चीन में क्यों हो रहा है Hyundai की कारों का बायकॉट

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Hyundai china boycottचीन में साउद कोरिया की कम्पनी Hyundai को तगड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। Hyundai और इसकी सहयोगी कम्पनी Kia मोटर्स के खिलाफ चीन की सरकार द्वारा भडक़ाये गये विरोध के कारण अप्रेल में इन दोनों कम्पनियों की सेल्स धाराशायी हो गई और इन्हें सेल्स वॉल्यूम में 65 परसेंट का नुकसान उठाना पड़ा है। अब सवाल यह है कि चीन में ह्यूंदे और किया के खिलाफ यह नाराजगी क्यों पैदा हुई है? तो बता दें इसका कोई बिजनस नहीं बल्कि डिप्लोमेटिक यानि कूटनीतिक कारण है।

चीन की Hyundai और Kia मोटर्स के साथ नाराजगी की बड़ी वजह दक्षिण कोरिया में उत्तर कोरिया से हमले के खतरे को देखते हुये तैनात किया गया अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम थाड़ है।

वैसे तो यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम उत्तर कोरिया से होने वाले मिसाइल हमलों को रोकने के लिये तैनात किया गया है लेकिन यह चीन की मिसाइल कार्यवाहियों को भी भांप सकता है। इसीलिये चीन की सरकार ग्राहकों को कोरियाई प्रॉडक्ट्स खासकर कारों का बहिष्कार करने के लिये उकसा रही है।

अप्रेल में Hyundai ने चीन में 35009 गाडिय़ां बेचीं जो अप्रेल 2016 के मुकाबले 64 परसेंट कम है। वहीं Kia मोटर्स की सेल्स लगातार दूसरे महिने गिरते हुये 68 परसेंट के नुकसान के साथ 16050 यूनिट्स रह गई।

मार्च में भी ह्यूंदे और किया मोटर्स को चीन में अच्छा-खासा नुकसान उठाना पड़ा था।

हालांकि ऑटो इंडस्ट्री के जानकार Hyundai और किया की सेल्स में आई इस गिरावट को चीन में कमजोर पड़ रही कार सेल्स से जोडक़र देखते हैं। चायना पैसेंजर कार एसोसिएशन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रेल में कार, एसयूवी और एमपीवी की सेल्स 1.7 परसेंट गिरकर 16.90 लाख यूनिट्स रह गई। इसके अलावा एक कारण यह भी बताया जाता है कि ह्यूंदे और किया के चीन में पोर्टफोलियो में सेडान मॉडल बहुत हैं जबकि चीन में हाल के सालों में एसयूवी मॉडलों को दीवानगी तेजी से बढ़ी है और एसयूवी मॉडलों का पैसेंजर वेहीकल मार्केट में शेयर 50 परसेंट से भी ज्यादा हो गया है।

एसयूवी मॉडलों की सेल्स के लिहाज से भी Hyundai और Kia को बड़ा नुकसान हो रहा है क्योंकि चीन की देसी कम्पनियां बहुत सस्ते एसयूवी मॉडल बेचकर बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत किये जा रही हैं।

यदि चीन की सरकार कोरियाई कारों के विरोध की नीति छोड़ देती है और कस्टमर बहिष्कार करना बंद कर देते हैं तो भी मौजूदा मॉडलों और चीनी प्रॉडक्ट्स के मुकाबले महंगे होने के कारण Hyundai और Kia की सेल्स की समस्यायें आगे भी बनी रहेंगी।

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