Car Hacking : कार को चलता-फिरता बम बना सकते हैं टेररिस्ट

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पहली बार टेररिस्ट द्वारा Car Hacking करने और इनके चलते फिरते बम की तरह इस्तेमाल करने की आशंका जताई गई है।

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फास्ट एंड फ्यूरिअस सीरिज की हाल ही आई फिल्म द फेट ऑफ द फ्यूरिअस में एक्टर चार्लिज़ थेरॉन ने साइफर नाम के साइबर टेररिस्ट की भूमिका निभाई थी जो दर्जनों सेल्फ ड्राइविंग कारों को एक साथ हैक कर न्यूयॉर्क की सडक़ों पर कोहराम बचा देती हैं।

जैसे-जैसे ऑटोमेटिक एमरजेंसी ब्रेक, लेन चेंजिंग अलर्ट और दूसरे सेल्फ ड्राइविंग फीचर का ट्रेंड बढ़ रहा है वैसे-वैसे Car Hacking की आशंका भी बढ़ रही है। अब तक एथिकल हैकर चलती कार में सेंध लगाकर दूर बैठे अचानक ब्रेक लगाने, इलेक्ट्रॉनिक स्टीयरिंग का कंट्रोल अपने हाथ में लेने, स्पीड बेकाबू कर देने जैसे कई डेमोन्स्ट्रेशन दे चुके हैं लेकिन पहली बार टेररिस्ट द्वारा Car Hacking करने और इनके चलते फिरते बम की तरह इस्तेमाल करने की आशंका जताई गई है।

लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ द मोटर इंडस्ट्री ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मॉडर्न हाईटेक कारों को हैक कर उन्हें रिमोट कंट्रोल्ड कार बम में बदलना बहुत आसान है और यदि मैकेनिकों को कारों के सेफ्टी सिस्टम की सही ट्रेनिंग नहीं दी गई तो खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जायेेगा।

आपको बता दें कि जुलाई 2015 मेंं दो एथिकल हैकर चार्ली मिलर और क्रिस वैलासिका ने जीप ग्रांड शेरॉकी के ऑनबोर्ड कम्प्यूटर में सेंध लगाकर Car Hacking की आशंका को सही साबित कर दिया था। हाईवे पर किये गये इस कंट्रोल्ड टेस्ट में वे दूर बैठे चलती गाड़ी के इंजन को बंद करने में कामयाब रहे थे। नतीजा यह हुआ कि सॉफ्टवेयर अपडेट करने के लिये 14 लाख शेरॉकी जीप कम्पनी क्राइस्लर को रीकॉल करनी पड़ गईं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ महिनों में फ्रांस और जर्मनी में टेररिस्ट द्वारा ट्रकों से कुचलकर दर्जनों लोगों की मार देने की कई घटनायें सामने आने के बाद Car Hacking को लेकर खतरा और भी ज्यादा बढ़ गया है। आईएमआई के प्रवक्ता कहते हैं कि टेररिस्ट कार को रिमोट कंट्रोल बम बना सकते हैं और सबसे बड़ी बात इन Car Bomb को चलाने के लिये किसी ड्राइवर की भी जरूरत नहीं है क्योंकि ये इनमें ड्राइवरलैस ड्राइविंग के फीचर हैं।

लोबरो यूनिवर्सिटी के प्रॉफेसर जिम सैकर कहते हैं कि कारों में साइबर सिक्यॉरिटी को मजबूत करने की जरूरत है। हालांकि अभी तक टेररिस्ट द्वारा Car Hacking का कोई मामला सामने नहीं आया है लेकिन दूर बैठे कार का कंट्रोल अपने हाथ में ले सकने वाली टेक्नोलॉजी तो मौजूद है ही।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आम मैकेनिक गाडिय़ों के इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम का पूरा डेटा एक्सैस करते हैं ऐसे में सबसे ज्यादा हैकिंग का खतरा इसी से हो सकता है। Car Hacking के खतरे को कम करने के लिये मैकेनिकों को साइबर सिक्यॉरिटी की ट्रेनिंग दिया जाना जरूरी है।

हालांकि नई पीढ़ी की गाडियों में यूजर को सर्विस अलर्ट और परफॉर्मेन्स का डेटा मिलने से बहुत सुविधा हुई है लेकिन ज्यादातर लोगों को इन स्मार्ट और कनेक्टेड कारों के हैक हो जाने के खतरे का अहसास नहीं है। Photo Credit: Youtube

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