रीकॉल रिस्क के लिये इंश्योरेंस करायेंगी ऑटो कम्पनियां

0
644

air-bag1

एक ओर मामूली गड़बड़ी पर भी रीकॉल करना ऑटो कम्पनियों की मजबूरी है दूसरी ओर भारत सरकार ऐसे मामलों में कम्पनियों पर बड़ा जुर्माना लगाने की नीति तैयार कर रही है। रीकॉल से पडऩे वाले वित्तीय बोझ और सरकारी जुर्माने के असर को कम करने के लिये ऑटो कम्पनियां अब इंश्योरेंस पॉलिसी लेने पर विचार करने लगी हैं।
सडक़ परिवहन मंत्रालय ने नया मोटर वेहीकल एक्ट तैयार किया है और इसके संसद के मौजूदा सैशन में पेश होने की संभावना है। इसमें रीकॉल को शामिल किया गया है और ड्राफ्ट प्रस्ताव को यदि इसी स्वरूप में मंजूरी मिलती है तो रीकॉल के मामले में कम्पनियों पर जुर्माना और दंड के कड़े नियम लागू होंगे।
अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित ऑटो मार्केट्स में रीकॉल रिस्क कवरेज वाली इंश्योरेंस पॉलिसी लेने का चलन काफी पुराना है लेकिन भारत में अभी रीकॉल नीति लागू नहीं होने के कारण शायद कुछ ही कम्पनियां इस तरह की पॉलिसियां लेती होंगी।
प्राइसवॉटर हाउसकूपर्स के एनेलिस्ट अब्दुल मजीद के अनुसार जनवरी से नवम्बर के बीच दुनियाभर से करीब 2.90 करोड़ गाडियां रीकॉल हो चुकी हैं। भारत में सियाम ने जुलाई 2012 में वॉलंटरी रीकॉल नीति को लागू किया था और तब से अब तक ऑटो कम्पनियां करीब छह लाख गाडिय़ां रीकॉल कर चुकी हैं।
नये मोटर वेहीकल एक्ट में डिफेक्टिव गाडिय़ां बनाने और बेचने पर ऑटो कम्पनियों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है इस तरह ऑटो कम्पनियों के साथ ही कम्पोनेंट निर्माताओं पर भी वित्तीय दबाव बढ़ेगा।
हालांकि बीमा कम्पनियां भी इस तरह के प्रॉडक्ट लॉन्च करने से पहले रीकॉल प्रक्रिया और उससे जुड़ी लागत के हर पहलू को गहराई से समझना चाहती हैं।
महिन्द्रा एंड महिन्द्रा सहित कई कम्पनियों का कहना है कि इस बारे में फैसला नई रीकॉल नीति के लागू होने पर किया जायेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here