फोर्ड, निसान और टोयोटा पर CCI ने Spare Parts मामले में लगाया जुर्माना

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Spare Parts Competition Commission

कम्पीटिशन अपीलेट ट्रिब्यूनल यानि COMPAT ने फोर्ड, टोयोटा किर्लोस्कर और निसान को Spare Parts मार्केट में अनफेयर प्रेक्टिस यानि गलत तरीके से काम करने का दोषी पाया है। अपने मौखिक आदेश में कॉम्पेट ने इन कम्पनियों पर Spare Parts बिजनस के टर्नओवर के 2 परसेंट के बराबर जुर्माना लगाने का फैसला सुनाया है। कॉम्पेट के इस फैसले को कम्पनियों के खिलाफ थोड़ी राहत माना जा रहा है क्योंकि अगस्त 2014 में Competition Commission of India (कम्पीटिशन कमिशन ऑफ इंडिया) यानि CCI ने इन कम्पनियों पर कुल टर्नओवर के 2 परसेंट के बराबर जुर्माना लगाया था। जिसे कॉम्पेट ने थोड़ा सुधारकर कुल टर्नओवर के बजाय Spare Parts बिजनस के टर्नओवर पर लगाया है। 

कॉम्पेट ने फोर्ड, टोयोटा किर्लोस्कर और निसान को आफ्टर सेल्स सर्विस में लेवल प्लेइंग फील्ड तैयार करने का भी आदेश दिया है।

कॉम्पेट ने इन कम्पनियों को Spare Parts की सप्लाई पर लगाई गई सभी तरह ही बंदिशे हटा लेने का आदेश दिया है साथ ही कहा है कि स्पेयर पार्ट्स कम्पनी के ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर की तरह आम गैराज को भी उपलब्ध हों। साथ ही इन कम्पनियों से अपने सभी स्पेयर पार्ट्स की एमआरपी वेबसाइट पर डालने को भी कहा है।

फोर्ड इंडिया के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुराग मेहरोत्रा ने हाल ही बिज़डम ऑटो को बताया कि कम्पनी 2.0 स्ट्रेटेजी के तहत कॉस्ट ऑफ ओनरशिप व कस्टमर एक्सपीरियंस को बेहतर करने पर काम कर रही है। फोर्ड की गाडिय़ोंं की आमतौर पर पहचान महंगे मेंटीनेन्स के लिये है लेकिन कम्पनी की फीगो की सर्विस 1600 रुपये में होती है वहीं टॉपएंड एंडेवर की 5300 रुपये में। कम्पनी ने अपने सभी Spare Parts की प्राइस लिस्ट भी अपनी वेबसाइट पर डाल रखी है।
कॉम्पेट ने अपने आदेश में सडक़ परिवहन मंत्रालय को भी ऑटो पार्ट्स का स्टेन्डर्ड तय करने का निर्देश दिया है।
Spare Parts का स्टेन्डर्ड तय करने से कॉम्पेट का मकसद यह है कि गाडिय़ों में एक ही स्पेसिफिकेशन के पार्ट्स लगने से कम्पनियां इनकी सप्लाई पर पाबंदी नहीं लगा पायेंगी।
कार कम्पनियों पर आरोप है कि ये Spare Parts सिर्फ अपने ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर को ही देती हैं। इस तरह मेंटीनेन्स के मामले में कम्पनियों की मोनोपॉली होती है और कस्टमर को मजबूरी में ज्यादा दाम देने पड़ते हैं।
ऐसे मामले की सुनवाई करते हुये कम्पीटिशन कमिशन ऑफ इंडिया CCI ने अगस्त 2014 में मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स सहित 14 कार कम्पनियों पर स्पेयर पार्ट्स खुले बाजार में नहीं देने और ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर पर महंगा मेंटीनेन्स करवाने के लिये कस्टमर को मजबूर करने के आरोप पर 2545 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। सीसीआई के इस आदेश के खिलाफ कम्पनियों ने अपने स्तर पर अपील कर रखी है।
इनमें से फोर्ड, निसान और टोयोटा किर्लोस्कर ने कॉम्पेट में अपील की थी जिस पर ट्रिब्यूनल ने मौखिक फैसला सुना दिया है। जबकि कई कम्पनियों ने हाईकोर्ट में अपील कर रखी है।
CCI में यह मामला वर्ष 2011 से चल रहा है। CCI ने कम्पनियों पर 2545 करोड़ रुपये का जुर्माना उन शिकायतों की सुनवाई करते हुये लगाया जिनमें कहा गया कि car makers “operate/authorise/regulate or otherwise control the operations of various authorised workshops and service stations which are in the business of selling automobile spare parts, besides, rendering aftersale automobile maintenance services”.
वर्ष 2014 में CCI ने टोयोटा पर 93.38, फोर्ड पर 39.78 और निसान पर 1.63 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया था जिसके खिलाफ इन कम्पनियों ने कॉम्पेट में अपील की थी।
टोयोटा किर्लोस्कर के वाइस चेअरमैन शेखर विश्वनाथन ने एक बयान में कहा है कि अपील में कम्पनी ने कहा था कि वह पहले से ही डीलरशिप और ऑनलाइन पार्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन चैनल टोयोटा पार्ट्स कनेक्ट के जरिये स्पेयर पार्ट्स बेच रही है। इस सिस्टम का पूरे देश में विस्तार किया जा रहा है। कम्पनी ने कम्पीटिशन की भावना के खिलाफ ऐसा कोई काम नहीं किया है जिससे जुर्माना लगाया जाये। Photo Credit: Livemint

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