Airbag Defect : Mercedes Benz को सुप्रीम कोर्ट ने दिया 10 लाख रु. जमा कराने का आदेश

0
407

Airbag Failureसुप्रीम कोर्ट ने रोड एक्सीडेंट में Airbag Defect के कारण नहीं खुलने के एक मामले में लक्जरी कार कम्पनी Mercedes Benz को कोर्ट के खजाने में 10 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया है।

क्रॉम्पटन ग्रीव्ज़ के एमडी की Mercedes Benz कार की 2006 में कंटेनर ट्रक से आमने-सामने भिडंत हो गई लेकिन कार के Airbag Defect के कारण नहीं खुले थे जिससे ड्राइवर को मामूली चोट आई लेकिन उन्हें चोट लगने के कारण डेढ़ महिने अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड की बेंच ने Mercedes Benz को नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमिशन (NCDRC) के 11 सितम्बर के आदेश के अनुसार 10 लाख रुपये कोर्ट रजिस्ट्री में जमा कराने को कहा है।

वर्ष 2011 में जयपुर के एक युवा निर्मल सर्राफ की भी Mercedes Benz एस-क्लास चलाते हुये हादसे में मौत हो गई थी। इस एक्सीडेंट में भी कार के Airbag Defect के कारण नहीं खुले थे।

Mercedes Benz की ओर से पेश हुये पूर्व वित्त मंत्री और सीनियर एडवोकेट पी चिदम्बरम ने कहा कि एनसीडीआरसी को यह फैसला नहीं सुनाना चाहिये था क्योंकि कार कमर्शियल परपज़ के लिये खरीदी गई थी ऐसे में क्रॉम्पटन ग्रीव्ज़ इस मामले में कंज्यूमर होने का दावा नहीं कर सकती। चिदम्बरम ने यह भी कहा कि एनसीडीआरसी का आदेश *कॉन्फ्लिक्टिंग* यानी कानूनसम्मत नहीं है।

क्रॉम्पटन ग्रीव्ज़ की ओर से पेश एडवोकेट अमीर ज़ैड सिंह ने कहा कि एनसीडीआरसी के आदेश में कॉन्फ्लिक्ट जैसी कोई बात नहीं है और सुप्रीम कोर्ट अपने एक आदेश में इस विवाद को सैटल कर चुका है।

उन्होंने कहा कि कम्पनी ने कार एमडी के निजी इस्तेमाल के लिये खरीदी थी और कभी-कभार ही इसे आधिकारिक काम के लिये उपयोग में लिया जाता था।

एनसीडीआरसी ने 11 सितम्बर के अपने फैसले में कार कम्पनी Mercedes Benz इंडिया और इसकी डिस्ट्रीब्यूटर डेम्लर क्राइस्लर इंडिया को अनफेयर ट्रेड प्रेक्टिस यानी अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराते हुये कार मालिक (क्रॉम्पटन ग्रीव्ज़) को 10.25 लाख रुपये का भुगतान करने को कहा था।

क्रॉम्पटन ग्रीव्ज़ के एमडी सुधीर एम त्रेहान 2002 में 45.38 लाख रुपये में खरीदी गई Mercedes Benz ई240 में यात्रा कर रहे थे कि आमने-सामने की भिडंत के बावजूद कार का Airbag Defect के कारण नहीं खुला।

राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत ने Mercedes Benz इंडिया को कार का Airbag खुलने के बारे में पूरी जानकारी ओनर्स मैन्यूअल मेें छापने और अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने का भी आदेश दिया। अदालत ने कम्पनी को 5 लाख रुपये Airbag नहीं खुलने के मुआवजे और पांच लाख रुपये सेवादोष की भरपाई के पेटे कार मालिक को चुकाने का आदेश दिया। साथ ही कानूनी खर्च के रूप में 25 हजार रुपये का भुगतान करने को भी कहा।

शिकायत में क्रॉम्पटन ग्रीव्ज़ ने आरोप लगाया कि कार बेचते समय Mercedes Benz ने इसे सबसे सुरक्षित कार बताया था।

2006 में हुआ एक्सीडेंट इतना तेज था कि कार का पूरा अगला हिस्सा खत्म हो गया था। लेकिन Airbag नहीं खुलने के कारण ड्राइवर को मामूली चोट आई जबकि त्रेहान को गंभीर चोटों के कारण 6 सप्ताह तक अस्पताल में रहना पड़ा।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि भिडंत के बावजूद कार का एक भी Airbag नहीं खुला और यदि एअरबैग खुलता तो संभवत: कोई चोट नहीं आती या कम आती।

एनसीडीआरसी ने अपने आदेश में कहा था कि Mercedes Benz के ओनर्स मैन्यूअल में यह नहीं बताया गया है कि वह *प्री-डिटरमिन्ड* लेवल क्या है जिससे Airbag खुलते हैं। यदि आमने-सामने से होने वाले हर एक्सीडेंट में Airbag नहीं खुलेंगे तो फिर कार कम्पनी को यह बताना चाहिये कि वह प्री-डिटरमिन्ड लेवल क्या है जो Airbag के खुलने के लिये जरूरी है।

यदि कम्पनी ओनर्स मैन्यूअल में यह जानकारी नहीं देती है तो वह यूज़र को जरूरी जानकारी देने में चूक की दोषी है। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने यह भी कहा कि कम्पनी Airbag आदि जिन सेफ्टी फीचर्स का कार बेचने के लिये इस्तेमाल करती है यदि उनके बारे में जरूरी जानकारी नहीं दी जाती है तो यह अनुचित और गुमराह करने वाली ट्रेड प्रेक्टिस है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here