Emission Scandal: फोक्सवैगन पर अमेरिका में 18 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना

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volkswagen emission scandal in australiaEmission Scandal की सुनवाई करते हुये यूएस डिस्ट्रिक्ट जज ने दुनिया की सबसे बड़ी ऑटो कम्पनी Volkswagen पर 2.8 अरब डॉलर यानि करीब 18200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। Volkswagen पर जानबूझकर एमिशन टेस्ट को चकमा देने वाले सॉफ्टवेयर से लैस डीजन इंजन बनाने का आरोप है।

जज ने कम्पनी और अमेरिकी सरकार के बीच हुये 4.3 अरब डॉलर के समझौते को मंजूर करने के साथ ही इस समझौते को संघीय निगरानी में लागू करने के प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया।

Volkswagen और अमेरिकी सरकार के बीच Emission Scandal एमिशन स्कैंडल मामले में जनवरी में 4.3 अरब डॉलर का समझौता हुआ था।
यूएस डिस्ट्रिक्ट जज सीन कोक्स ने कम्पनी को 3 साल तक निगरानी में रहने का आदेश भी दिया। जज ने कहा कि हालांकि Volkswagen 10 साल तक ज्यादा धुआं छोडऩे वाले डीजल इंजन लगाती रही और उसने इन इंजनों से 5.90 लाख गाडिय़ां बेची फिर भी 280 करोड़ डॉलर जुर्माना काफी है। उन्होंने कहा कि फोक्सवैगन के मैनेजमेंट ने जानबूझकर बहुत बड़े पैमाने पर फ्रॉड (धोखाधड़ी) की और इसमें Volkswagen का सुपरवाइजरी बोर्ड भी शामिल रहा।

डेट्रॉयटन्यूज़ की खबर के अनुसार अमेरिकी सरकार के वकील ने एक महिने पहले कोर्ट में कहा था कि हालांकि अमेरिकी कानून में 17 से 34 अरब डॉलर तक के जुर्माने का प्रावधान है फिर भी जांच में Volkswagen के सहयोग को देखते हुये 4.3 अरब डॉलर का जुर्माना काफी है।

Volkswagen ने डीजल गाडिय़ों के यूजर और डीलरों को मुआवजे के लिये 17 अरब डॉलर का बजट मंजूर किया है।

जज सीन कोक्स ने कहा कि मैनेजमेंट की नाकामी और लालच से Volkswagen को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। यह फैसला सुनाते हुये जज ने प्रभावित गाड़ी मालिकों के वकीलों की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि कम्पनी पर सिविल के बजाय क्रिमिनल केस चलना चाहिये।

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अमेरिका के असिस्टेंट अटॉर्नी नील जॉन ने कहा कि चीटिंग सॉफ्टवेयर से लैस डीजल इंजन के दायरे में आ रहे 95 परसेंट गाड़ी मालिकों ने सिविल समझौते को मंजूर किया है। इसके तहत उनके पास अपनी गाड़ी कम्पनी को वापस लौटाने के अलावा लीज़ एग्रीमेंट तोडऩे का भी विकल्प है।

Emission Scandal 2005 में तब शुरू हुआ जब Volkswagen ने अमेरिकी एमिशन कानूनों की पालना करने वाला डीजल इंजन लॉन्च किया। इस डीजल इंजन में खास सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया जो लैब टेस्टिंग के समय एक्टिव होकर एमिशन को कम दिखाता जबकि ओन रोड ड्राइविंग के समय अपने आप बंद हो जाता। जांच में सामने आया कि Volkswagen की इस डीजल इंजन से लैस गाडिय़ां ओन रोड ड्राइविंग के दौरान तय मानकों से कई गुना पॉल्यूशन फैलाती थी।

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