एक्साइज छूट तो बढ़ गई, लेकिन बिक्री बढ़ेगी

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555ऑटो इंडस्ट्री की लॉबिंग फिर कामयाब रही। अंतरिम बजट में मिली एक्साइज छूट अब 30 जून के बजाय 31 दिसम्बर को खत्म होगी। एनडीए की सरकार आने के संकेत मिलते ही सियाम के जरिये ऑटो इंडस्ट्री हरकत में आ गई थी और प्री-बजट मेमोरेंडम में इतनी लम्बी लिस्ट दी कि सरकार को भारी चालू खाता घाटे के बावजूद उत्पाद शुल्क रियायत को छह महिने के लिये बढ़ाना पड़ गया। यानि 31 दिसम्बर तक स्मॉल कार, 2-व्हीलर, कमर्शियल वेहीकल्स पर 8 फीसदी एक्साइज ड्यूटी लगेगी। इसी तरह मिड साइज कारों पर 20, लार्ज कार व एसयूवी पर 24 फीसदी की रियायती एक्साइज ड्यूटी का लाभ मिलता रहेगा।
लेकिन सवाल ये है कि सरकार के इस कदम से गाडिय़ों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पहले के वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने ऑटो इंडस्ट्री की बेहद खराब हालत को देखते हुये फरवरी में 4 महिने के लिये आये अंतरिम बजट में एक्साइज ड्यूटी में रियायत दी थी। मार्च से मई की अवधि में गाडिय़ों की बिक्री कुछ इस तरह रही:
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सियाम के आंकड़ों पर आधारित इस टेबल से साफ पता चलता है कि इन तीन महिनों में सिर्फ टू-व्हीलर सैगमेंट ही लगातार ग्रीन ज़ोन में रहा है। यदि बात पैसेंजर सैगमेंट की करें तो इसमें सिर्फ मई में ही बिक्री बढ़ी है वो भी सिर्फ 2.76 फीसदी। सीवी यानि ट्रक-बस सैगमेंट के हालात लगातार खराब बने हुये हंै।
अभी मंगलवार को ही यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभागों द्वारा जारी आंकड़े सरकार की चिंता बढ़ा रहे हैं। इनमें कहा गया है कि 3-4 जुलाई को बंगाल की खाड़ी से मानसूनी बादल उठने की उम्मीद है और इसके बाद ही मानसून के आगे बढ़ पायेगा। जून का महिना खत्म होने में अब सिर्फ 5 दिन बाकी हैं और अब तक देश के पूरे दक्षिणी व पश्चिमी हिस्से को पार कर मानसूनी बादलों को उत्तर की ओर बढऩा चाहिये था। मौसम विभाग ने पिछले सप्ताह जो आंकड़े जारी किये हैं उनके अनुसार जून के शुरुआती तीन सप्ताहों में मानसूनी बारिश में 45
फीसदी की कमी आई है।
देश मेंं कारों की करीब बीस फीसदी बिक्री गांवों में होती है और कमजोर बाजार के बावजूद यहां बिक्री बढ़ रही है। गांवों की पूरी इकोनॉमी खेती पर आधारित है और यदि मानसून ने धोखा दिया तो इसका असर पूरे ऑटो सैगमेंट पर नजर आयेगा।

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