleos अपने-अपने सैगमेंट में भी किसी गिनती में नहीं हैं। हाल के महिनों में Duster की सेल्स भी 3000 औसत से गिरकर 1400-1500 यूनिट्स पर आ गई है। 

Renaultडस्टर डिजास्टर: फ्रांस की कम्पनी Renault ने अपने रोमानियाई ब्रांड डासिया के पोर्टफोलियो से Duster को भारत में लॉन्च किया था और यह अपने कॉम्पेक्ट डिजायन और बढिय़ा हैंडलिंग के कारण खूब चला भी लेकिन इसमें बड़ा योगदान इस सैगमेंट में बाजार में दूसरे मॉडलों के नहीं होने का रहा। एक दौर ऐसा भी आया जब Duster की सेल्स मार्च 2013 में 6300 यूनिट्स के पीक लेवल पर पहुंच गई थी। इसके बाद डस्टर के ही सैगमेंट में जून 2013 में फोर्ड की Ecosport लॉन्च हुई और अगस्त में Duster का सेल्स वॉल्यूम मार्च के 6313 के मुकाबले आधे से भी ज्यादा गिरावट के साथ 2967 यूनिट्स रह गया।
इसके बाद से लगातार Duster एक लाख रुपये तक के ऑफर के साथ मुहैया रही है और कह सकते हैं कि कम्पनी ऑफर के जरिये Duster की सेल्स को पुश कर रही थी। मार्च 2014 में कम्पनी की कुल सेल्स 5464 यूनिट्स रही थी जिसमें Duster का योगदान 4494 यूनिट्स था लेकिन अगस्त में यह 3101 यूनिट्स ही रह गई। अप्रेल में कम्पनी ने एमपीवी सैगमेंट में Lodgy को लॉन्च किया है और इसके साथ ही Duster की सेल्स धड़ाम हो गई। अप्रेल में कम्पनी ने सिर्फ 1707 डस्टर बेचीं जबकि मई में डस्टर ऑलटाइम लो 1429 यूनिट्स के लेवल पर आ गई।
Lodgy ? कल: कम्पनी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि डस्टर के साथ इन चार सालों में किसी और मॉडल को खड़ा नहीं कर पाई। यहां तक कि Lodgy से कम्पनी जिस वॉल्यूम की उम्मीद लेकर चल रही थी वो भी पूरी नहीं हो रही है और Lodgy अप्रेल व मई में करीब शुरूआती बज़ के बावजूद 2 हजार यूनिट्स के लेवल को पार नहीं कर पाई।
पिछले साल अप्रेल में Renault ने कुल 3333 गाडिय़ां बेची थीं। जून में कम्पनी का सेल्स वॉल्यूम बढक़र 4277 यूनिट्स हो गया। दिसम्बर में 3956 गाडिय़ों की बिक्री हुई और मार्च में 3419 की। मार्च में कम्पनी ने 4353 गाडिय़ां बेचीं। अप्रेल में कम्पनी ने Lodgy को लॉन्च किया था लेकिन इसके बावजूद कुल डिस्पैच 4001 यूनिट्स के रहे और नया मॉडल Lodgy पोर्टफोलियो में शामिल होने के बावजूद मई में डिस्पैच घटकर पिछले साल मई के 3650 यूनिट्स से भी कम होकर 3601 यूनिट्स पर आ गये।
आने वाले महिनों में ऑटो इंडस्ट्री का फोकस यूवी सैगमेंट के मॉडलों पर है। इनमें कॉम्पेक्ट एसयूवी, एमपीवी, फुल एसयूवी और क्रॉसओवर मॉडल लॉन्च किये जायेंगे। यानि मुकाबला बहुत तगड़ा होगा। देश के दो सबसे बड़े पैसेंजर कार ब्रांड मारुति और ह्यूंदे पहली बार अर्बन एसयूवी सैगमेंट में कदम रख रहे हैं। महिन्द्रा की पूरी नई यूवी रेंज तैयार है। टाटा मोटर्स का ऑटो एक्स्पो में डिस्प्ले हेक्सा कॉन्सेप्ट पर आधारित क्रॉसओवर जनवरी में लॉन्च होना है। फिर होन्डा और जीएम इसी सैगमेंट में उतरेंगी।
यानि फोर्ड की तरह वन मॉडल कम्पनी बन रही रेनो के लिये आगे के महिने बहुत मुश्किल रहने की आशंका है। हालांकि कम्पनी Kwid के नाम से Alto के सैगमेंट में अपना पहला मॉडल सितम्बर में लॉन्च कर रही है लेकिन एक तो यह सैगमेंट लगातार कमजोर पड़ रहा है और दूसरा Renault का नेटवर्क बहुत सीमित है ऐेसे में Kwid से कम्पनी को बड़ा फायदा होता नजर नहीं आता।

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