BS6 emission norms से 2.53 लाख रुपये तक महंगी हो सकती हैं गाडिय़ां

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BS6 emission norms से पेट्रोल गाडिय़ों पर होगा मामूली असर लेकिन डीजल की कार-एसयूवी 20 फीसदी तक महंगी हो सकती हैं।

BS-6 emission normsअप्रेल 2020 से BS6 emission norms लागू होंगे। टेक्नोलॉजी अपग्रेड करने से 2-व्हीलर 5 फीसदी यानि 3 हजार रुपये, पेट्रोल कार 2 फीसदी यानि 11 हजार रुपये, डीजल कार/एसयूवी 20 फीसदी यानि 1.30, डीजल मिनीट्रक/वैन 23 फीसदी यानि 1.23 लाख तक और ट्रक-बस 20 फीसदी यानि 2.53 लाख रुपये तक महंगे हो जायेंगे।

इन्हें डीजल फोकस वाली कम्पनियों जैसे Tata Motors, Mahindra & Mahindra के लिये बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि Tata Motors Revotron पेट्रोल इंजन लॉन्च कर चुकी है और Mahindra ने KUV100 के साथ mFalcon पेट्रोल इंजन को बाजार मेंं उतारा है। लेकिन Tata और Mahindra की इस कोशिश को रिस्क मैनेजमेंंट से ज्यादा कुछ नहीं कह सकते ऐसे मेें भारत स्टेज-6 यानि BS6 emission norms मानक लागू होने का फायदा सबसे ज्यादा उन कम्पनियोंं को होगा जिनका परम्परागत रूप से फोकस पेट्रोल इंजन पर रहा है। इन कम्पनियों में Maruti, Hyundai और Honda सबसे प्रमुख हैं लेकिन मार्केट शेयर और वॉल्यूम के लिहाज से सबसे ज्यादा फायदा Maruti Suzuki को होगा।

कोटक सिक्यॉरिटीज़ की रिपोर्ट के अनुसार BS6 emission norms लागू होने से पेट्रोल पर जहां मामूली असर पड़ेगा वहीं डीजल की गाडिय़ां एक लाख रुपये तक महंगी हो जायेंगी। इसका सीधा अर्थ है कि पैसेंजर वॉल्यूम में पेट्रोल मॉडलों का शेयर बढ़ेगा और इसका उन कम्पनियों को फायदा होगा जिनकी सेल्स में पेट्रोल मॉडलों का दबदबा है।

मारुति और इंडस्ट्री: फाइनेन्शियल ईयर 2009 में देश में कुल 1023781 पेट्रोल के पैसेंजर वेहीकल बिके थे जिनमें मारुति के 612144 यानि 59.8 फीसदी थे। 2014 में इंडस्ट्री का कुल पेट्रोल वॉल्यूम 1176119 यूनिट्स था जिसमें मारुति का योगदान 713643 यानि पूरे 60.7 फीसदी रहा। फाइनेन्शियल ईयर 2015 में भी इंडस्ट्री के पेट्रोल वेहीकल वॉल्यूम में Maruti Suzuki का मार्केट शेयर 60.7 फीसदी ही था।

कोटक की रिपोर्ट में कहा गया है कि फाइनेन्शियल ईयर 2016 में पेट्रोल की पैसेंजर वेहीकल इंडस्ट्री 1545014 यूनिट्स की रहने का आंकलन है और इसमें मारुति का शेयर 901315 यूनिट्स रहेगा यानि 58.3 फीसदी।

वर्ष 2022 में देश में पेट्रोल-डीजल मिलाकर कुल पैसेंजर वेहीकल इंडस्ट्री 5544696 यूनिट्स तक पहुंच जाने का आंकलन है जिसमें पेट्रोल मॉडलों का शेयर 70 फीसदी के करीब यानि 38.81 लाख यूनिट्स रहेगा। इन 38.81 लाख में से अकेले मारुति की गाडिय़ां 22.40 लाख होंगी। इस तरह फाइनेन्शियल ईयर 2022 में इंडस्ट्री के कुल पेट्रोल वॉल्यूम में मारुति का मार्केट शेयर 57.7 फीसदी रहेगा।

डीजल डाउन: 2020 से देश में BS6 उत्सर्जन मानक लागू होने हैं। फाइनेन्शियल ईयर 2022 में पेट्रोल-डीजल मिलाकर कुल पैसेंजर वेहीकल इंडस्ट्री 55.44 लाख यूनिट्स की होगी और इसमें डीजल मॉडलों का कुल वॉल्यूम 16.63 लाख यूनिट्स रहेगा।

चालू फायनेन्शियल ईयर में कुल पैसेंजर व्हीकल इंडस्ट्री में डीजल मॉडलों का शेयर 45 फीसदी रहने का आंकलन है। वहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 तक यह घटकर 30 फीसदी ही रह जायेगा।

कॉस्ट कैलकुलेशन: कोटक की रिपोर्ट के अनुसार अप्रेल 2020 से BS6 emission norms लागू होने का प्रतिशत और लागत में सबसे ज्यादा असर डीजल की गाडिय़ों पर पड़ेगा। जहां टू-व्हीलर को इन नये BS6 emission norms के हिसाब से अपग्रेड करने पर इनकी लागत 5 फीसदी बढ़ेगी जो मौजूदा कीमत के हिसाब से करीब 3075 रुपये होती है। पेट्रोल के पैसेंजर मॉडलों की लागत पर नये मानकों का सिर्फ 2 फीसदी असर होगा जो करीब 11 हजार रुपये होता है। लेकिन डीजल की गाडिय़ों को BS6 emission norms मानकों के लिये अपग्रेड करने से उनकी लागत 20 फीसदी तक बढ़ सकती है यानि ज्यादातर एसयूवी/एमयूवी मॉडल 1.30 लाख रुपये तक महंगे हो सकते हैं।
नये मानकों के लिये ट्रक-बस के इंजन और एक्जॉस्ट सिस्टम को अपग्रेड करने से उनकी लागत पर 13 फीसदी असर पड़ेगा यानि ये गाडिय़ां 2.53 लाख रुपये तक महंगी हो सकती हैं। 

टाटा और महिन्द्रा जैसी कम्पनियां जिनकी सेल्स में डीजल और एलसीवी दोनों का बड़ा योगदान पर दोहरी मार पडऩे की आशंका है। रिपोर्ट मेें कहा गया है कि नये BS6 emission norms मानकों के अनुरूप टाटा एस जैसे पिकअप मॉडलों को अपग्रेड करने से उनकी लागत 23 फीसदी बढ़ जायेगी यानि इन गाडिय़ों की प्राइस 1.23 लाख रुपये तक बढ़ सकती है।

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