Driverless Car से भी हो रहे हैं एक्सीडेंट

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केलिफॉर्निया की सडक़ों पर करीब 50 Driverless Car की टेस्टिंग हो रही है और सितम्बर से अब तक चार एक्सीडेंट हो चुके हैं। केलिफॉर्निया प्रशासन ने सितम्बर में Driverless Car की आम सडक़ों पर टेस्टिंग के लिये परमिट देने की शुरूआत की थी।
एसोसियेटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दो हादसे तब हुये जब कारों का कंट्रोल इनबोर्ड कम्प्यूटर के हाथ में था जबकि दो हादसे तब हुये जब ड्राइवर गाड़ी चला रहा था। नियमों के अनुसार ड्राइवरलैस मोड में भी ड्राइवर का गाड़ी में मौजूद रहना जरूरी है ताकि जरूरत पडऩे पर वह पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले सके।
इन चार में से तीन एक्सीडेंट सेंसर और कैमरा से लैस Google Car के साथ हुये जबकि चौथे हादसे में कम्पोनेंट सप्लायर कम्पनी डेल्फी ऑटोमोटिव की Driverless Car शामिल थी। हालांकि गूगल और डेल्फी दोनों का दावा है कि हादसों में गलती उनकी Driverless Car की नहीं थी। वैसे भी हादसे बहुत मामूली थे।
केलिफॉर्निया में सितम्बर से हर तरह के सडक़ हादसे की रिपोर्ट डिपार्टमेंट ऑफ मोटरव्हीकल को देना अनिवार्य कर दिया गया है। डिपार्टमेंट ने कहा है कि अब तक Driverless Car से एक्सीडेंट के चार मामले दर्ज हो चुके हैं।
मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के हवाले से एसोसियेटेड प्रेस में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि चारों हादसों के समय कार की रफ्तार 16 किमी से कम थी और दो सेल्फ ड्राइविंग मोड पर थीं।
गूगल और डेल्फी के अलावा पांच अन्य कम्पनियां अपनी Driverless Car की केलिफॉर्निया की आम सडक़ों पर टेस्टिंग कर रही हैं और इनकी किसी कार से हादसा होने की खबर नहीं है। केलिफॉर्निया में कुल 48 Driverless Car को अब तक रोड टेस्टिंग का लायसेंस दिया जा चुका है।
कंज्यूमर वॉचडॉग नाम की संस्था के प्रॉजेक्ट डायरेक्टर जॉन सिम्पसन के अनुसार गूगल का लक्ष्य बिना स्टीयरिंग व्हील और पैडल की कार डवलप करने का है। इसका सीधा मतलब हुआ कि यदि कार के कंट्रोल सिस्टम में गड़बड़ी आ जाती है तो इंसान उसका कंट्रोल अपने हाथ में नहीं ले पायेगा। ऐसे में बेहतर है कि इस टेक्नोलॉजी से जुड़े हर छोटे से छोटे हादसे की खबर आम जनता को दी जाये ताकि लोगों को यह पता चल सके कि आखिर हो क्या रहा है।
कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी में इस टेक्नोलॉजी के रिसर्चर राज राजकुमार के अनुसार अभी प्राथमिकता Driverless Car को गंभीर हादसों से बचना सिखाने की है। इससे टेक्नोलॉजी की आमजन और राजनीतिक नेतृत्व में स्वीकार्यता बढ़ेगी।

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