Auto industry में अच्छे दिन आने वाले हैं?

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16 मई को नतीजे आने के बाद से निगेटिव खबरें आना थम चुका है। कुछ-कुछ पॉजिटिव संकेत मिलने लगे हैं। मई के बिक्री आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। लेकिन अभी कोई यह कहने की स्थिति में नहीं है कि क्या ये अच्छे दिनों की शुरुआत है। फिर भी कई चीजों को एक साथ जोडक़र देखा जाये तो लगता है कि auto industry फिर फास्ट लेन में कदम रखने की तैयारी में है। 

May salesमई की बिक्री: सियाम के फिगर आने में अभी एक सप्ताह लगेगा लेकिन कम्पनियों के अपने-अपने आंकड़े एक हद तक अच्छे रहे हैं। यानि टॉप-8 में से सिर्फ तीन कम्पनियां ऐसी हैं जिनकी बिक्री मई में भी घटी है और टाटा, महिन्द्रा और जीएम आदि जिन कम्पनियों को नुकसान हुआ है उसका कारण एक्सटर्नल कम और इंटरनल ज्यादा है। इतना जरूर नजर आता है कि बिक्री में हुये सुधार की एक वजह नये मॉडलों को मिली कामयाबी है। ग्रांड आई-10, सेलेरियो, ईटिओस क्रॉस, नई ऑल्टिस और नई सिटी का फायदा इन कम्पनियों की बिक्री में साफ नजर आ रहा है। 

डॉलर-रुपया: पिछले वर्ष सितम्बर में डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 68.61 के स्तर तक गिर गया था। नतीजा पेट्रोल-डीजल महंगे होने के साथ ही कार कम्पनियों की इम्पोर्ट लागत बढ़ गई थी। लेकिन हाल के महिनों में रुपया लगातार मजबूत हुआ है और 17 मई को तो यह 58.57 पर आ गया। हालांकि 4 जून को यह शुरुआती कारोबार में मामूली बढक़र 59.32 के स्तर पर था।                       

अब चूंकि डॉलर में लगातार गिरावट का ट्रेंड बना हुआ है और बाजार के जानकार कहते हैं कि तीन-चार महिने में यह उसी स्तर पर पहुंच सकता है जहां से रैली स्टार्ट हुई थी। ऐसे में क्रूड इम्पोर्ट बिल में भी इसका फायदा नजर आयेगा। 

सोमवार को एलपीजी सिलिंडर की कीमत 28 रुपये घटी है। इससे भी संकेत मिल रहे हैं कि पेट्रोल भी सस्ता होगा। डीजल पर अंडर रिकवरी भी घटकर 2.80 पैसे प्रतिलीटर रह गई है ऐसे में पेट्रोल पर फैसला जल्दी हो जाने की संभावना बन रही है। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड करीब 108 डॉलर प्रति बैरल है और आने वाले महिनों में इसमें भी गिरावट की बात कही जा रही है। ऐसे में यदि रुपया महंगा होता है और क्रूड सस्ता होता है तो देश के कार बाजार के लिये बोनान्जा साबित होगा।                  

पेट्रोल-डीजल: बिक्री के लिहाज से डीजल वैरियेंट अब पेट्रोल से पिछड़ रहे हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में कुल बिक्री में पेट्रोल वैरियेंटों की हिस्सेदारी बढक़र 58 फीसदी तक पहुंच गई। देश के कार बाजार में करीब आधा योगदान पेट्रोल इंजन वाले मिनी सैगमेंट का है। ऐसे में यदि पेट्रोल सस्ता होता है तो सबसे ज्यादा फायदा इसी सैगमेंट को होगा। इस सैगमेंट में रिकवरी आती है तो इसका असर पूरे पैसेंजर सैगमेंट की ग्रोथ रेट पर नजर आयेगा। 

जीडीपी: ब्याज दरों में कमी की उम्मीद थी लेकिन रिजर्व बैंक थम्बरूल पर चल रहा है। एसएलआर में आधा फीसदी की कमी से सिस्टम में करीब 40 हजार करोड़ रुपये आयेंगे जिससे इंडस्ट्री और कंज्यूमर लोन में इजाफा होगा। यदि बात करें जीडीपी की तो पिछले वित्तीय वर्ष की हर तिमाही में जीडीपी की विकास दर आंकलन से कमजोर रही। पहली तिमाही में 4.4 फीसदी थी जो दूसरी में 4.8 हो गई लेकिन चारों तिमाहियों की औसत विकास दर 4.7 फीसदी रही।

FY 14    GDP Growth Rate%

Q1                4.4

Q2                4.8

Q3                4.7

Q4                4.6

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Net              4.7

लेकिन जो गाइडेंस और आंकलन आ रहे हैं वे बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2014-15 में जीडीपी में 5.2 से 5.5 फीसदी के बीच बढ़ोतरी होगी। लेकिन यदि निवेश बढ़ाने के लिये कुछ कदम तुरंत उठाये जायें तो यह 6 फीसदी को भी पार कर सकती है। ऐसा होता है तो रोजगार बढ़ेंगे, आमदनी बढ़ेगी और गाडिय़ां बिकेंगी।

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