Aadhar Card!! कार भी आपकी जासूसी करती है सरकार

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connected car spyingइन दिनों देश में Aadhar Card Privacy मामले पर बहस चल रही है। कुछ लोग कह रहे हैं कि सरकार Aadhar Card के जरिये नागरिकों की जासूसी की कोशिश कर रही है। वहीं सरकार का दावा है कि ऐसा तो फेसबुक, ट्विटर और स्मार्टफोन से भी होता है। ये दावा गलत भी नहीं है लेकिन इंटरनेट कनेक्टेड कारें तो यहां तक राज़ खोल सकती हैं कि आप क्या खाना पसंद करते हैं और कार के सेंसर यह बता सकते हैं कि फ्रंट सीट पर बैठे पैसेंजर का वजन कितना है।

हाल ही में आई एक एक्स्पर्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे बहुत से तरीके हैं जिनके जरिये नये ज़माने की कारें आपकी जासूसी करती हैं और खासकर पर्सनल हेबिट्स पर नजर रखती हैं।

ऑटो कम्पनियां इंटरनेट कनेक्टेड कारों के जरिये आपकी गाड़ी की लोकेशन ट्रेक करती हैं और उन्हें यह भी अंदाजा होता है कि गाड़ी की स्पीड क्या है, आप गाड़ी में कौनसी प्लेलिस्ट सुनते हैं, जिस सडक़ से गुजर रहे हैं वहां का मौसम कैसा है या फिर आप किस रेस्त्रां में खाना पसंद करते हैं।

दावा यहां तक कि न्यू जेनरेशन कार तो ड्राइवर की आंखों के मूवमेंट को भी रिकॉर्ड करती है।

मार्केट कन्सल्टेंट गार्टनर की रिपोर्ट कहती है कि 2025 तक दुनिया की सडक़ों पर 25 करोड़ इंटरनेट कनेक्टेड कारें होंगी। हालांकि एबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में अभी इंटरनेट कनेक्टेड कारों की संख्या 7.80 करोड़ है लेकिन यह बहुत तेजी से बढ़ रही हैं।

कुछ privacy एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन कारों से जो डेटा जमा किया जाता है उससे ड्राइवर का फिंगरप्रिंट जितना सटीक प्रॉफाइल तैयार किया जा सकता है और इसे डेटा को खरीदने के लिये मार्केटिंग कम्पनियां कुछ भी करने को तैयार रहती हैं।

वल्र्ड privacy फोरम के एक्जेक्टिव डायरेक्टर पैम डिक्सन के अनुसार खासकर गाड़ी की लोकेशन से कस्टमर और उसकी privacy को सबसे बड़ा खतरा होता है।

वे कहते हैं कि दुनिया में ऐसी बहुत सी एंटी-फ्रॉड कम्पनियां और लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसी हैं जो आपकी आदतों की गहरी जानकारी देने वाले इस डेटा को खरीद सकती हैं।

गार्टनर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगले तीन साल में अमेरिका और यूरोप में जितनी भी नई कार बिकेंगी उनमें से 98 परसेंट इंटरनेट कनेक्टेड होंगी।

कनेक्टेड कार का डेटा बेचने वाली कम्पनी ओटोनोमो की चीफ मार्केटिंग ऑफिसर लिज़ा जॉय रोज़नर के अनुसार कार कम्पनियों को अब ये अहसास होने लगा है कि वे अब सिर्फ हार्डवेयर नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर बेचने वाली कम्पनियां भी हैं।

रोज़नर के अनुसार 1981 में अंतरिक्ष में गये पहले स्पेस शटल कोलम्बिया में सिर्फ 5 लाख लाइन का सॉफ्टवेयर कोड था लेकिन फोर्ड का अंदाजा है कि 2020 से उनकी जो भी गाडिय़ां बाजार में आयेंगी उनमें 10 करोड़ लाइन का सॉफ्टवेयर कोड होगा।

हालांकि कार कम्पनियां कहती हैं कि कार से जो डेटा कलेक्ट किया जाता है उसका इस्तेमाल परफॉर्मेन्स और सेफ्टी को सुधारने के लिये होता है और इसे बिना जरूरत किसी थर्ड पार्टी के साथ शेयर नहीं किया जाता।

2014 में आई यूएस गवमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस की रिपोर्ट में का गया है कि कई बड़ी ऑटो कम्पनियां और जीपीएस मैन्यूफैक्चरर ड्राइव की लोकेशन का डेटा जमा कर रही थीं। यह डेटा गाड़ी में लगे नेवीगेशन सिस्टम से लिया जाता है। इस रिपोर्ट में जिन कम्पनियों पर ड्राइवर की लोकेशन का डेटा जमा करने का आरोप लगाया गया उनमें जीएम, फोर्ड, क्राइस्लर, होन्डा, टोयोटा, निसान आदि कार कम्पनियों के अलावा गारमिन और टॉमटॉप जीपीएस डिवाइस बनाने वाली कम्पनियां और गूगल मैप व टेलीनेव आदि एप डवलपर शामिल हैं।

अमेरिका सरकार की इस रिपोर्ट के अनुसार लोकेशन डेटा से यह भी पता लगाया जा सकता है कि यूजर किस ग्रुप से जुड़ा है या फिर किसी राजनीतिक गतिविधि में तो शामिल नहीं है।

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