TOP ब्रांडनाम को लेकर Tata Motors ट्रेडमार्क उल्लंघन विवाद में फंसी

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tata MotorsTata Motors ने जुलाई में आये दिल्ली की एक जिला अदालत के उस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है जिसमें उसे स्पेयर पार्ट्स ब्रांडनाम TOP का इस्तेमाल ना करने के लिये पाबंद किया गया था। कम्पनी ने कहा है कि इस फैसले को लागू करने से टाटा मोटर्स को इतना नुकसान होगा जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती।

जुलाई 2017 में दिल्ली के एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने Tata Motors को TOP ब्रांडनाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया दिया था। कम्पनी *टाटा मोटर्स ऑरिजनल प्रॉडक्ट्स* के लिये * TOP * शॉर्टफॉर्म का ब्रांडनाम की तरह इस्तेमाल करती है।

दरअसल दिल्ली की एक कम्पोनेंट निर्माता कम्पनी समीर उद्योग ने शिकायत की थी कि * TOP * उसके अपने रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क * TOPS * से मिलता जुलता है और टाटा मोटर्स द्वारा * TOP * शब्द के इस्तेमाल से उसके ट्रेडमार्क अधिकारों का उल्लंघन होता है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार Tata Motors की अपील पर 20 जनवरी को सुनवाई हुई थी और कोर्ट ने कम्पनी को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी। टाटा मोटर्स के प्रवक्ता के अनुसार कोर्ट ने यह रोक एक्स-पार्टे यानी एक तरफा लगाई थी जिसे टाटा मोटर्स बदलवाने की कोशिश कर रही है और फिलहाल एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत में यह सुनवाई के लिये लिस्टेड है।

इकोनॉमिक टाइम्स में छपे Tata Motors के प्रवक्ता के बयान में कहा गया है कि कोर्ट के आदेश की अनुपालना में कम्पनी ने अपने स्पेयर पार्ट्स टाटा ऑरिजनल पार्ट्स ब्रांडनाम से बेचना शुरू कर दिया है और *TOP * ब्रांडनाम का इस्तेमाल बंद कर दिया है।

टाटा मोटर्स की लीगल टीम ने अदालत से यह प्रार्थना की थी कि कम्पनी को * TOPS * ब्रांड वाले स्पेयर पार्ट्स के स्टॉक को बेचने दिया जाये क्योंकि कम्पनी के वेअरहाउस, डिस्ट्रीब्यूटर और सर्विस सेंटरों पर करीब 350 करोड़ रुपये का स्टॉक बचा हुआ है। ऐसे में इस पाबंदी आदेश से कम्पनी की गाडिय़ों की सर्विस पर असर पड़ेगा। कम्पनी के अनुसार देश की सडक़ों पर उसकी 25 लाख गाडिय़ां चल रही हैं जिन्हें स्पेयर पार्ट्स की नियमित रूप से जरूरत पड़ती है।

Tata Indigo Vs Indigo Airlines

Tata Motors के लिये ब्रांड ट्रेडमार्क विवाद में पडऩे का यह पहला मामला नहीं है। 2005 में टाटा मोटर्स ने इंडिगो एअरलाइन्स के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन का केस दायर किया था। कम्पनी ने कहा था कि इंडिगो ब्रांडनाम उसका रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क है। टाटा मोटर्स ने कहा था कि उसने 2002 में इंडिगो ब्रांडनाम से सेडान मॉडल लॉन्च किया था जबकि इंडिगो एअरलाइन्स की शुरूआत 2006 में हुई थी। टाटा मोटर्स ने 2005 में इंडिगो एअरलाइन्स की होल्डिंग कम्पनी इंटरग्लोब एवियेशन के खिलाफ यह शिकायत की थी लेकिन इसके बावजूद एअरलाइन्स कम्पनी ने इंडिगो ब्रांडनाम को रजिस्टर कर लिया था।

हालांकि अलग-अलग कैटेगरी की कम्पनियों में एक ही ब्रांडनाम के इस्तेमाल की पुरानी परम्परा है। जैसे कि अमूल दूध और अमूल अंडरवियर।

टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एवियेशन के बीच इंडिगो ब्रांडनाम पर चल रहा विवाद अभी अदालत में पेंडिंग है।

Toyota Prius Trademark Dispute

अभी हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रायस ट्रेडमार्क मामले में ब्रांड रजिस्ट्रेशन नहीं होने के बावजूद टोयोटा के ग्लोबल ब्रांड इमेज के तर्क को खारिज कर दिया था। टोयोटा जिदोशा काबुशिकी ने दिल्ली की ऑटो कम्पोनेंट बनाने वाली कम्पनी प्रायस ऑटो इंडस्ट्रीज के खिलाफ वर्ष 2009 में प्रायस ट्रेडमार्क के उल्लंघन का केस दायर किया था।

Monte Carlo Fashions Vs. Skoda Rapid Monte Carlo

इसी तरह के एक मामले में फैशन गारमेंट्स बनाने वाली कम्पनी मॉन्टे कार्लो फैशन्स के पक्ष में फैसला सुनाया। कम्पनी ने कार निर्माता स्कोडा इंडिया के रैपिड कार के वैरियेंट का नाम मॉन्टे कार्लो रखने के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन का केस दायर किया था। अदालत ने इस केस में स्कोडा को मॉन्टे कार्लो ब्रांडनाम के इस्तेमाल के लिये पाबंद कर दिया था।

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