Emission Scandal : फोक्सवैगन ने भारत में भी किया था Cheating Software का इस्तेमाल

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volkswagen emission scandal2016 में Volkswagen ने वो हासिल कर लिया जिसका उसे कई साल से इंतजार था। पिछले साल जर्मन कम्पनी Volkswagen 1.03 करोड़ गाडिय़ां बेचकर टोयोटा को बेदखल कर दुनिया की सबसे बड़ी कार कम्पनी बन गई। यह कामयाबी इसलिये भी बहुत बड़ी है क्योंकि Volkswagen दुनियाभर के देशों में डीजल Emission Scandal से घिरी है और उस पर Emission Testing में फर्जीवाड़ा करने के मामले अमेरिका, यूरोप, साउद कोरिया और यहां तक कि भारत में भी चल रहे हैं। कम्पनी के दावे के उलट एआरएआई द्वारा की गई सरकारी जांच में यह बात साबित हुई है कि फोक्सवैगन ने Emission Scandal के लिये भारत में भी उसी तरह के Cheating Software का इस्तेमाल किया जिस तरह के Defeat Device चीटिंग सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के आरोप उस पर अमेरिका और यूरोप में साबित हुये हैं।
भारत सरकार के हेवी इंडस्ट्रीज विभाग और देश की ऑटो इंडस्ट्री द्वारा मिलकर पुणे में स्थापित की गई रिसर्च लैब एआरएआई (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसियेशन ऑफ इंडिया) जो कि भारत में फोक्सवैगन Emission Scandal की जांच कर रही थी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कम्पनी ने यहां भी Emission Testing को चकमा देने के लिये Defeat Device जैसे ही सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया।

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Defeat Device एक स्मार्ट सॉफ्टवेयर है जो लैब में एमिशन टेस्ट के दौरान एक्टिव होकर इंजन को इस तरह से कंट्रोल करता है जिससे एमिशन तय मानकों जितने ही आते हैं। लेकिन गाड़ी सडक़ पर चलने की स्थिति में यह सॉफ्टवेयर बंद रहता है जिससे गाड़ी तय मानकों 40 गुना तक ज्यादा प्रदूषण करती हैं।
सितम्बर 2015 में Emission Scandal के सामने आने के बाद कम्पनी को फोक्सवैगन, ऑडी और स्कोडा ब्रांड की पूरी दुनिया से 1.10 करोड़ डीजल गाडिय़ों को रीकॉल करना पड़ा था और इसी के तहत भारत में फोक्सवैगन को इन्हीं तीनों ब्रांड्स की 3.25 लाख डीजल गाडिय़ों को वापस बुलाने की घोषणा करनी पड़ी थी।
ऑनलाइन पोर्टल लाइवमिंट को दिये इंटरव्यू में आईएआरआई की डायरेक्टर रश्मि उर्ध्वरेशे ने कहा कि इन गाडिय़ों में एक सॉफ्टवेयर है जिसे कम्पनी ने खुद कहा है कि ग्लोबल रिकॉल के तहत इसे भारत में भी बदला जायेगा। ऐसे में फोक्सवैगन के भारत में बिके मॉडलों में बदलाव होगा। यह सॉफ्टवेयर कम्पनी द्वारा अमेरिका में इस्तेमाल किये गये डिफीट डिवाइस चीटिंग सॉफ्टवेयर का डेरिवेटिव (वर्जन) है। चूंकि फोक्सवैगन को भारत में अलग एमिशन मानकों को पास करना था इसलिये उसने यहां डिफीट डिवाइस की जगह उस पर आधारित वैसे ही लेकिन दूसरे सॉफ्टवेयर का उपयोग किया।
भारत में Emission Scandal सामने आने के बाद हेवी इंडस्ट्रीज एंड पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज विभाग के मंत्री अनंत गीते ने इसे *’well thought-out crime’* यानि जानबूझकर पूरे षडयंत्र के साथ किया गया अपराध तक कहा था। लेकिन कम्पनी ने बार-बार एक ही बात को दोहराया है कि उसने भारत में एमिशन टेस्टिंग को चकमा देने के लिये Defeat Device का इस्तेमाल नहीं किया। लेकिन अब एआरएआई की जांच में फोक्सवैगन का फर्जीवाड़ा साबित हो रहा है।
अमेरिका में कम्पनी ने इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल ई189 सीरिज के 2 लीटर डीजल इंजन से लैस मॉडलों में किया था लेकिन भारत में Cheating Software के डेरिवेटिव को 1.2, 1.5, 1.6 और 2.0 लीटर डीजल इंजन में लगाया गया ताकि ये इंजन भारत के एमिशन मानकों पर खरे उतर सकें।
भारत मेें Emission Scandal सामने आने के बाद फोक्सवैगन ग्रुप ने साल 2008 से नवम्बर 2015 के बीच बनी उन 198500 फोक्सवैगन, 88700 स्कोडा और 36500 ऑडी कारों को रीकॉल किया था जिनमें ई189 सीरिज के इंजन का इस्तेमाल किया गया था।
फिलहाल इन कारों के रीकॉल का काम चल रहा है और कम्पनी हर मॉडल को एआरएआई से नये सिरे से सर्टिफाई करवा रही है। उर्ध्वरेशे के अनुसार अगले एक महिने में फोक्सवैगन की गाडिय़ों के वैलिडेशन और वेरिफिकेशन का काम पूरा हो जायेगा। कम्पनी ने फोक्सवैगन, ऑडी और स्कोडा के जिन भी मॉडलों में ई189 इंजन लगाया करीब-करीब सभी में यह Cheating Software पाया गया है।
उर्ध्वरेशे के अनुसार फोक्सवैगन Emission Scandal जैसे मामलों को रोकने के लिये भारत में लैब के बजाय ऑन रोड एमिशन टेस्टिंग की जानी चाहिये। Photo Credit : Manoramaonline

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