SIAM: ऑटो इंडस्ट्री ने उठाई Scrappage Policy की मांग लेकिन सरकार का ग्रीन गाडिय़ों पर फोकस

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SIAM convention7 सितम्बर को दिल्ली में हुई सियाम कॉन्क्लेव में ऑटो इंडस्ट्री में रेगुलेटरी सिस्टम में बार-बार फेरबदल करने को लेकर तीखी नाराजगी दिखाई दी लेकिन भारत सरकार ने पॉल्यूशन की समस्या और बढ़ते फ्यूल इम्पोर्ट बिल को देखते हुये ग्रीन गाडिय़ों पर फोकस बढ़ाने के लिये इंडस्ट्री से अपील की।

सियाम कॉन्क्लेव में बोलते हुये सियाम के निवर्तमान अध्यक्ष और अशोक लेलैंड के एमडी विनोद के दासारी ने दिल्ली-एनसीआर में 2.0 ली. से बड़े डीजल इंजन की पैसेंंजर गाडिय़ों की सेल्स पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई महिने के लिये लगाई गई पाबंदी, कम्पनियों को नॉन बीएस-4 स्टॉक निपटाने के लिये मौका दिये बिना एकतरफा बीएस4 मानक लागू करने, बीएस5 के बजाय 2020 से सीधे बीएस6 मानक लागू करने जैसे मुद्दों पर गहरी नाराजगी जताई।

विनोद दासारी ने सरकार से ऑटो इंडस्ट्री को बार-बार बदलती गाइडलाइन्स और अदालतों के औचक फैसलों से आ रही दिक्कतों को देखते हुये लॉन्ग टर्म रोडमैप बनाने के लिये नेशनल ऑटोमोटिव बोर्ड बनाने की भी मांग की।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार को पॉल्यूशन की चुनौती से निपटने के लिये बीएस1 से पहले के मानकों वाली गाडिय़ों को सडक़ से हटाने की जरूरत है। इसके लिये सरकार को 15 साल से ज्यादा पुरानी गाडिय़ों को हटाने के लिये कदम उठाने की जरूरत है और कई सालों से लटकी हुई स्क्रेपेज पॉलिसी को जल्दी मंजूरी देनी चाहिये।

लेकिन सडक़ परिवहन, नेशनल हाईवेज़ और नमामी गंगे मिनिस्टर नितिन गडक़री ऑटो इंडस्ट्री की पॉल्यूशन की बढ़ती समस्या, सरकार के बढ़ते ऑयल इम्पोर्ट बिल, वॉटरवेज़ के विकास पर हाल के सालों में हुये बड़े निवेश और देश के कुछ शहरों में ग्रीन फ्यूल व इलेक्ट्रिक गाडिय़ों के पायलट कामयाब रहने का उदाहरण देते हुये ऑटो इंडस्ट्री की खिंचाई भी की। उन्होंने कहा कि ऑटो इंडस्ट्री को बदलते ईकोसिस्टम को समझने की जरूरत है। सरकार की पॉलिसी बिल्कुल साफ है आप या तो सरकार की सुन लें या फिर सुप्रीम कोर्ट की। गडक़री के अनुसार 2013 तक देश में 96 हजार किलोमीटर नेशनल हाईवेज़ थे अब यह 1.70 लाख किलोमीटर हो गये हैं। देश में 52 लाख किलोमीटर सडक़ें हैं। नेशनल हाईवेज़ भले ही सिर्फ 2 परसेंट हैं लेकिन 40 परसेंट ट्रेफिक इन्हीं पर चलता है।

गडक़री ने कहा कि ऑटो इंडस्ट्री को पेट्रोल-डीजल खासकर डीजल को छोडक़र मेथेनॉल, बायो सीएनजी, सीएनजी, इलेक्ट्रिक आदि नई और कामयाब तकनीकों को अपनाने की जरूरत है। कोयले से बनने वाले मेथेनॉल की लागत 22-24 रुपये किलोमीटर ऐसे में इसे वैकल्पिक फ्यूल के रूप में इस्तेमाल करने के लिये इंजन टेक्नोलॉजी में बदलाव करने की जरुरत है।

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