Goodyear का Innovative Tyre करेगा पॉल्यूशन पर वार, बनायेगा ऑक्सीजन

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goodyear oxygene tyreएक ओर गलोबल वॉमिंग के लिये गाडिय़ों से निकलते धुऐं को जिम्मेदार माना जाता रहा है दूसरी ओर गाडिय़ों के टायरों पर अब तक ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई। लेकिन दुनिया की दिग्गज टायर कम्पनी Goodyear ने Tyre से होने वाले पॉल्यूशन का ईलाज तलाश करने का दावा किया है।

Goodyear ने व्हील के लिये खास तरह की कवरिंग का कॉन्सेप्ट तैयार किया है जो कार्बन डाई ऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदल देती है। इसके लिये व्हील कवरिंग को मॉस से बनाया गया है जो पौधों की फोटोसिंथेसिस प्रक्रिया की तरह काम करता है।

मॉस दरअसल छोटे बिना फूल वाले पौधे होते हैं जो बड़े गुच्छे की तरह होते हैं और स्पंज की तरह पानी को सोख लेते हैं।

Oxygene नाम के ये टायर सडक़ की नमी को सोखकर पौधों तक पहुंचाते हैं। मॉस अपने वजन से 26 गुना तक पानी सोख सकते हैं। सडक़ की नमी मॉस के पौधों को सींचने में इस्तेमाल होती है जो सूरज की रोशनी लेकर बढ़ते हैं और हवा को साफ करते हैं।

प्रकाश संस्लेषण की प्रक्रिया में बनी एनर्जी को गाड़ी के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और इलेक्टॉनिक्स में इस्तेमाल किया जा सकता है।

जेनेवा में चल रहे इंटरनेशनल मोटर शो के मौके पर Goodyear ने इन Oxygene टायरों के कॉन्सेप्ट को डिस्प्ले किया है।

अमेरिका में आहायो की टायर कम्पनी Goodyear का दावा है कि यदि किसी शहर में 25 लाख गाडिय़ां हों तो इस तरह के टायरों से एक साल में 4 हजार टन कार्बन डाई ऑक्साइड को खत्म किया जा सकता है और 3 हजार टन ऑक्सीजन भी बनेगी।

गुडईयर के अधिकारी क्रिस डेलानी के अनुसार Goodyear Oxygene की साइडवॉल मॉस के पौधों से बनेेगी जबकि बाकी पूरा टायर रीसाइकल्ड टायरों के पावडर से 3डी प्रिंटिंग के जरिये बनाया जायेगा।

अभी दुनिया में गाडिय़ों के लिये न्यूमेटिक यानी हवा के दबाव से फूलने वाले टायरों का चलन है लेकिन नया दौर नॉन न्यूमेटिक टायरों का है जिनमें हवा नहीं भरी होती। कम्पनी का दावा है कि नॉन न्यूमेटिक टायर ज्यादा टिकाऊ होते हैं।

गुडईयर के अनुसार ऑक्सीजीन टायरों में ओपन ट्रेड (ग्रिप) का इस्तेमाल किया गया है जो सडक़ से पानी को सोखते हैं ऐसे में नमी वाली सडक़ पर भी टायर की ग्रिप बनी रहती है। इस तरह सडक़ से सोखा गया पानी सूरज की रोशनी और कार्बन डाई ऑक्साइड के साथ क्रिया कर फोटोसिंथेसिस यानी प्रकाश संस्लेषण की विधि से एनर्जी और ऑक्सीजन बनाना है। इस तरह बनी एनर्जी को गाड़ी के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को चलाने के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है।

कम्पनी का दावा है कि इस प्रक्रिया से इतनी एनर्जी पैदा होती है कि एक टायर से बनी एनर्जी गाड़ी के आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम, सेंसर और लाइट्स को चलाने के लिये काफी होगी।

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