786 है ऑटो इंडस्ट्री के लिये शुभ संकेत

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यदि धर्म को एक तरफ रख दें और शगुन के इशारे को देखें तो ऑटो इंडस्ट्री के लिये फास्ट ट्रेक ग्रोथ के दरवाजे खुल रहे हैं। सियाम ने कैलेंडर साल 2015 के जो फिगर रिलीज़ किये हैं उनमें पैसेंजर सैगमेंट की ग्रोथ रेट 7.86 फीसदी रही है।

SIAM 20152014 में जहां इस सैगमेंट में 2570736 गाडिय़ां बिकी थीं वहीं जनवरी-दिसम्बर 2015 में 2772745 यूनिट्स। पैसेंजर सैगमेंट में कार मॉडलों की सेल्स 1852545 यूनिट्स के मुकाबले 9.8 फीसदी की ग्रोथ रेट के साथ 2034015 यूनिट्स पर पहुंच गई। ऑटो इंडस्ट्री के इतिहास में पहली बार है जब कार मॉडलों की सेल्स एक कैलेंडर साल में 20 लाख यूनिट्स के लेवल को पार कर गईलेकिन 19.9 लाख से 20.34 लाख तक का फासला बहुत लम्बा रहा है। वर्ष 2012 में देश में 19.9 लाख कारें बिकी थीं। 2013 में डिस्पैच वॉल्यूम घटकर 18.1 लाख यूनिट्स रह गया। 2014 में थोड़ा सुधरकर 18.5 लाख। आखिर 2015 में जाकर कार सेल्स 20 लाख के स्तर को पार कर पाई। वह भी तब जब 1 जनवरी 2015 में 2 फीसदी एक्साइज छूट भी खत्म हो गई थी। लेकिन महिन्द्रा टीयूवी300, मारुति एस-क्रॉस, ह्यूंदे क्रेटा और रेनो लॉज़ी की लॉन्चिंग के बावजूद यूवी सैगमेंट की ग्रोथ रेट सिर्फ 3.58 फीसदी रही है। 2016 में आधा दर्जन यूवी मॉडल लॉन्च होने हैं ऐसे में पीवी सैगमेंट की ग्रोथ में इन मॉडलों क हिस्सा भी बढ़ेगा।

लेकिन टू-व्हीलर सैगमेंट का गियर बदलने में अभी वक्त लगेगा। रूरल इकोनॉमी के हालात बहुत कमजोर हैं और इसमें अगले मॉनसून के बाद आने वाली फसल के बाद ही सुधार आ सकता है। रूरल इकोनॉमी से जुड़े हुये पास के कस्बों पर भी असर पड़ रहा है और इसके चलते हाल के सालों में स्कूटर बाजार के रूप में उभरे इन इलाकों में स्कूटर डिमांड कमजोर पड़ रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2015 में स्कूटर सैगमेेंट की वॉल्यूम ग्रोथ 25 फीसदी से घटकर दिसम्बर में 3 फीसदी पर आ गई। हालांकि जनवरी-दिसम्बर के बीच स्कूटर मॉडलों की सेल्स 43.20 लाख के मुकाबले 12.94 फीसदी बढक़र 48.80 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई। इसके साथ ही टू-व्हीलर के कुल वॉल्यूम में स्कूटर मॉडलों का हिस्सा 30 फीसदी को पार कर गया। कैलेंडर वर्ष 2015 में कुल 16122322 टू-व्हीलर बिके जिनमें 4880117 स्कूटर थे।

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