डेटसन गो की एंट्री सैगमेंट में धमाकेदार एंट्री

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निसान ने डेटसन गो को जिस कीमत में पेश किया है उससे देश के तगड़े मुकाबले वाले एंट्री लेवल कार बाजार के समीकरण बदल सकते हैं। 3.12 लाख रुपये की शुरुआती कीमत के साथ निसान ने मारुति ऑल्टो के-10 और हुंडई की ईऑन को सीधे निशाने पर ले लिया है। यानि साफ है कि भारत के कार बाजार में जमने के लिये जूझती रही निसान इस मॉडल के जरिये फस्र्ट टाइम कार बायर्स के बड़े बाजार में सेंध लगाना चाहती है।
देश के एंट्री लेवल कार बाजार में अभी मारुति की ऑल्टो बेस्ट सेलर है और कम्पनी हर साल कोई ढाई लाख गाडिय़ां बेच रही है। ऑल्टो रेंज में 800 सीसी इंजन वाली ऑल्टो800 और 1 लीटर के-सीरिज इंजन से लैस के-10 हैं। वहीं हुंडई की ईऑन में भी 800 सीसी का इंजन है और कम्पनी साल में करीब एक लाख ईऑन बेच रही है। इस सैगमेंट में शेवरले की स्पार्क भी मौजूद है लेकिन महिने में इसे ढाई-तीन सौ ग्राहक ही मिल रहे हैं। दूसरी ओर निसान की डेटसन गो में माइक्रा वाला 1200 सीसी इंजन है।
यदि बात करें कीमत की तो डेटसन गो को कम्पनी ने तीन वैरियेंटों में पेश किया है और नई दिल्ली में इनकी एक्स-शोरूम कीमत 3.12, 3.46 और 3.69 लाख रुपये है। वहीं हुंडई की ईऑन रेंज पांच वैरियेटों में 2.83 से 3.81 लाख रुपये के बीच मुहैया है। मारुति सुजुकी ऑल्टो के-10 दो वैरियेंटों में मौजूद है और इसकी 3.18 से 3.31 लाख रुपये के बीच है।
लेकिन निसान की राह आसान नहीं है। कम्पनी के 125 डीलर हैं और वे भी ज्यादा पहले और दूसरे दर्जे के शहरों में। वहीं हुंडई के 380 और मारुति के करीब आठ सौ। हुंडई की बिक्री में ग्रामीण हिस्सेदारी 20 फीसदी है जबकि मारुति एक तिहाई से ज्यादा बिक्री तीसरे दर्जे के शहरों और गांवों में करती है। इस लिहाज से निसान के लिये डेटसन जैसे नये और अनजान से ब्रांड को जमाना और गो को बेचना बड़ी चुनौती होगी।
निसान के लिये खतरा ये भी है डेटसन के साथ शुरुआत से ही लो कॉस्ट ब्रांड की पहचान जुड़ चुकी है। टाटा नैनो इसी लो कॉस्ट पहचान के कारण चार साल बाद भी जमने के लिये जूझ रही है। अब कम्पनी इसकी ब्रांड पोजिशनिंग को लो कॉस्ट के बजाय एस्पिरेशनल फैशन एक्सैसरी के रूप में बदलने की कोशिश कर रही है। यानि निसान की ये रणनीति बैकफायर भी कर सकती है।

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