डेटसन गो: प्राइस एंड स्टायल पावर

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Datsun-Go-Launched

30 हजार यूनिट्स की हर महिने बिक्री वाले मारुति ऑल्टो और हुंडई ईऑन के सैगमेंट में निसान ने डेटसन गो  पेश कर मुकाबला कड़ा करने की कोशिश की है। डेटसन नया ब्रांड है जो भारत जैसे एमर्जिंग कार बाजारों के लिये 30 साल बाद फिर से खड़ा किया गया है। निसान की योजना डेटसन रेंज में तीन मॉडल पेश करने की है, पहला मॉडल गो हैचबैक आ चुका है, कुछ महिनों बाद 7 सीटर गो+ को पेश किया जायेगा और 2016 में एक मॉडल और आने की बात है।
इंजन ये अपने सैगमेंट में अकेला मॉडल है जिसमें 1200 सीसी का इंजन है। मारुति ऑल्टो के10 में एक लीटर इंजन है जबकि हुंडई ईऑन में 800 सीसी का। यानि इंजन के लिहाज से डेटसन गो बाकी दोनों मॉडलों पर भारी पड़ती है। कम्पनी ने 68 पीएस वाले इस इंजन के लिये 20.63 किमी का मायलेज प्रमाणित किया है।
डिजायन व स्टायलिंग के लिहाज से भी डेटसन गो बेहद अपमार्केट नजर आती है। ऑल्टो के-10 जहां बेहद सादा और फंक्शनल डिजायन वाली है वहीं डेटसन गो में आपको एस्पिरेशनल फील मिलेगी। हुंडई ईऑन डिजायन के लिहाज से तो पूरे सैगमेंट में सबसे अट्रेक्टिव मॉडल है लेकिन बॉडी साइज और स्टान्स के मोर्चे पर डेटसन गो से कहीं पिछड़ती सी महसूस होती है। 3.19 लाख रुपये की बेहद आक्रामक शुरुआती कीमत के साथ डेटसन गो का मुकाबला भले ही एंट्री लेवल हैचबैक मॉडलों से हो लेकिन इसके निशाने पर मारुति सेलेरियो, वैगन-आर, फोर्ड ईको, हुंडई की पुरानी आई-10 तक हर मॉडल है।
Datsun-Go-Interiorइंटीरियर बेहद स्पेशियस है और पांच लोगों के लिये आपको कहीं जगह की कमी महसूस नहीं होगी। फ्रंट सीट के बीच बाकी मॉडलों में हैंडब्रेक लीवर के लिये खाली जगह होती है लेकिन डेटसन गो में दोनों सीट्स को जोड़ कर बेंच सा बनाया गया है यानि थोड़े खाते-पीते घर की सवारियों को भी इसमें घुसकर नहीं बल्कि खुलकर बैठने की जगह मिल जाती है। हैडरेस्ट एडजस्टेबल नहीं बल्कि इंटीग्रेटेड है। डैशबोर्ड का डिजायन प्राइस पोजिशनिंग के हिसाब से देखें तो बहुत भारी लगता है। म्यूजिक सिस्टम में सीडी और एफएम प्ले की सुविधा नहीं है इसके लिये आपको अपने मोबाइल फोन, टेब या आईपॉड को कनेक्ट करना होगा। गियर शाफ्ट व हैंड ब्रेक को भी सेंट्रल कंसोल पर माउंट किया गया है यानि आगे की सीट पर जरूरत पडऩे पर तीन सवारी भी बैठ सकती हैं। डी1 वैरियेंट में फ्रंट डोर पर बोतल रखने की जगह मिल जायेगी लेकिन जो अखरता है वो है यूटिलिटी बॉक्स में ढक्कन नहीं होना, इससे रफ्तार में ब्रेक लगाने पर सामान गिरने का डर रहता है। पीछे की सीट भी आरामदायक हैं, फ्रंट सीट्स को पूरा पीछे लेने के बावजूद बैठने की जगह ठीक-ठाक निकल आती है। टॉप एंड वैरियेंट में भी रियर पार्सल ट्रे और रियर पावर विंडो नहीं मिलेंगी।
डेटसन गो की पूरी पैकेजिंग का आंकलन करें तो डिजायन व स्टायल के मामले में यह सैगमेंट लीडर है, इंजन बढिय़ा है लेकिन फीचर पैकेजिंग कई जगह अखरती है। सभी बेसिक फीचर्स से लैस एक टॉप एंड वैरियेंट तैयार करने की जरूरत महसूस होती है। इसके अलावा साउंड इंसुलेशन भी कमजोर है और खराब रास्तों पर तो टायरों की रोलिंग साउंड ज्यादा अखरती है। व्हील आर्च दमदार हैं ऐसे में टायर साइज़ थोड़ा बड़ा होना चाहिये था। इससे स्टान्स को चार चांद लग जाते। फिर भी निसान की कस्टमर व आफ्टर सेल्स सर्विस को किनारे रख दिया जाये और सिर्फ प्रॉडक्ट पर गौर किया जाये तो इफेक्टिव मार्केटिंग व केम्पेनिंग से यह मॉडल जम सकता है।
कम्पनी की कोशिश डेटसन गो से निसान डीलरशिप्स पर फुलफॉल बढ़ाने की है जो हो सकता है, बशर्ते प्रॉडक्ट व सेल्स प्रॉसेस को और थोड़ा फाइन ट्यून किया जाये। बिज़डम ऑटो को भी टेस्ट ड्राइव एट होम के लिये 2 बार रजिस्ट्रेशन और कई बार फॉलो अप के बावजूद 15 दिन तक इंतजार करना पड़ा है। आम कस्टमर को टेस्ट ड्राइव लेने के लिये डीलर आउटलैट तक आने के लिये कहा जा रहा है जबकि बाकी सभी कम्पनियां घर बैठे टेस्ट ड्राइव की सुविधा दे रही हैं। इस रणनीति पर भी नये सिरे से विचार करना चाहिये। मारुति ने सेलेरियो के लिये टेस्ट ड्राइव का नेशनल केम्पेन चलाया था और रिटर्न गिफ्ट भी दिये थे। डेटसन देश का कोई जाना-माना ब्रांड नहीं है ऐसे में कम्पनी जितने ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचेगी उससे ब्रांड इंट्रोडक्शन बेहतर करने में भी मदद मिलेगी। यहां तक कि लॉन्च के कई दिन बाद तक कम्पनी की वेबसाइट भी तैयार नहीं हुई और उसमें कई कमियां थी इससे भी निसान डेटसन के रवैये पर सवाल खड़े होते हैं।

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