Auto Expo: Ashok Leyland की electric bus Circuit S डिस्प्ले

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Ashok Leyland Sun Mobility

Ashok Leyland और Sun Mobility के बीच वैश्विक साझेदारी की घोषणा जुलाई 2017 में की गई थी। इसका लक्ष्य स्मार्ट सिटीज के लिए स्मार्ट मोबिलिटी समाधानों का निर्माण करना है। अपने इसी लक्ष्य को आकार देते हुये, अशोक लेलैंड ने अपनी पहली electric bus Circuit S को ऑटो एक्सपो में डिस्प्ले किया है। इस ई-बस में Sun Mobility की स्वैपेबल स्मार्ट बैटरी का इस्तेमाल किया गया है।

electric bus Circuit S को कम्पनी भारत के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए टर्निंग पॉइंट जैसा कदम बता रही है। यह भारत की पहली स्वैप बैटरी बस है, जिसे भारतीय स्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें 25-35 लोगों के बैठने की क्षमता है, यह आसानी से स्वैपेबल, स्मार्ट बैटरीज पर चलती है, जोकि छोटी हैं और इनका वजन आम लिथियम आयन बैटरी के मुक़ाबले एक-चौथाई ही है। अपनी तरह के पहले कांसेप्ट में अशोक लेलैंड एवं सन मोबिलिटी ने सिर्फ 4 मिनट में  बैटरी बदलने का डेमोंस्ट्रेशन भी दिया।

Ashok Leyland के प्रबंध निदेशक विनोद के. दासारी के अनुसार electric bus Circuit S बस कम महंगी होंगी और इनमें रखरखाव की बहुत कम जरूरत होगी क्योंकि इसमें मूविंग पार्ट्स कम हैं, यह छोटे बैटरी पैक के कारण हल्की होगी और टेलपाइप से कोई एमिशन भी नहीं होगा

अशोक लेलैंड पहली एवं एकलौती कंपनी है, जिसने मैकेनिकल फ्युल पंप का उपयोग कर बीएस-3 एमिशन काॅम्प्लायंस को हासिल किया था। यह 2010 में SCR (सेलेक्टिव कैटालिटिक रिडक्शन) आधारित बीएस-4 समाधान विकसित करने वाली भी पहली कंपनी थी। वर्ष 2017 में, अशोक लेलैंड दुनिया की पहली एवं एकमात्र कंपनी थी, जिसने ईजीआर आधारित बीएस-4 समाधान विकसित किया और इसे iEGR (इंटेलीजेंट एक्जाॅस्ट गैस रिसर्कुलेशन) का नाम दिया गया।

Sun Mobility के सह-संस्थापक एवं वाइस चेयरमैन चेतन मैनी के अनुसार पहली बार बस से बैटरी अलग कर, बस की अपफ्रंट लागत को काफी कम किया गया है और इस टेक्नोलॉजी वाली बस की कीमत आम डीजल बस जितनी ही होगी। इसकी बैटरी के काॅम्पैक्ट एवं हलका होने से इसमें अधिक यात्री बैठ सकते हैं और खड़े होने के लिए भी अधिक जगह मिलेगी। स्वैपेबल टेक्नोलाॅजी विभिन्न प्रकार के बस प्लेटफॉर्म्स पर इस्तेमाल की जा सकती है और यह बैटरी की खपत के पे-पर-यूज माॅडल पर काम करेगी। इससे वाहन के परिचालन यानी रखरखाव एवं ऊर्जा दोनों की कुल लागत कम होगी।

 

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