हापुस आम के बदले आई Harley Davidson कहीं मोदी-ट्रम्प के रिश्तों को कर ना दे कड़वा

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alphonso mango Harley motorcycle

Alphonso mango के बदले आई Harley Davidson मोटरसाइकल Modi-Trump के रिश्तों की परीक्षा लेने जा रही है।

3 मई 2007 को भारत के हापुस और केसरी आम पहली बार अमेरिका की धरती पर पहुंचते हैं।

अगस्त 2009 में अमेरिका की Harley Davidson भारत में आ पहुंचती है।

आप कहेंगे आम (फल) और खास मोटरसाइकल ( Harley Davidson ) के बीच क्या रिश्ता हो सकता है।

लेकिन ये रिश्ता इतना गहरा है कि भारत और अमेरिका के डिप्लोमेटिक रिश्तों की गाड़ी को कभी भी ब्रेक लगा सकता है।

आम का 40 परसेंट प्रॉडक्शन भारत में होता है और हापुस (Alphonso) और केसरी जैसे रसीले आमों के दिवाने दुनियाभर में है। भारत 1988 से ही अमेरिका पर इनका एक्सपोर्ट करने की मंजूरी के लिये कूटनीतिक दबाव डालता रहा लेकिन फ्रूट फ्लाई आदि के संक्रमण का बहाना बनाकर अमेरिका ने अल्फोंसो मेंगो  के लिए अपने दरवाजे नहीं खोले।

दोनों देशों के बीच कई सालों की बातचीत के बाद जो समझौता हुआ उसके अनुसार भारत के आमों के लिये अमेरिका अपने दरवाजे खोलेगा और इसके बदले में अमेरिका की आईकॉनिक लीज़र बाइक Harley Davidson के भारत में बिकने के रास्ते से बैरिकेड हटाये जायेंगे।

लेकिन अब एक बार फिर Harley Davidson भारत और अमेरिका के डिप्लोमेटिक रिश्तों की गाड़ी को ब्रेक लगा सकती है।

“I just met with officials and workers from a great American company, Harley-Davidson. In fact, they proudly displayed five of their magnificent motorcycles, made in the USA, on the front lawn of the White House. And they wanted me to ride one, and I said, no, thank you,”  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के यूएस कांग्रेस के जॉइंट सैशन को सम्बोधित करते हुये यह बयान दिया।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने काम संभालने के कुछ दिनों बाद ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को फोन कर भारत को ट्रू फ्रेंड कहा था।

वैसे भी हाल के सालों में भारत और अमेरिका के डिप्लोमेटिक रिश्ते बहुत गहरे रहे हैं और आतंकवाद व चीन को साधने के लिये दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

लेकिन Harley Davidson एक बार फिर भारत-अमेरिका के रिश्तों के बीच आ रही है। वाइट हाउस नेशनल ट्रेड काउंसिल के डायरेक्टर पीटर नैवेरो ने वॉलस्ट्रीट जर्नल के एडिटर को लिखे लेटर में Harley Davidson को लेकर उसी बात को दोहराया जो दो महिने पहले राष्ट्रपति ट्रम्प ने कही थी। इस लेटर में कहा गया है कि “If India agrees to lower its tariffs on Harley Davidson motorcycles, Indian consumers will buy more Harleys and save less while Harley will sell more Harleys and invest more,”.

राष्ट्रवाद की लहर पर सवार होकर चुनाव जीते डोनाल्ड ट्रम्प फोर्ड और टोयोटा सहित उन ऑटो कम्पनियों को शुरूआत से ही निशाने पर ले चुके हैं जो कम लागत के कारण दूसरे देशों में गाड़ी बनाकर अमेरिका में बेचती हैं।

भारत में ऑटो मैन्यूफैक्चरर्स के लॉबी ग्रुप सियाम की वेबसाइट पर दिये गये स्लैब के अनुसार 800 सीसी के छोटे इंजन वाले टू-व्हीलर का सीबीयू (कम्प्लीटली बिल्ट यूनिट) यानि पूरी तरह बनी बनाई गाड़ी इम्पोर्ट करने पर 60 परसेंट इम्पोर्ट ड्यूटी लगती है जबकि 800 सीसी और इससे बड़े इंजन वाले टू-व्हीलर के सीबीयू इम्पोर्ट पर 75 परसेंट ड्यूटी लगती है।

ट्रम्प के बयान और नैवेरो के लेटर से साफ है कि Harley Davidson के जरिये भारत पर दबाव बढ़ाना चाहते हैं।

यदि डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में झुकते हुये भारत Harley Davidson बाइक्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाता है तो फिर ऐसी ही मांग ब्रिटेन की ट्रायम्फ और इटली की डुकाती सहित वो दर्जन भर कम्पनियां भी कर सकती हैं जो भारत में प्रीमियम-लक्जरी बाइक का सीबीयू इम्पोर्ट करती हैं। होन्डा, सुजुकी, यामहा, कावासाकी, इंडियन, एमवी अगुस्ता आदि हेवीवेट सुपरस्पोर्ट्स बाइक्स को भारत में सीबीयू इम्पोर्ट कर बेचती हैं।

भारत और ईयू के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की बातचीत फिलहाल रुकी हुई है लेकिन इसमें विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा यूरोप की कार कम्पनियों द्वारा लक्जरी कारों पर इम्पोर्ट ड्यूटी को घटाने का दबाव बनाना था। यूरोप की कम्पनियों के इस दबाव को देखते हुये जापान की कार कम्पनियों ने भी लेवल प्लेइंग फील्ड की मांग कर दी थी।

यानि Harley Davidson भले ही डोनाल्ड ट्रम्प के लिये भावनाओं का सवाल हो लेकिन यदि भारत उनकी मांग को खारिज करता है तो इन दो स्ट्रेटेजिक पार्टनर देशों के बीच डिप्लोमेटिक वॉर की शुरूआत हो सकती है।

जिस तरह से ट्रम्प प्रशासन ने भारतीय आईटी प्रॉफेशनल्स को वीजा के नियमों में सख्ती की है उसे देखते हुये हो यह भी सकता है कि हार्ले डेविडसन को लेकर भारत पर दबाव बढ़ाने के लिये वह हापुस आम को फिर से ब्लैक लिस्ट कर दे यानि भारत और अमेरिका के बीच फिर खिंच सकती है आम की दीवार। 

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