बारिश में ये किया तो रिजेक्ट हो जायेगा Car Insurance क्लेम

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insurance claimपानी में से गाड़ी चलाते हुये निकालने का अपना मजा है। पानी की बौछार देखकर ही दिल खुश हो जाता है लेकिन यह मजा आपके लिये सजा बन सकता है। गाड़ी बंद हो सकती है और इंजन को भी नुकसान पहुंच सकता है। रास्ता साफ नजर नहीं आने और सडक़ों पर फिसलन बढऩे के कारण मॉनसून के दिनों में Car Insurance क्लेम की अचानक बाढ़ आ जाती है। लेकिन यदि सडक़ पर पानी भरा हो और आप गाड़ी चलाने में लापरवाही करते हैं तो Car Insurance क्लेम रिजेक्ट भी हो सकता है।

माना आपके घर की पार्किंग बेसमेंट में है। या फिर आप गाड़ी ऐसी जगह खड़ी होती है जहां ढलान के कारण पानी भरता है तो परेशानी और भी बढ़ सकती है। यदि गाड़ी का इंजन बंद है और साइलेंसर के रास्ते पानी इंजन तक पहुंच जाता है तो इंजन सीज़ भी हो सकता है।

ऐसी स्थिति में दो बातें हैं जिन पर Car Insurance क्लेम के लिहाज से ध्यान देना बहुत जरूरी है।

1. यदि गाड़ी का इंजन बंद है तो आपको Insurance Claim मिलेगा। टोइंग और ऑन-स्पॉट इंस्पेक्शन का खर्च भी इंश्योरेंस कम्पनी उठायेगी।

2. लेकिन यदि आप गाड़ी का इंजन क्रेंक करते हैं या स्टार्ट करते हैं तो मोटर इंश्योरेंस की गाइडलाइन्स के अनुसार आप बड़ी लापरवाही कर रहे हैं और कम्पनी आपका Car Insurance क्लेम रिजेक्ट कर सकती है।

मोटर इंश्योरेंस इंडस्ट्री के जानकार कहते हैं कि यदि आप पानी में फंस गये हैं और गाड़ी बंद हो गई है तो भूलकर भी गाड़ी का इंजन स्टार्ट करने की कोशिश ना करें। आप सीधा कम्पनी के कॉल सेंटर फोन लगाइये और इंस्पेक्शन एक्सपर्ट को बुलायें जो कि टो कर गाड़ी को बाहर निकालेगा। यदि आप पानी में फंसी गाड़ी को स्टार्ट करने की कोशिश करते हंैं तो इंजन को बड़ा डैमेज हो सकता है और आपका Car Insurance क्लेम रिजेक्ट हो जायेगा।

लेकिन यदि आपने Car Insurance पॉलिसी के साथ इंजन प्रॉटेक्टर एड-ऑन कवरेज लिया है तो कोई दिक्कत नहीं होगी। क्योंकि इंजन में पानी जाने के कारण ऑयल लीकेज और गियरबॉक्स को हुआ डैमेज इंजन प्रॉटेक्टर एड-ऑन-कवरेज में शामिल होता है। लेकिन यदि आपने इंजन प्रॉटेक्टर एड-ऑन कवर नहीं लिया है तो भूलकर भी पानी में फंसी गाड़ी को स्टार्ट करने की कोशिश ना करें।

बारिश के दिनों में जब गाड़ी पानी में फंसने का खतरा ज्यादा होता है रोड साइड असिस्टेंस पैकेज बड़ा मददगार साबित हो सकता है। वैसे तो आमतौर पर इंश्योरेंस कम्पनियां अपनी सभी कॉम्प्रीहेंसिव पॉलिसी में इसे शामिल करती हैें लेकिन फिर भी पॉलिसी लेते समय यह जरूर पूछ लें कि इसमें आरएसए यानि रोडसाइड असिस्टेंस सुविधा शामिल है या नहीं। यदि आपकी पॉलिसी में यह सुविधा है तो फिर आपको जहां गाड़ी बंद हुई है वहीं ब्रेक डाउन सर्विस मिलेगी और यदि टोइंग की जरूरत पड़ती है तो खर्च भी कम्पनी ही देगी।

यदि सडक़ पर पानी भरा हो तो ड्राइविंग के दौरान क्या ध्यान रखें ताकि गाड़ी पानी में ना फंसे:

-यदि पानी का लेवल टायर से ऊंचा है तो बेहतर है आप जोश में न आयें और गाड़ी पानी में ना उतारें। या तो पानी उतरने का इंतजार करें या फिर दूसरा रास्ता पकड़ें।

-लेकिन यदि पानी टायर से नीचा है तो आप सावधानी से गाड़ी निकाल सकते हैं। गाड़ी को पहले गियर में लायें और इंजन का आरपीएम बढ़ाने के लिये धीरे-धीरे एक्सीलरेटर पैडल दबायें। स्पीड धीरे-धीरे और लगातार बढ़ाते जाने से साइलेंसर से पानी अंदर जाने की आशंका खत्म हो जाती है। पानी से बाहर निकलने के बाद एक बार तेज एक्सीलरेटर दबायें जिससे साइलेंसर में घुसा थोड़ा-बहुत पानी भी साफ हो जायेगा।

-कई बार ऐसा होता है कि आपको बीच पानी में गाड़ी की स्पीड घटानी पड़ती है। ऐसी स्थिति में एक्सीलरेटर से दबाव कम करने के बजाय क्लच का इस्तेमाल करें। ध्यान रहे इंजन के आरपीएम कम नहीं होने चाहियें।

दूसरे को आगे निकलने दें: बारिश के दिनों में बेहतर है कि आप रफ्तार का मुकाबला न करें। दूसरे को आगे जाने दें क्योंकि इससे आपको अंदाजा हो जायेगा कि पानी कितना गहरा है और कहीं बीच में कोई पॉटहोल यानि गड्ढा तो नहीं है।

बीच में चलें: सिंगल रोड हो तो बेहतर है कि सडक़ के बीचों-बीच चलें क्योंकि हो सकता है किनारे से जमीन धंसी हो। यदि डिवाइडर वाली सडक़ है तो ध्यान रहे कि आप डिवाइडर के साथ वाली लेन में चलें क्योंकि बाकी सभी लेन के मुकाबले यह ज्यादा ऊंची होती है ऐसे में इस लेन पर पानी का लेवल सबसे कम होता है।

बारिश के सीजन में छोटी-छोटी इन टिप्स को ध्यान में रखेंगे तो गाड़ी के पानी में फंसने और बंद होने की आशंका कम होगी बल्कि Car Insurance क्लेम रिजेक्ट होने का खतरा भी बहुत कम हो जाता है।

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