यदि ऐसा हुआ तो Reliance Jio की तरह छा जायेंगी Electric car

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car battery technology2016 में दुनिया में सिर्फ बीस लाख Electric car बिक पाईं। जबकि कुल पैसेंजर वेहीकल करीब 8.5 करोड़ बिके। तो सवाल ये है कि Electric car अब तक इतनी कामयाब क्यों नहीं हो पाईं।

इसके तीन कारण हैं

-Electric car महंगी हैं

-Electric car बैटरी आमतौर पर 100 किलोमीटर ही चलती है

-Electric car बैटरी चार्ज होने में छह से आठ घंटे लगते हैं।

लेकिन इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का आंकलन है कि 2020 तक हर साल 90 लाख Electric car बिकने लगेंगी और 2025 तक इनकी सेल्स 7 करोड़ तक पहुंच सकती है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का यह अंदाजा अभी मौजूद बैटरी टेक्नोलॉजी और ईकोसिस्टम पर आधारित है।

लेकिन बैटरी टेक्नोलॉजी में एक क्रांतिकारी बदलाव की आहट सुनाई दे रही है जो कामयाब हुआ तो पूरे Electric car ईकोसिस्टम पर रिलायंस जिओ जैसा असर हो सकता है।

दरअसल अमेरिका की परड्यू यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों को Electric car की ऐसी बैटरी बनाने में कामयाबी हाथ लगी है जो यदि बाजार में आ जाती है तो फिर आपको कार या फिर फोन की बैटरी के चार्ज होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

इस मेम्ब्रेनलैस बैटरी को चार्ज होने में उतना ही समय लगेगा जितना आपको गाड़ी में पेट्रोल लेने मेें लगता है।
यानि Electric car का ट्रेंड बढऩे में चार्जिंग टाइम का बहुत बड़ा रोड़ा दूर हो सकता है।

यानि चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क खड़ा करने की कोई जरूरत नहीं नहीं रहेगी। 

इस बैटरी में फ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट्स का इस्तेमाल किया जायेगा जो डिस्चार्ज हो चुके बैटरी फ्लुइड में फिर से जान फूंक देंगे।

परड्यू यूनिवर्सिटी के प्रॉफेसर जॉन कुशमैन ने इस इनोवेटिव बैटरी को बाजार में लाने के लिय एलएफबैटरी के नाम से एक स्टार्टअप की शुरूआत की है।

Electric car में एक बैटरी होती है जिसकी एनर्जी से इलेक्ट्रिक मोटर चलती है जो गाड़ी के पहियों को चलाती है।

जब ये बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है तो फिर से चार्ज करने में छह से आठ घंटे लगते हैं। बैटरी को आप घर पर बिजली के पॉइंट से भी चार्ज कर सकते हैं लेकिन पेट्रोल पम्प की तरह जगह-जगह चार्जिंग स्टेशन बनाने पड़ते हैं जो बहुत महंगा काम है।

एलएफबैटरी ऐेसे सेंटरों का नेटवर्क बनाना चाहती है जहां इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों में पेट्रोल की तर्ज पर फ्लुइड इलेक्ट्रोलाइट्स भरे जायेंगे। डिस्चार्ज हो चुके इलेक्ट्रोलाइट को बैटरी से निकालने और नया इलेक्ट्रोलाइट भरने में उतना ही समय लगेगा जितना कि आपको पेट्रोल भरवाने में लगता है।

गाडिय़ों से निकाले गये डिस्चार्ज हो चुके इलेक्ट्रोलाइट को जमा कर फिर से चार्ज होने के लिये भेज दिया जायेगा। कुशमैन कहते हैं कि पेट्रोल पम्प पेट्रोल-डीजल-सीएनजी-एलपीजी की जगह पानी और एथेनॉल/मेथेनॉल का मिक्सचर बेचेंगे।

पेट्रोल पम्प पर जमा होने वाले डिस्चार्ज हो चुके फ्लुइट इलेक्ट्रोलाइट को फिर से सैंकड़ों बार इस्तेमाल के लिये तैयार किया जा सकता है।

कुशमैन के अनुसार इसके लिये वही नेटवर्क काम आ जायेगा जो अभी पेट्रोल/डीजल के लिये होता है जिसमें रिफायनरी, पाइपलाइन, रेल, टेंकर और पेट्रोल पम्प शामिल हैं। यानि Electric car चार्जिंग स्टेशन की तरह अलग से खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

एलएफबैटरी के को-फाउंडर माइक म्यूटरथीस कहते हैं कि चूूंकि इस फ्लो बैटरी में मेम्ब्रेन नहीं है इसलिये यह सस्ती भी होगी और इस बैटरी की लाइफ भी ज्यादा होगी।

अभी मौजूद ऐसी फ्लो बैटरी में मेम्ब्रेन होती है जो हर चार्जिंग के साथ पुरानी पड़ती जाती है जिससे चार्जिंग भी घटती है और बैटरी की लाइफ भी। मेम्ब्रेन के कारण बैटरी में आग लगने की घटनायें भी होती हैं।

अब यदि यह बैटरी मार्केट में आ पाती है तो सस्ती भी होगी, इसकी लाइफ भी ज्यादा होगी और इसे रीचार्ज करने में 2-5 मिनट ही लगेंगे। ऐेसे में कह सकते हैं कि Electric car ईकोसिस्टम रिलायंस जिओ जैसे डिसरप्शन यानि बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है।Photo Credit: Icebike

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