Tata Motors और Volkswagen की पार्टनरशिप पर संकट के बादल

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VolkswagenTata Motors और Volkswagen के बीच जेनेवा मोटर शो के दौरान मिलकर प्रॉडक्ट डवलपमेंट के लिये हुई पार्टनरशिप खटाई में पडऩे की खबर है और रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह समझौता खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। Volkswagen ग्रुप ने Tata Motors के साथ हुई इस पार्टनरशिप को आगे के लिये स्कोडा को चुना था लेकिन प्लेटफॉर्म के चुनाव और बिजनस की व्यावहारिकता को लेकर दोनों में सहमति नहीं बन पा रही है ऐसे में यह समझौत रद्द हो सकता है। शुरूआती समझौते में दरअसल Tata Motors के नेक्स्ट जेनरेशन एडवांस्ड मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म (Advanced Modular Platform) AMP पर अपनी-अपनी जरूरतों के हिसाब से प्रॉडक्ट रेंज तैयार कर टाटा और स्कोडा ब्रांड के तहत भारत और गलोबल मार्केट में गाडिय़ां बेची जानी थीं।

ऑटोकारप्रो की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कोडा की टीम को Tata Motors का यह एएमपी प्लेटफॉर्म भारी निवेश की जरूरत का देखते हुये ज्यादा व्यावहारिक नहीं लगा। रिपोर्ट में आगे कहा गया कि स्कोडा की टीम ने ही Volkswagen के मैनेजमेंट के सामने यह बात रखी कि Tata Motors के एएमपी के बजाय फोक्सवैगन के ही एमक्यूबी-ए प्लेटफॉर्म पर भारत के लिये प्रॉडक्ट डवलप करना ज्यादा बेहतर रहेगा और इसे ही पार्टनरशिप का कॉमन प्लेटफॉर्म बनाया जाना चाहिये।

Volkswagen ग्रुप के एमक्यूबी-बी प्लेटफॉर्म पर डवलप किये गये मॉडल फोक्सवैगन तिगुआन, स्कोडा ऑक्टाविया, स्कोडा सुपर्ब और ऑडी ए4 भारत में बिक रहे हैं लेकिन इनमें लोकल कम्पोनेंट बहुत थोड़े हंै। ऐसे में एमक्यूबी-ए प्लेटफॉर्म में भारत के मार्केट के लिये बदलाव करने पर बड़े निवेश की जरूरत के चलते स्कोडा इसे पहले ही ठंड बस्ते में डाल चुकी है।

लेकिन अब स्कोडा की टीम का मानना है कि Tata Motors के एएमपी प्लेटफॉर्म के बजाय फोक्सवैगन के एमक्यूबी-ए को भारत की जरूरतों के लिये ढालना बेहतर रहेगा और इस पर खर्च भी कम आयेगा।

दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमेकर Volkswagen ग्रुप के लिये भारत का बाजार बहुत मुश्किल साबित हो रहा है। दस साल की मौजूदगी के बावजूद फोक्सवैगन ब्रांड की महिने में 4 हजार गाडियां ही बिकती हैं वही स्कोडा भी 1200-1300 यूनिट्स ही बेच पाती है। हालांकि फोक्सवैगन ग्रुप का भारत में मौजूद तीसरा ब्रांड ऑडी बहुत कामयाब है और लक्जरी सैगमेंट में मर्सीडीज और बीएमडब्ल्यू के साथ बारी-बारी से पहले पायदान पर काबिज होती रही है।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि फोक्सवैगन को लगता है कि Tata Motors के एएमपी के बजाय अपने एमक्यूबी प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाना ज्यादा ठीक रहेगा क्योंकि इससे उसके पास नई मॉडल रेंज डवलप करने की सहूलियत रहेगी।
माना जा रहा है कि यदि यह पार्टनरशिप खत्म होती है तो फोक्सवैगन और स्कोडा के लिये बड़ा झटका साबित होगी क्योंकि उन्हें नये सिरे से भारत के लिये प्लान और स्ट्रेटेजी तैयार करनी होगी। इन दोनों कम्पनियों की बड़ी दिक्कत यह भी है कि उनके भारत में बिक रहे मॉडल ज्यादा फेज़आउट हो चुके पीक्यू25 प्लेटफॉर्म पर बने हैं ऐेसे में उनके लिये न्यू जेनरेशन प्रॉडक्ट रेंज लॉन्च करना बहुत जरूरी हो गया है।

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि Tata Motors के लिये भी एएमपी को खुद डवलप करना बहुत महंगा साबित होगा। फिर सीमित वॉल्यूम के चलते यह निवेश ज्यादा व्यावहारिक भी नहीं होगा। हालांकि यदि इस प्लेटफॉर्म को मिलकर डवलप किया जाये औ टाटा, फोक्सवैगन और स्कोडा तीनों ब्रांड इस पर आधारित प्रॉडक्ट लॉन्च करें तो एक साल में 7 लाख गाडिय़ां बेच सकते हैं जिससे इस प्लेटफॉर्म की वायबिलिटी बेहतर हो सकती है।

एएमपी पर आधारित Tata Motors की पहली प्रीमियम हैचबैक एक्स451 के नाम से डवलप हो रही है जो 2019 में बाजार में आयेगी। इस पर कम्पनी क्रॉसओवर सेडान और क्रेटा जैसी एसयूवी भी डवलप करना चाहती है।

अभी फरवरी में ही टाटा मोटर्स ने कहा था कि वह 2018 तक अपने पैसेंजर वेहीकल प्लेटफॉर्म 6 से घटाकर 2 कर देगी ताकि उसके लिये एएमपी पर आधारित मॉडल लॉन्च करना आसान हो जाये।

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