Toyota की डीलरशिप्स पर बिकेंगी Maruti Baleno और Vitara Brezza

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Balenoटोयोटा और मारुति सुजुकी ने कुछ महिने पहले भारत में इलेक्ट्रिक कार बनाने और बेचने के लिये पार्टनरशिप की घोषणा की थी। लेकिन अब इस पार्टनरशिप का दायरा इलेक्ट्रिक कार और हाइब्रिड कार से भी आगे बढ़ रहा है। टोयोटा और मारुति सुजुकी ने कहा है कि वे अपने-अपने मॉडल आपस में साझा करेंगी यानी टोयोटा के कुछ चुनिंदा मॉडल जिनमें Corolla शामिल है मारुति सुुजुकी के नेटवर्क पर बिकेंगे वहीं मारुति Vitara Brezza और Baleno को टोयोटा को सप्लाई करेगी जो इन्हें अपने डीलर आउटलैट्स पर बेचेगी।

एक साझा बयान में कहा गया है कि कब से और किन मॉडलों को आपस में साझा किया जायेगा यह फैसला सही समय पर किया जायेगा। साथ ही किस मॉडल की कितनी यूनिट्स किस प्राइस पर दी जायेंगी इस पर अभी विचार किया जा रहा है।

अभी विटारा ब्रेज़ा और बलेनो मारुति सुजुकी के बेस्ट सेलर मॉडलों में शामिल हैं।

बयान में आगे कहा गया है कि मॉडल साझा करने के बावजूद दोनों कम्पनियां आपस में मुकाबला करेंगी और कस्टमर ऑफरिंग को बेहतर करने के लिये काम करती रहेंगी।

टोयोटा और सुजुकी भारत में मिलकर 2020 से इलेक्ट्रिक कारों की रेंज लॉन्च करेंगी। ये गाडिय़ां मारुति (सुजुकी) के गुजरात प्लांट में बनाई जायेंगी और दोनों कम्पनियां इन्हें अपने-अपने ब्रांड के तहत बेचेंगी।

हालांकि साझा बयान में यह नहीं बताया गया है कि मारुति एक साल में टोयोटा को कितनी Baleno और Vitara Brezza सप्लाई करेगी लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह आंकड़ा 30 से 50 हजार यूनिट्स के बीच हो सकता है।

वहीं टोयोटा की पेट्रोल और हाइब्रिड कोरोला की करीब 10 हजार यूनिट्स मारूति को सप्लाई की जायेंगी।

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि दोनों कम्पनियां 2019 यानी अगले साल से अपने-अपने मॉडलों की शेयरिंग शुरू कर देंगी। यानी 2019 से मारुति विटारा ब्रेज़ा और बलेनो टोयोटा के शोरूम्स पर डिस्प्ले होने लगेगी वहीं मारुति के संभवत: नेक्सा नेटवर्क पर कोरोला की बिक्री होगी।

इस प्रॉडक्ट शेयरिंंग डील के जरिये टोयोटा की कोशिश  कैफे मानकों का पालन करने की है क्योंकि कम्पनी के अभी जो मॉडल हैं उनका मायलेज कम है ऐसे में उसके लिये कैफे यानी कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफीशियेंसी मानकों पर खरा उतरना आसान नहीं होगा। 1 अप्रैल 2017 से लागू हुए कैफ़े मानकों के तहत 2017-2022 के बीच कारों की फ्यूल एफिशिएंसी 10 परसेंट  बढ़ना जरूरी है और 2022 से फ्यूल एफिशिएंसी 30 परसेंट बढ़ानी होगी लेकिन चूंकि मारुति के साझा किये जाने वाले मॉडलों का मायलेज बेहतर है ऐसे में उसके लिये कैफे मानकों की अनुपालना में सहूलियत हो जायेगी। इसके अलावा मारुति को 10 हजार कोरोला की सप्लाई करने से उसके प्लांट का कैपेसिटी यूटिलाइजेशन भी बेहतर हो जायेगा। अभी टोयोटा के दोनों प्लांट्स करीब 50 परसेंट कैपेसिटी पर चल रहे हैं।

टोयोटा और सुजुकी (मारुति की पेतृक कम्पनी) में ग्लोबल लेवल पर टेक्नोलॉजी शेयर करने के लिये फरवरी 2017 में एक डील हुई थी जिसके तहत टोयोटा और सुजुकी मिलकर ग्रीन गाडिय़ों का विकास करेंगी।

भारत में इस तरह दो कम्पनियों में आपस में प्रॉडक्ट शेयरिंग जिसे रीबैजिंग भी कहते हैं कोई नई बात नहीं है। रेनो और निसान जहां डस्टर-टेरानो, माइक्रा-पल्स और सनी-स्काला को शेयर करते रहे हैं। वहीं फोक्सवैगन और स्कोडा रैपिड सहित अन्य मॉडलों को शेयर करते हैं।

कुछ साल पहले बंद हुई निसान की एमपीवी इवालिया को अशोक लेलैंड अपने नेटवर्क पर स्टाइल के नाम से बेचा करती थी।

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