डेटसन गो को बाजार से हटाये निसान: ग्लोबल एनकैप

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datsun-goबेहद कमजोर बिक्री से जूझ रही डेटसन गो निसान इंडिया के लिये नये विवादों का कारण बन रही है। अभी चार दिन पहले ही ग्लोबल एनकैप के क्रेश टेस्ट में इस बेहद महत्वाकांक्षी मॉडल को अडल्ट सेफ्टी के लिहाज से ज़ीरो रेटिंग मिली थी। इस क्रेश टेस्ट रिपोर्ट को आधार बनाकर ग्लोबल एनकैप के अध्यक्ष मैक्स मॉस्ले ने निसान के अध्यक्ष और सीईओ कार्लोस गोन को कड़ा पत्र लिखते हुये इस मॉडल को भारत सहित अन्य सभी बाजारों से हटा लेने के लिये कहा है।
मॉस्ले ने कहा है कि “It is extremely disappointing that Nissan has authorised the launch of a brand new model that is so clearly sub-standard. As presently engineered, the Datsun Go will certainly fail to pass the United Nation’s frontal impact regulation. In these circumstances, I would urge Nissan to withdraw the Datsun Go from sale in India pending an urgent redesign of the car’s body-shell.”    

यानि निसान द्वारा ऐसे मॉडल को बाजार में उतारने से बड़ा दुख हो रहा है जो साफतौर पर सबस्टेन्डर्ड यानि बेहद कमजोर क्वॉलिटी का है। डेटसन गो मौजूदा डिजायन में निश्चित तौर पर संयुक्त राष्ट्र संघ के फ्रंट इम्पेक्ट रेगुलेशन में पास नहीं हो पायेगी। ऐसे हालातों में मैं निसान से डेटसन गो मॉडल को भारत के बाजार से हटा लेने और इसकी बॉडी को नये सिरे से डिजायन करने की अपील करता हूं।

Datsun Go Maruti Swift Fails in Global NCAP crash test

निसान इंडिया ने एक बयान जारी कर कहा है कि ऐसा कोई पत्र मिला है या नहीं अभी नहीं कह सकते , लेकिन यह भरोसा जरूर दिलाना चाहते हैं कि डेटसन गो भारत ही नहीं बल्कि रूस और दक्षिण अफ्रीका में लागू वेहीकल सेफ्टी रेगुलेशन पर खरी उतरती है। इस मॉडल को स्थानीय हालातों के अनुरूप ही डिजायन किया गया है।
ग्लोबल एनकैप की ओर से पिछले दिनों जारी क्रेश टेस्ट रिपोर्ट में कहा गया कि डेटसन गो का ढांचा बुरी तरह बिखर गया और ड्राइवर व पैसेंजर को सिर, गर्दन और टांगों में घातक चोट आने की आशंका है। चूंकि इसका ढांचा ही बेहद कमजोर है ऐसे में एअरबैग लगाने का भी कोई तुक नहीं है।
लेकिन आपको बता दें कि ग्लोबल एनकैप की ओर से डेटसन गो पर पहली बार हमला नहीं किया गया है। 7 मार्च 2014 को भी मैक्स मॉस्ले ने निसान के तब के कार्यकारी उपाध्यक्ष एंडी पामर को भी ऐसा ही पत्र लिखा था जिसका जबाव देते हुये पामर ने कहा कि उभरते हुये देशों के ग्राहकों के लिये इंटरनेशनल क्रेश मानकों पर खरे मॉडल तैयार करने का कोई तुक नहीं है।

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