Toyota और Suzuki सुजुकी 2020 में भारत में लॉन्च करेंगी Electric Car

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Suzuki Toyota Electric Car

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भारत सरकार का 2030 तक फुल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन अब टेकऑफ होने के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि टोयोटा और सुजुकी अब खुलकर इस मुहिम के समर्थन में आ गये हैं। टोयोटा और सुजुकी ने कहा है कि वे भारत में Electric Car  बनायेंगी।

सुुजुकी और टोयोटा ने फरवरी में आपस में हाथ मिलाये थे और मार्च में दोनों कम्पनियों के प्रमुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक साथ मिले थे।

हालांकि हाइब्रिड गाडिय़ों को जीएसटी के पीक स्लैब में रखने का टोयोटा ने ही सबसे बड़ा विरोध किया था।

टोयोटा और सुजुकी ने एक समझौते किया है जिसके तहत 2020 तक भारत में Electric Car का उत्पादन शुरू किया जायेगा।

टोयोटा ने बयान में कहा है कि सुजुकी भारत के लिये Electric Car बनायेगी। सुजुकी ही कुछ Electric Car टोयोटा को भी देगी। इसके बदले Electric Car बनाने के लिये जरूरी टेक्नोलॉजी सुजुकी को टोयोटा से मिलेगी।

टोयोटा ने यह भी कहा है कि 2020 से भारत में बनने वाली इलेक्ट्रिक गाडिय़ों में लीथियम आयन बैटरी, स्टार्टर मोटर सहित कई जरूरी कम्पोनेंट भारत से ही सोर्स किये जायेंगे।

आपको बता दें कुछ महिने पहले सुजुकी मोटर कोर्प ने जापान की डेन्सो और तोशीबा के साथ एक पार्टनरशिप की थी जिसके जरिये भारत में Electric Car के लिये लीथियम आयन बैटरी बनाई जायेंगी। करीब 1100 करोड़ रुपये के निवेश से यह प्लांट गुजरात के हंसलपुर में लगाया जा रहा है।

टोयोटा और सुजुकी के बीच फरवरी में जो पार्टनरशिप हुई इसका हब भारत ही होगा। माना जाता है कि भारत की कार बाजार के रूप में अहमियत और भारत में सुजुकी के दबदबे के चलते ही यह पार्टनरशिप हुई थी।

भारत में Electric Car के लिये जो पार्टनरशिप हुई है उसके तहत दोनों कम्पनियां चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने और आफ्टर सेल्स टीम को ट्रेनिंग देने के अलावा पुरानी बैटरियों को रीसाइकल करने के सिस्टम पर भी काम किया जायेगा।

2030 तक फुल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के अपने मिशन का पायलट इन दिनों चल रहा है और इसके तहत EESL (एनर्जी एफीशियेंसी सर्विसेस लि.) नाम की सरकारी कम्पनी सरकारी दफ्तरों और मंत्रालयों के लिये इलेक्ट्रिक गाडिय़ां खरीद रही है। इस पायलट के पहले चरण के तहत 10 हजार इलेक्ट्रिक कार खरीदने का टेंडर टाटा मोटर्स को दिया गया है।

भारत सरकार की सबसे बड़ी चिंता तेजी से बढ़ता तेल इम्पोर्ट बिल है। सरकार का आंकलन है कि वर्ष 2030 तक भारत का तेल इम्पोर्ट बिल 300 बि. डॉलर तक पहुंच जायेगा।

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