शहर के ट्रेफिक में 33 लाख किलोमीटर चल चुकी गूगल Driverless Car

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google driverless carगूगल की Driverless Car में अब ड्राइवर की सी काबिलियत नजर आने लगी है। अपनी लेन मेंं सामने से कोई जानवर आ जाये तो हम गाड़ी को गलत लेन में मोड़ कर बचने की कोशिश करते हैं गूगल की Driverless Car भी अब ऐसा ही करती है। यानि गूगल की Driverless Car अब इंसान की तरह सोचने लगी है।
गूगल ने 2009 में Driverless Car पर काम शुरू किया था और कम्पनी ने कहा है कि खुली सडक़ पर ये कारें 20 लाख मील यानि 33 लाख किलोमीटर चल चुकी हैं और हर सप्ताह कोई 40 हजार किलोमीटर चल रही हैं।
Driverless Car की खुली सडक़ पर आम ट्रेफिक के बीच टेस्टिंग की शुरूआत गूगल ने ही की थी और इसके बाद से करीब दर्जन भर कम्पनियां अमेरिका के कुछ राज्यों की आम सडक़ों पर अपनी ड्राइवरलैस टेक्नोलॉजी से लैस कारों को परख रही हैं।
टोयोटा, होन्डा, निसान, वोल्वो, टेस्ला आदि कई कम्पनियां अपनी गाडिय़ों में धीरे-धीरे ड्राइव असिस्ट फीचर जैसे ऑटो पायलट, ऑटोमेटिक एमरजेंसी बेकिंग आदि को शामिल करने लगी हैं।
टोयोटा, निसान और होन्डा 2020 में टोकियो मेें होने वाले ओलम्पिक खेलों के दौरान Driverless Car का फुल डेमो करना चाहती हैं। अभी कुछ महिने पहले जापान में आयोजित एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में विदेशी मेहमानों के लिये निसान ने अपनी Driverless Car को तैनात किया था।
बाकी कम्पनियों की कारों में जहां अभी ड्राइवर का मौजूद होना जरूरी है वहीं गूगल की कोशिश ऐसी Driverless Car तैयार करने की है जिसमें किसी भी परिस्थिति में ड्राइवर की जरूरत नहीं हो। कम्पनी ने कहा है कि 2020 तक ऐसी कार तैयार हो सकती है।
हाल के महिने में टेस्ला की ऑटो पायलट मोड में या कहें तो Driverless Car के दर्जन भर हादसे सामने आये हैं जिनमें कार के कैमरे या तो सामने की सडक़ या गाड़ी को पहचानने में चूक कर गये और गाड़ी टकरा गई। हालांकि कम्पनी ने कहा है कि ऑटोपायलट सिस्टम के साथ ड्राइवर का स्टीयरिंग व्हील पर सतर्क होना जरूरी है लेकिन ज्यादातर हादसों में गाड़ी को ऑटोपायलट मोड में डालकर ड्राइवर कुछ और करने लगा।
टेस्ला ने कहा है कि पिछले अक्टूबर से ऑटोपायलट मोड में उसकी कारें 10 करोड़ मील चल चुकी हैं।
गूगल के सेल्फ ड्राइविंग टेक्नोलॉजी के प्रमुख दमित्री डोलगोव के अनुसार हाईवे पर ऑटोपायलट मोड में गाड़ी चलाना आसान है जबकि शहर के ट्रेफिक में कौन कब कहां से सामने आ जाये, कहां जाम लग जाये, कहां जानबूझकर रॉन्ग साइड काटनी पड़ जाये कोई नहीं जानता। ऐसे में बहुत गहरी समझ होनी चाहिये। गूगल की सेल्फ ड्राइव टेक्नोलॉजी से लैस Driverless Car सडक़ पर व्हीलचेअर को पहचान गई, स्ट्रोलीबैग को भांप गई और यह भी समझ गई कि आगे कोई कार यू टर्न ले रही है। वे कहते हैं कि अब हर बार यह बिल्कुल नये हालात से पहले से बेहतर तरीके से रिएक्ट करती है।
लिडार सेंसर और कैमरा से लैस यह कार यह भी समझने लगी है कि सडक़ पर बच्चे और साइकल सवार की हरकत का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल। दरअसल कार का ड्राइविंग सिस्टम ऐसी सभी संभावनाओं का हिसाब लगाता है और एल्गो के आधार पर यह फैसला किया जाता है कि कार ऐसे हालातों से किस तरह बचकर निकलेगी।

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