टेस्ट ड्राइव : Datsun Go+ कॉम्पेक्ट फैमिली वैगन

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निसान इंडिया ने 30 साल बाद नये सिरे से खड़े किये अपने लो कॉस्ट ब्रांड Datsun का पहला मॉडल Go पिछले साल लॉन्च किया था। 1200 सीसी इंजन और अपने सैगमेंट में अच्छी बॉडी डिजायन के बावजूद गो ग्राहकों के दिल में नहीं उतर पाई है। शुरूआत में यह हर महिने 1000-1200 गाडिय़ां बिक रही थीं लेकिन 500 तक घट चुकी है। यानि गो मास सैगमेंट में बिक्री के लिहाज से नैनो से भी कमजोर साबित हुई है। हालांकि कम्पनी Datsun Go को नई परम्परा कह रही है और टीवी विज्ञापन में मारुति वैगन-आर से इसकी तुलना करती है लेकिन यह रेंज भी Nissan की Micra और Sunny की कमजोर बिक्री की परम्परा को आगे बढ़ाती महसूस होती है।
Datsun रेंज का अब दूसरा मॉडल Go+ बाजार में आया है। कम्पनी इसे देश का पहला कॉम्पेक्ट फैमिली वैगन कह रही है। गो हैचबैक पर आधारित Datsun Go+ 7-सीटर मॉडल है और इसमें लगेज स्पेस व सीटिंग स्पेस को यूजर अपनी सुविधा और पसंद के हिसाब से एडजस्ट कर सकता है यही इसकी खासियत भी है।
डिजायन के लिहाज से Datsun Go+ का फ्रंट फेशिया और साइड प्रॉफाइल बिल्कुल गो से मेल खाता है। हालांकि रियर एंड को नये सिरे से डिजायन कर वैगन शेप दिया गया है। गाड़ी की लम्बाई भी अब 3995 मिमी है। पिछले हिस्से में स्लोपिंग रूफलाइन और टेलगेट अच्छे से मेल खाते है और यहां डिजायनरों की मेहनत साफ नजर आती है। रियर एंड से देखने पर गो+ अपमार्केट मॉडल महसूस होता है। ग्राउंड क्लीयरेंस बढ़ाकर 170 मिमी किया गया है जिससे स्टान्स भी थोड़ा बेहतर महसूस होता है। ओवरऑल डिजायन के लिहाज से गो+ आपको मायूस नहीं करेगी।
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इंटीरियर की बात करें तो खुलापन बहुत है। डेटसन रेंज को डिजायन करने में कम्पनी का पूरा फोकस इंटीरियर स्पेस पर रहा है और यह Go और Datsun Go+ दोनों में साफ नजर आता है। डेशबोर्ड से लेकर ट्रिम, सीट क्वॉलिटी और स्विच व कंट्रोल सबकुछ गो वाला ही है। इंटीरियर स्कीम ड्यूअल टोन है। जगह-जगह यूटिलिटी स्पेस है लेकिन कॉस्ट कटिंग भी साफ नजर आती है जैसे ग्लोव बॉक्स का कवर नहीं है।
पहली और दूसरी सीट्स का अलाइनमेंट बिल्कुल गो वाला ही है। लेकिन दूसरी और तीसरी सीट्स को फंक्शनल बनाया गया है। दूसरी सीट को आप हाफ और फुल फोल्ड कर सकते हैं। तीसरी सीट्स में जगह कम है लेकिन बच्चों के लिये ठीक है। तीसरी सीट को फोल्ड करने पर 347 लीटर का लगेज स्पेस निकल आता है। यदि बच्चों का मूड पिकनिक का है तो दूसरी सीट को फुल फोल्ड करने इतना स्पेस निकल आता है कि बच्चे खेल भी सकते हैं। लेकिन तीसरी सीट बिल्कुल गाड़ी के फर्श पर है जिससे बच्चों के पांवों को भी आराम नहीं मिल सकता। यहां हल्के से गड्ढे या स्पीड ब्रेकर को क्लीयर करने के दौरान छत से टकराने का भी खतरा है। गो और गो+ में सारा खेल फुली फोल्डेबल दूसरी और तीसरी सीट्स का है। कम्पनी ने गो+ की पूरी प्रचार मुहिम में मैसेज भी यही दिया है कि अब आप नहीं सीट्स एडजस्ट हो सकती है।
इंजन 1.2 लीटर का 3 सिलिंडर गो वाला पेट्रोल इंजन है। जिससे 68 बीएचपी पावर और 104 एनएम का टॉर्क मिलता है। इंजन को कम्पनी को नये सिरे से ट्यून किया है जिससे इसका पंच बेहतर हुआ है। एआरएआई ने करीब 20 किमी का मायलेज प्रमाणित किया है।
ड्राइव के लिहाज Datsun Go+ को आप सुविधाजनक मान सकते हैं। क्लच सॉफ्ट है और अर्बन ट्रेफिक को आप हाई गियर में भी क्लीयर कर सकते हैं, बार-बार गियर बदलने की जरूरत महसूस नहीं होगी। स्टीयरिंग आप हल्के हाथ से भी कर सकते हैं। सस्पेंशन बहुत अच्छा है और अच्छे-खासे गड्ढे को भी बहुत हल्के से क्लीयर करता है। राइड एंड हैंडलिंग बहुत सुविधाजनक है। लेकिन तेजी से काटने पर रोलिंग फोर्स यानि हिचकोले साफ नजर आते है। इसका कारण छोटे व्हील, हाई ग्राउंड क्लीयरेंस और एंटी रोल बार का नहीं होना है।
go+कम्फर्ट की बात करें तो सबसे लो पॉइंट है केबिन नॉइस। टायरों की रोलिंग और रोड की साउंड जबरदस्त है और यही फीडबैक गो में भी मिला था लेकिन कम्पनी केबिन इंसुलेशन को बेहतर नहीं कर पाई।
ओवरऑल देखें तो Datsun Go+ 7 सीटर नहीं बल्कि बहुत अच्छे लगेज स्पेस के साथ 5-सीटर है। लेकिन प्राइस पोजिशनिंग इसे आकर्षक बना रही है।

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