कंज्यूमर कोर्ट ने कहा Hero Ignitor का पैसा रिफंड करे Hero Motocorp

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ignitor bikeबैंगलुरू के एक कंज्यूमर कोर्ट ने Hero Motocorp को बाइक की कीमत कस्टमर को रिफंड करने का आदेश दिया है। इस कस्टमर ने आरोप लगाया था कि कम्पनी की डीलरशिप के सेल्समैन और ऑनलाइन एडवरटाइजमेंट में जिस मायलेज का दावा किया गया था वो रियल लाइफ में नहीं मिल रहा है। कोर्ट ने Hero Motocorp को बाइक वापस लेकर प्राइस रिफंड करने और कोर्ट खर्च के हर्जाने के रूप में 10 हजार रुपये भी देने का फैसला सुनाया है।

शिकायत में कहा गया कि बैंगलुरू के मंजूनाथ आर नारगुंड ने 30 जनवरी को 125 सीसी बाइक Hero Ignitor कुल 74796 रुपये का पेमेंट कर खरीदी थी। डीलरशिप के सेल्समैन ने उसे 60 किमी के मायलेज का वायदा किया था और ऐसा ही दावा Hero Motocorp अपने ऑनलाइन एडवरटाइजमेंट्स में भी कर रही थी।

लेकिन कुछ ही दिन में नारगुंड को अहसास हुआ कि Hero Ignitor 35 किमी से भी कम का मायलेज दे रही है। उन्होंने यह बात शोरूम के टेक्निशियन को बताई तो उसने भरोसा दिया कि दूसरी सर्विस के बाद यह 60 किमी का मायलेज देने लगेगी। लेकिन दूसरी सर्विस के बाद मायलेज और घट गया।

इसे देखते हुये कस्टमर नारगुंड ने मामले की शिकायत Hero Motocorp को की तो कम्पनी ने Hero Ignitor का मायलेज सुधारने के लिये कुछ काम भी किया। हालांकि मायलेज में थोड़ा बहुत सुधार भी हुआ लेकिन बाइक में इंजन नॉइस सहित दूसरी समस्यायें आने लगीं।

आखिरकार 11 महिने बाद कस्टमर ने Hero Motocorp को लिखा कि उसे 74796 रुपये जो उसने बाइक खरीदने के लिये हीरो मोटोकोर्प को पेमेंट किया वो लौटाया जाये। लेकिन कम्पनी ने उनकी यह मांग खारिज़ कर दी।

इसके बाद मंजूनाथ आर नारगुंड ने बैंगलुरू के डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कोर्ट में Hero Motocorp और उसके डीलर मैजेस्टिक मोबाइक्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। जहां यूजर ने बाइक में गड़बडिय़ों के बारे में बताया वहीं कम्पनी के वकील ने शिकायतकर्ता की राइडिंग स्किल्स और शहर के ट्रेफिक के हालातों को इसके लिये जिम्मेदार ठहराया।

कोर्ट में यह मामला 3 साल 10 महिने तक चला और फैसले में कोर्ट ने कहा कि Hero Motocorp मायलेज सहित अपने दावे को साबित करने में नाकामयाब रही है। 

21 दिसम्बर को सुनाये आदेश में कोर्ट ने शिकायतकर्ता मंजूनाथ आर नारगुंड से Hero Ignitor बाइक वापस लेकर उसे 74796 रुपये का वो अमाउंट रिफंड करने को कहा जिसका उसने यह बाइक खरीदने के लिये डीलर को पेमेंट किया था। साथ ही कानूनी खर्च के पेटे 10 हजार रुपये का हर्जाना देने का भी आदेश दिया।

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